मोदी सरकार के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल, श्रम कानून लागू करने समेत ये हैं मांगें1 min read

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महंगाई, न्यूनतम भत्ता, कर्जमाफी समेत कई बड़े मुद्दों को लेकर देश के किसान और मजदूर आज दिल्ली की सड़कों पर मोदी सरकार के खिलाफ उतरे हैं. हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक के लिए मार्च कर रहे हैं.

मार्च में मौजूद किसानों ने कहा है कि चुनाव तो आते-जाते हैं, लेकिन सरकार की नीतियां गलत हैं. मोदी सरकार को किसानों, मजदूरों और गरीबों को लेकर अपनी नीतियों को बदलना चाहिए.

किसान और मजदूरों की प्रमुख मांग क्या है?

दिल्ली की सड़कों पर उतरे किसान और मजदूरों की मांग है कि रोज बढ़ रही कीमतों पर लगाम लगाई जाए और खाद्य वितरण प्रणाली की व्यवस्था को ठीक किया जाए. मौजूदा पीढ़ी को उचित रोजगार मिले और सभी मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी भत्ता 18000 रुपया प्रतिमाह तय किया जाए.

इसके अलावा कहा गया है कि मजदूरों के लिए बने कानून में मजदूर विरोधी बदलाव ना किए जाएं. किसानों के लिए स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू हों, गरीब खेती मजदूर और किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए.

सरकार से किसानों की मांग है कि खेती में लगे मजदूरों के लिए एक बेहतर कानून बने. हर ग्रामीण इलाके में मनरेगा ठीक तरीके से लागू हो, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और घर की सुविधा मिले. मजदूरों को ठेकेदारी प्रथा से छुटकारा मिलना चाहिए. भूमि अधिग्रहण के नाम पर किसानों से जबरन उनकी जमीन न छीनी जाए और प्राकृतिक आपदा से पीड़ित गरीबों को उचित राहत मिले.

मांगों के इस चार्टर को लेकर बुधवार को किसान और मजदूर संसद की ओर मार्च कर रहे हैं. किसान-मजदूरों के इस मार्च में विपक्षी दलों के कई नेताओं के शामिल होने की भी संभावना है. वामपंथी दल सीपीआईएम के महासचिव सीताराम येचुरी भी इस मार्च में हिस्सा ले सकते हैं.

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