रीवा : टिकट घोषित होते ही भाजपा-कांग्रेस में बगावत, इन सीटों पर मैदान में उतरेंगे बागी, बढ़ाएंगे परेशानी1 min read

Madhya Pradesh Rewa

रीवा। विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सभी प्रमुख दलों ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इसके साथ ही दावेदारों में असंतोष भी उभरकर सामने आ रहे हैं। कई विधानसभा सीटों पर तो कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दे दी है कि प्रत्याशी बदलो अन्यथा कोई प्रचार नहीं करेगा।
यह किसी एक दल की समस्या नहीं है, हर जगह विरोध हो रहे हैं। बसपा ने सबसे पहले प्रत्याशी घोषित किए तो वहां बगावत भी सबसे पहले शुरू हुई। मनगवां और देवतालाब की दावेदारों पार्टी छोड़कर कांग्रेस से टिकट हासिल कर ली है तो अन्य सीटों पर भी कइयों ने पार्टी छोड़ दी है। भाजपा और कांग्रेस के भी नेता बगावत का बिगुल फूंक चुके हैं और मैदान में होंगे। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पहले ही कहा था कि पैरासूट माडल पर टिकट वितरण नहीं होगा। कार्यकर्ताओं को ही टिकट दी जाएगी। कांग्रेस में रीवा जिले की तीन सीटों पर दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट दी गई है। इस कारण नाराजगी और बढ़ गई है।

जानिए विधानसभावार नेताओं के नाराजगी की स्थिति
1- सेमरिया- यहां कांग्रेस ने फिर पुराने प्रत्याशी त्रियुगीनारायण शुक्ला को मैदान में उतारा है। वह जिला अध्यक्ष भी हैं, इस कारण अधिक बगावत यहां नहीं है। दावेदार रहे प्रदीप सोहगौरा, सत्यनारायण शर्मा नाराज चल रहे हैं। भाजपा में विरोध अधिक है, यहां से दावेदार रहे लालमणि पाण्डेय, राम सिंह, राजेन्द्र त्रिपाठी, सुमन शुक्ला आदि नाराज हैं। नाराजगी बाहर भी आ रही है, यह कह रहे हैं कि टिकट वितरण के चलते पार्टी चुनाव हारेगी। अभी तक किसी ने चुनाव लडऩे की घोषणा नहीं की है।

2- सिरमौर– दोनों दलों में यहां सबसे अधिक नाराजगी देखी जा रही है। भाजपा के प्रदीप सिंह ने समाजवादी पार्टी से चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे हैं तो प्रज्ञा त्रिपाठी ने प्रदेश महामंत्री का पद त्यागने की पेशकश कर दी है। विनोद मिश्रा किसान मोर्चा का जिला अध्यक्ष, सर्जेश पाण्डेय, महाबली गौतम, रामसज्जन शुक्ला आदि भी नाराज बताए गए हैं। कांग्रेस से गिरीश सिंह, चक्रधर सिंह, रमाशंकर मिश्रा, विद्यापाल गौतम, आदित्य सिंह, प्रदीप सिंह आदि भी टिकट वितरण पर नाराज हैं। आरोप है कि घराना देखकर टिकट दिया गया, कार्यकर्ताओं को नजरंदाज किया गया है।
3-त्योंथर- यहां पर दोनों ने दलों ने डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया है। नाराजगी खुलकर सामने आई है लेकिन पार्टी के खिलाफ मैदान में उतरने अब तक कोई सामने नहीं आया है। भाजपा से कौशलेश तिवारी, राजेन्द्र गौतम, देवेन्द्र सिंह, सोनल शर्मा, ब्रम्हनारायण सिंह, अखंड गुप्ता आदि दावेदार थे। हालांकि पार्टी ने पुराने कार्यकर्ता श्यामलाल द्विवेदी को टिकट दिया, इस कारण इनका विरोध शांत भी होने लगा है। विधायक रमाकांत खुलकर पार्टी प्रत्याशी के साथ सामने आए हैं। कांग्रेस के दावेदार अशोक मिश्रा नाराज बताए जा रहे हैं, उनके समर्थक निर्दलीय लड़ाना चाह रहे हैं लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है।
4- देवतालाब– यहां कांग्रेस में सबसे अधिक बगावत है, पार्टी नेताओं ने बैठक कर टिकट बदलने की चेतावनी दे दी है। कहा है कि दूसरे दल से आए प्रत्याशी का वह प्रचार नहीं करेंगे। उदयप्रकाश मिश्रा, एसएस तिवारी, बृजभूषण शुक्ला सहित करीब दर्जन भर नेताओं ने कहा है कि टिकट नहीं बदला तो किसी एक व्यक्ति को मैदान में उतारेंगे। विरोध भाजपा में भी है, जिपं उपाध्यक्ष विभा पटेल, सुनीता पटेल, नरेन्द्र तिवारी, अवध बिहारी पाण्डेय आदि भी टिकट चाह रहे थे। कार्यकर्ताओं के बीच अब अपनी ही पार्टी की हार की भविष्यवाणी करने लगे हैं।
5- मऊगंज- सिटिंग विधायक होने की वजह से कांग्रेस में यहां से दावेदार ही सामने नहीं आए। इसलिए पार्टी के लिए यहां राहत की खबर है। वहीं भाजपा में सबसे अधिक नाराजगी जाहिर की जा रही है। दूसरे विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी प्रदीप पटेल को मैदान में उतारा गया है। जिसकी वजह से अखंड सिंह, रोशन पाण्डेय, श्रीधर पयासी, अंजू मिश्रा, संतोष सिसोदिया, वंशगोपाल तिवारी, मातेश्वरी पाण्डेय आदि ने पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बना ली है। कहा जा रहा है कि ये कांग्रेस, बसपा और ससपा को फायदा भी पहुंचा सकते हैं।
6- गुढ़- कांग्रेस में यहां भी विरोध का अधिक सामना नहीं करना पड़ रहा है। राजेन्द्र मिश्रा, सुरेन्द्र पाठक आदि दावेदार थे। पार्टी के लिए मेहनत कम करेंगे लेकिन विरोध भी नहीं करेंगे। भाजपा अंतरकलह की शिकार यहां पर भी है। ेविमलेश मिश्रा, माया सिंह, रविराज सिंह, लालबहादुर सिंह, ओमप्रकाश मिश्रा आदि तैयारी कर रहे थे। 2013 में नागेन्द्र सिंह ने कहा था कि यह आखिरी चुनाव है, आगे नहीं लड़ेंगे। अब फिर से उन्हें मैदान में उतारे जाने से वह नाराज हैं। वहीं संघ से जुड़े लोग कपिध्वज सिंह को टिकट दिलाने अंतिम तक प्रयास कर रहे थे। उसके भी कई नेता नाराज चल रहे हैं। पार्टी को अंतरकलह का सामना करना पड़ रहा है।
7- मनगवां– कांग्रेस में यहां कार्यकर्ता अधिक नाराज हैं। बीते महीने बसपा से आई बबिता साकेत को टिकट मिला है। जिससे सभी स्थानीय नेता नाराज चल रहे हैं। बिन्द्रा प्रसाद, त्रिवेणी मैत्रेय ने फार्म भी रखीद लिया है। वहीं नरेन्द्र प्रजापति, प्रीती वर्मा, अच्छेलाल आदि ने भी कहा है कि संघर्ष को तरजीह नहीं दी गई है। प्रीती वर्मा भी नामांकन दाखिल करेंगी। भाजपा की ओर से रामायण साकेत ने पद से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। जिला महामंत्री सरोज रावत ने भी पंचूलाल की टिकट पर आपत्ति दर्ज कराई है। इस आरक्षित सीट पर ब्राह्मण वर्ग के नेता भी नाराज चल रहे हैं, सबको साधने का प्रयास पार्टी कर रही है।
8- रीवा- रीवा विधानसभा की सीट इस बार पूरे विंध्य में चर्चित है। भाजपा सरकार के कद्दावर मंत्री रहे राजेन्द्र शुक्ला चुनाव मैदान में हैं तो उन्हें घेरने के लिए भाजपा से आए जिला पंचायत अध्यक्ष अभय मिश्रा को कांग्रेस ने उतारा है। इससे कांग्रेस के कई नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है, अभी किसी ने चुनाव में उतरने की घोषणा नहीं की है लेकिन दावेदार रहे नेता एवं उनके समर्थक अन्याय होने का हवाला देते हुए कह रहे हैं कि कांग्रेस ने रीवा सीट से राजेन्द्र शुक्ला के लिए मैदान ही छोड़ दिया है। पार्टी की प्रमुख दावेदार रही कविता पाण्डेय सोशल मीडिया के जरिए अपना दर्द बयां कर रही हैं तो पूर्व प्रत्याशी राजेन्द्र शर्मा भी नाराज बताए गए हैं। इसके अलावा करीब आधा दर्जन अन्य नेता हैं जो खुद को दावेदार बता रहे थे वह भी मायूष हैंै। इस सीट पर बीते कई चुनावों में भाजपा के मुकाबले में रही बसपा भी अंतरकलह की शिकार हो गई है। पूर्व प्रत्याशी केके गुप्ता को वैश्य समाज ने फार्म जमा करने का दबाव बनाया है, उन्होंने फार्म भी खरीद लिया है। वहीं मधुमास सोनी की जगह कासिम खान के नाम की घोषणां पर भी कार्यकर्ता नाराज चल रहे हैं।

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