300 करोड़ रूपए का रीवा का सबसे बड़ा घोटाला, लोकायुक्त करेगी जांच, ये है आरोपी 1

300 करोड़ रूपए का रीवा का सबसे बड़ा घोटाला, लोकायुक्त करेगी जांच, ये है आरोपी

Rewa

रीवा। शहर के स्कीम नंबर छह का मामला इनदिनों तेजी के साथ सुर्खियों में आ रहा है और उसकी परत दर परत कमियां उजागर हो रही हैं। नगर निगम को बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका है। करीब 300 करोड़ का अब तक की जांच में नुकसानी का आंकलन किया गया है, इसकी संख्या और बढऩे की संभावना है। इसलिए अब जांच कराने के लिए नगर निगम ने लोकायुक्त को मामला सौंपने का प्रस्ताव दे दिया है। जिससे अब उन तमाम लोगों की पोल खुलने की संभावना बढ़ गई है, जिन्होंने निगम को व्यापक पैमाने पर आर्थिक नुकसान पहुुंचाया है।

करीब तीन दशक का समय बीत चुका है, कई अधिकारी रिटायर्ड हो चुके हैं। कुछ की मौत भी हो चुके हैं। ऐसे में जो वर्तमान में कार्यरत हैं उन पर पहले शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है। नगर निगम आयुक्त ने नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को प्रस्ताव भेज दिया है। जिसमें स्कीम नंबर छह के अधिग्रहण से लेकर अब तक की गतिविधियों की जानकारी दी गई है। बीते करीब महीने भर से नगर निगम ने इसकी फाइलें खंगालने का काम शुरू किया है। जिसमें तत्कालीन कार्यपालन यंत्री, एसडीओ एवं वर्तमान उपयंत्री को निलंबित भी किया जा चुका है। लोकायुक्त या अन्य सक्षम एजेंसी से जांच कराने के लिए निगम की ओर से जो प्रतिवेदन दिया गया है वह 233 पेज का है। जिसमें सभी तथ्य बताए गए हैं।

– तीन सेक्टर में विभाजित है योजना
नगर सुधार न्यास बोर्ड द्वारा 6 मार्च 1992 को अधिग्रहण का प्रकाशन हुआ था। इसे तीन सेक्टरों में बांटा गया है। तीनों हिस्सों में कुछ निर्माण पहले से भी था। वर्ष 2006 में सेक्टर नंबर तीन में नवीन बस स्टैंड का निर्माण कराया गया। इसके बाद से स्कीम के लिए अधिग्रहित भूमि पर तेजी के साथ अवैध निर्माण कराए गए और अधिकारियों ने उसे प्रोत्साहित करने का काम किया। आयुक्त ने पीएस को भेजे पत्र में कहा है कि 2 जून 2009 में प्रस्ताव लाया गया था कि 17 रुपए वर्गफिट की दर से विकास शुल्क लेकर वहां पर बने मकानों को वैध किया जाए। इसकी कार्रवाई भी अधिकारियों ने नहीं की।

– राजस्व एवं जिला पंजीयन कार्यालय की भूमिका भी संदिग्ध
लोकायुक्त से जांच कराने के प्रस्ताव में यह भी उल्लेख है कि राजस्व एवं जिला पंजीयन विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों की भी संलिप्तता इसमें है। पूर्व में संभागायुक्त द्वारा कुछ राजस्व अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई थी। कुछ अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के बाद नामांतरण की प्रक्रिया सूचना के बाद भी राजस्व अधिकारियों ने नहीं की। वहीं प्र्राइवेट लोगों द्वारा अधिग्रहण के बाद रजिस्ट्रयां कराई जाती रहीं। पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर ने स्वयं संज्ञान लेते हुए 99 रजिस्ट्रियां निरस्त कर दी थी। कई तहसीलदारों के भी फंसने की आशंका जताई जा रही है।

– निगम के इन अधिकारियों की बताई भूमिका
स्कीम नंबर छह में पहले से ही अवैध रूप से मकान बनाए जा रहे थे लेकिन सबसे अधिक मनमानी 2006 से लेकर 2015 तक में पाई गई है। इस अवधि में वीबी सिंह गहरवार, रमेश सिंह बघेल एवं शैलेन्द्र शुक्ला आयुक्त की जिम्मेदारियों में रहे। इनके द्वारा न तो निगम के नाम पर भूमि के नामांतरण का प्रयास किया गया और न ही अतिक्रमण रोका गया। गहरवार एवं बघेल सेवानिवृत्त हो चुके हैं। शुक्ला कार्यपालन यंत्री भी लंबे समय तक रहे। वहीं एसडीओ एचके त्रिपाठी, उपयंत्री अंबरीश सिंह द्वारा भवन निर्माण की अनुमति भी दी जाती रही। सहायक यंत्री शिवराज सिंह का भी नाम आया है लेकिन उनकी मौत हो चुकी है। इस पूरे मामले की जांच लोकायुक्त या अन्य बड़ी एजेंसी से कराने की मांग की गई है ताकि पूरी परतें खुल सकें।

– एमआइसी की संलिप्तता भी परिलक्षित
निगम आयुक्त ने मेयर इन काउंसिल की संलिप्तता का भी हवाला देकर जांच का प्रस्ताव दिया है। जिसमें कहा गया है कि दो अधिकारियों के निलंबन का प्रस्ताव 28 दिन तक एमआइसी ने अपने पास रखा और कार्रवाई नहीं करने के लिए अलग-अलग बहाने बनाते रहे। दस दिन के भीतर प्रस्ताव पारित नहीं होने की वजह से नियमों के तहत उसे पारित माना गया और निलंबन की कार्रवाई की गई। इसलिए एमआइसी की भूमिका का भी परीक्षण किया जाए।

फैक्ट फाइल
– 6 मार्च 1992 को 91.375 एकड़ भूमि स्कीम छह के लिए अधिग्रहित।
– बरा-समान की 33.03 एकड़ भूमि का हो चुका है नामांतरण।
– शासकीय भूमि 28.80 एकड़ में 11.68 एकड़ निगम के नाम।
– 17.52 एकड़ मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य विभागों के नाम अब भी दर्ज।
– निजी भूमि 62.57 एकड़ में 21.35 एकड़ निगम के नाम हो पाई दर्ज।
– अधिग्रहित 6.78 एकड़ भूमि का मुआवजा भूमि स्वामियों को वितरित।
– 10.46 एकड़ भूमि के लिए विकास शुल्क लेकर समझौता भी किया गया।
– कलेक्टर ने 99 रजिस्ट्री कर दी थी निरस्त।

स्कीम छह में व्यापक अनियमितता हुई है। प्रथम दृष्टया तीन अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं। करीब तीन सौ करोड़ की आर्थिक क्षति का अनुमान है। इसलिए शासन को लोकायुक्त या अन्य किसी सक्षम एजेंसी से जांच कराने का प्रस्ताव दिया है।
सभाजीत यादव, आयुक्त नगर निगम

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