भारत बना रहा है सबसे ऊंची रेल लाइन, बॉर्डर तक आसानी से पहुंचेंगे सैनिक और गोला-बारूद1 min read

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नई दिल्ली : जल्द ही रेलगाड़ी के जरिए चंड़ीगढ़ से लेह पहुंचना आसान होगा. उत्तर रेलवे ने समुद्र तल से 5370 मीटर की ऊंचाई पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलमार्ग बनाने का काम शुरू कर दिया है. यह रेलमार्ग सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होगा. ये रेल लाइन आउटर हिमालयन, ग्रेट हिमालयन, शिवालिक हिल्स इन तीन पर्वतीय श्रृखलाओं से धौलाधार, पीरपंजाल, लेह, कांगड़ा, बड़ा लाचा, पींग पार्वती जैसी बड़ी पहाड़ियों से होती हुई गुजरेगी. फिलहाल रेलवे की लाइनें भानूपाली रेलवे स्टेशन तक हैं यहां से लेह तक की दूरी लगभग 475 किलोमीटर है. इस रूट पर पटरियां बिछाए जाने का काम किया जा रहा है. इस पूरे रास्ते में लगभग 244 किलोमीटर रेल पटरियों को पहाड़ों में सुरंग बना कर बिछाया जाएगा. फिलहाल भानुपाली से लेह के बीच पटरियां बिछाने का काम शुरू करने के लिए तीन सर्वे किए जाने हैं. उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विश्वेश चौबे ने बताया कि एक सर्वे पूरा हो चुका है.

50 हजार करोड़ का खर्च आएगा
इस सर्वे को पूरा करने वाली एंजेसी राईटस के अनुसार भानुपाली से लेह के बीच पटरियां बिछाने में लगभग 50,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. इस रेल मार्ग पर 30 स्टेशन, छोटे-बड़े 124 ब्रीज, छोटे-बड़े 74 सुरंगे बनाई जाएंगी. इस रूट पर लगभग 27 किलोमीटर लम्बी एक सुरंग भी बनानी पड़ेगी. दुनिया में कहीं भी रेलमार्ग पर इतनी बड़ी सुरंग नहीं बनाई गई है. लेह में जहां ट्रेन खत्म होगी वहां पर यार्ड का निर्माण किया जाएगा और उस यार्ड का नाम फेयार्ड होगा. रेलवे इस पूरे रूट पर ब्राडगेज पटरियां बिछाएगा. वहीं इस रूट पर चलाई जाने वाली रेलगाड़ियो में जरूरत को ध्यान में रखते हुए तीन इंजन लगाए जाएंगे. इसमें दो इंजन आगे और एक इंजन पीछे से ट्रेन को धक्का देगी जिससे ट्रेन सीधी चढ़ाई पर भी आसानी से चल सकेगी.

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा रेलवे का ये प्रोजेक्ट
सुरक्षा सलाहकारों के अनुसार इस रेलमार्ग को बनाए जाने के बाद से सेना चंडीगढ़ की अपनी बेस से आसानी से लेह पंहुच जाएगी. लेह के साउथ वेस्ट में पाकिस्तान, नार्थ में चाइना तुर्कीस्तान व रसियन तुर्किस्तान, ईस्ट में चाइनीज तिब्बत का ईलाका पड़ता है. इस रेल मार्ग के बनने के बाद इस क्षेत्र में सेना के जल्दी व सुगमता से पंहुचने के कारण सेना की स्थिति बोर्डर पर मजबूत होगी. सीमा पर चौकसी कर रहे जवानों से लेकर युद्ध की स्थिति में रसद, युद्ध सामग्री कारगील तक पंहुचना आसान हो जाएगा. इससे पाकिस्तान और चीन पर चौकसी करने में सेना को आसानी होगी. केंद्र सरकार लेह को मनाली से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना के साथ-साथ लेह को श्रीनगर से भी रेलमार्ग के जरिए जोड़ने की योजना पर काम कर रही है.

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