रीवा-जबलपुर शटल के टूटी पटरी से टूटने का मामला : चली जाती हजारो की जान, अब शुरू हुई जांच, पढ़िए पूरी खबर 1

रीवा-जबलपुर शटल के टूटी पटरी से टूटने का मामला : चली जाती हजारो की जान, अब शुरू हुई जांच, पढ़िए पूरी खबर

Rewa Jabalpur

जबलपुर. पमरे के जबलपुर रेल मंडल अंतर्गत निवार स्टेशन के समीप मंगलवार को पटरी टूटने (रेल फ्रेक्चर) की घटना से हादसा का शिकार होने से बाल-बाल बची जबलपुर-रीवा शटल ट्रेन के मामले की रेल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कुछ माह पहले ही रेल प्रशासन ने जबलपुर-कटनी के बीच महीनों मेगा ब्लाक लेकर पटरियों को दुरुस्त किया, जिसमें पांतें, स्लीपर बदली गईं, साथ ही ही बेलास्ट को भी चेंज किया गया, इसके बावजूद पूरी पटरी टूट गई. आखिरकार इंजीनियरिंग विभाग ने यह कैसा काम किया.

गाड़ी संख्या 51701 जबलपुर-रीवा शटल मंगलवार की सुबह 9.30 बजे के लगभग जबलपुर-कटनी रेलखंड के निवार व कटनी साउथ स्टेशन के बीच किलोमीटर नंबर 1073/2-3 पर उस समय हादसा का शिकार होने से बची, जब वहां पर पूरी पांत ही टूटी मिली. ट्रेन के लोको पायलट सुशील चौधरी व एएलपी कृष्णराज शुक्ला की सतर्कता व सूझबूझ से यह हादसा टल गया, जिन्होंने तत्काल ही ट्रेन के झटका खाते ही इमरजेंसी ब्रेक लगाकर गाड़ी को रोक दिया.

क्या पेट्रोलिंग नहीं हुई.?

इस मामले की जांच मंडल रेल प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम ने शुरू कर दी है. साथ ही इस बात पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं कि क्या पेट्रोलमैन द्वारा वहां पर पेट्रोलिंग करके ट्रेक की जांच नहीं की गई. जांच की गई तो कितनी देर पहले की गई, उसके पहले जो ट्रेन गुजरी उसके चालक को पटरी टूटने का अहसास हुआ कि नहीं आदि…

ठंड में रेल फ्रेक्चर तो गर्मियों में बकलिंग की घटनाएं होती हैं

रेलवे के जानकार बताते हंै कि ठंड के दौरान, खासकर उस समय रेल फ्रेक्चर की घटनाएं ज्यादा होती हैं, जब तापमान में ज्यादा वैरिएशन आता है, यानी एकदम से तापमान कम या ज्यादा होता है तो रेल पांतों में क्रेक हो सकता है, वहीं गर्मियों के दौरान बकलिंग अर्थात रेल पांतें फैलने की घटनाएं काफी सामने आती हैं, लेकिन नई-नइ तकनीक आने के बाद बकलिंग की घटनाएं काफी कम हो रही हैं.

महीनों लिया मेगाब्लाक, फिर भी हालात जस के तस

रेल सूत्रों के मुताबिक इस घटना ने रेलवे की इंजीनियरिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिये हैं. पिछले कुछ माह पहले इटारसी-जबलपुर, जबलपुर-कटनी के बीच महीनों तक मेगा ब्लाक लिया गया. इस दौरान कई पैसिंजर गाडिय़ों को कई माह तक इसलिए रद्द किया गया था, ताकि इंजीनियरिंग विभाग को ट्रेक के पुनरुद्धार, रखरखाव व मजबूती के लिए पर्याप्त समय दिया जा सके, लेकिन इस घटना के बाद सवाल यही उठ रहे हैं कि इंजीनियरिंग विभाग ने ऐसा कौन सा गुणवत्तापूर्ण कार्य कर दिया है, जिससे पटरी पूरी टूट गई, क्या वहां पर दो पांतो को जोडऩे वाली वेल्ंिडग खुल गई थी या फिर पांतों में ही कोई कमी थी.

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