रीवाः 2016 की भीषण बाढ़ से भी नहीं खुली प्रशासन की आंख, फिर डूब सकते हैं ये क्षेत्र…

Rewa

रीवा। 1997, 2003 के बाद 2016 में आई भीषण बाढ़ के बावजूद भी जिला प्रशासन ने कोई सीख नहीं ली है। 2016 में आई भीषण बाढ़ ने रीवा समेत समूचे विन्ध्य को हिलाकर रख दिया था। इस भयानक प्राकृतिक आपदा में करोड़ों का नुकसान हुआ, हजारों बेघर हो गए, कई जाने चली गई फिर भी रीवा जिले में वर्तमान की हालत पुनः 2016 की आपदा को दोहराने जैसे हो रही है।

आश्चर्य की बात तो यह है प्रशासन इसे महज एक प्राकृतिक आपदा के तौर पर देखता है परंतु हकीकत यह है कि नदी-नालों में अतिक्रमण, पानी की निकासी का उचित साधन न होना ही इस प्राकृतिक आपदा को रौद्र रूप दे देता है। 2016 में आई बाढ़ को सोचकर ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं, क्योंकि नदी की बाढ़ तो ठीक, रीवा शहर के अधिकांश क्षेत्र तो नालों की वजह से डूब गए थे फिर भी दो साल व्यतीत हो जाने के बाद भी न तो नालों की पूरी तरह से सफाई कराई गई और न ही नालों पर वर्षों से होते चले आ रहे अतिक्रमणों को हटाया गया।



हालात ऐसे हो गए हैं कि पानी निकासी की कोई व्यवस्था ही नही है। लचर प्रशासनिक व्यवस्था के चलते इस वर्ष फिर से बाढ़ आने की नौबत बन गई है। इसका ताजा उदाहरण शनिवार की बारिश है, महज एक घण्टे की बारिश ने रीवा शहर के अधिकांक्ष क्षेत्रों को पानी-पानी कर दिया था। कई घरों में नालों का गंदा पानी घुस गया, सड़कों में घुटनों भर पानी रहा। वहीं सीवर लाईन के चल रहे निर्माण कार्य के चलते कुछ क्षेत्रों में मिट्टी आकर सड़क पर बैठ गई, जिससे लोगों को आवागमन में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। घण्टे भर की बारिश ने दो दिनों तक लोगों का जीवन अस्त व्यस्त कर दिया।

नहीं हटे नदी-नालों से अतिक्रमण
2016 में आई बाढ़ के बाद तत्कालीन कलेक्टर राहुल जैन और नगर निगम कमिश्नर कर्मवीर शर्मा ने सक्रियता दिखाई। नदी-नालों से अतिक्रमण हटाने का मुहिम शुरू किया, परंतु यह मुहिम चंद दिनों तक ही मेहमान रही इसके बाद आज तक मुहिम प्रशासन के दफ्तर में रखी बंद फाइलों में दब गई। दोनो प्रशासनिक अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद तो अब तक किसी भी अधिकारी को इस मुद्दे की सुध ही नही आई। शहर के नदी-नालों पर रसूखदारों का कब्जा है और रीवा के हर रसूखदारों की प्रशासनिक रिश्तेदारी हमेशा से ही रही है इस कारण अब इन पर कार्यवाही हो पाना महज एक काल्पनिक विषय होगा।



एक बार फिर ये क्षेत्र खतरे में

नालों के कारण इन क्षेत्रों में खतरा
शहर की ही बात करें तो हाई प्रोफाईल कालोनियों में भी नालों का गंदा पानी अपनी छाप हर घर की दीवार पर छोड़ता है। इनमें नेहरू नगर, संजय नगर, चिरहुला कॉलोनी, बजरंग नगर, अमहिया, रानी तालाब इत्यादि क्षेत्रों में फिर नाली ब्लॉकेज के कारण बदबूदार गंदे पानी की बाढ़ आने का खतरा है।

नदी के कारण इन क्षेत्रों को खतरा

वहीं नदी की वजह से हमेशा बाढ़ के मुहाने में रहने वाली बस्तियों में शामिल बिछिया, निपनिया, पुष्पराज नगर, घोंघर, बांसाघाट, ढेकहा फिर से खतरे में आ गए हैं। इनके अलावा नदियों से लगे गाँव भी प्रभावित होंगे।

प्रशासन के पास कोई प्री-प्लान नहीं, समोसे-चटनी तक सीमित होती हैं मीटिंग
अब तक बचाव के लिए प्रशासन ने कोई प्लान तैयार नहीं किया है, जबकि केन्द्रीय मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि इस बार बारिश भरपूर होगी। वहीं मध्यप्रदेश समेत 14 राज्यों में अत्याधिक वर्षा की चेतावनी भी जारी की है। इसके बावजूद भी रीवा प्रशासन अभी तक सोया हुआ है। हफ्तों में बाढ़ से बचने के लिए मीटिंग रखी जाती है, जो एसी हॉल में बैठकर समोसा-चटनी के साथ गरम चाय तक ही सीमित रहती है। न ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, और न ही नालों की सफाई का कार्य शुरू हुआ। शायद प्रशासन बाढ़ आने के बाद कार्य शुरू करने की ताक में बैठा है।

देखें 2016 में आई भीषण बाढ़ की कुछ चुनिन्दा तस्वीरें

 

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