SC/ST एक्ट : मध्‍यप्रदेश में ऐसी रणनीति बना रही भाजपा1 min read

Madhya Pradesh

भोपाल। राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र को छूने वाले मध्यप्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग पर भाजपा हाईकमान की खास नजर है। एट्रोसिटी एक्ट पर इन्हीं क्षेत्रों में अब तक सामान्य वर्ग और आरक्षित वर्ग का सर्वाधिक आक्रोश सामने आया है। 2 अप्रैल के भारत बंद में आरक्षित वर्ग के 8 लोगों की जान गई थी।

एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन के बाद सामान्य वर्ग का आंदोलन सर्वाधिक तेज यहीं रहा। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं को काले झंडे दिखाए गए। बिगड़े हालात के चलते भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का दौरा प्राथमिकता के आधार पर यहां कराया गया। फिलहाल राजस्थान में भी एट्रोसिटी का मुद्दा गर्म है। मप्र और राजस्थान के लोगों में न सिर्फ रोटी-बेटी का संबंध है, बल्कि राजनीतिक मुद्दे भी एक जैसे रहते हैं।

इसके चलते राजस्थान की हवा इन इलाकों में चल रही है। यहां बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का भी मजबूत जनाधार है। सारे हालात से निपटने के लिए भाजपा यहां जातिगत कार्ड खेलने की रणनीति बना रही है। जहां जिस जाति का जनाधार है, वहां उसी जाति का प्रत्याशी बनाए जाने पर विचार चल रहा है।

इन संभागों से भाजपा के कई बड़े नेता केंद्र व राज्य सरकार में बड़े पदों पर हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर, सांसद प्रभात झा, सांसद अनूप मिश्रा, भागीरथ प्रसाद, प्रदेश के मंत्री जयभानसिंह पवैया, मायासिंह, नारायणसिंह कुशवाह, लालसिंह आर्य, रुस्तम सिंह, यशोधरा राजे सिंधिया शामिल हैं। पार्टी हाईकमान ने सवाल उठाया कि इतना मजबूत नेतृत्व होने के बाद भी ये इलाका उपद्रव का केंद्र कैसे बना।

पार्टी ने इसी वजह से शाह का बड़ा रोड शो यहां कराया। हाईकमान चाहता है कि चुनाव के वक्त यहां कोई गड़बड़ न हो, इसलिए ऐसा कार्ड खेला जाए कि कोई नाराजी न रहे। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी भी यहां जाति के कार्ड ही खेलती है।

6% से ज्यादा वोट बसपा का

मध्यप्रदेश में बसपा ने प्रत्येक चुनाव में छह फीसदी से अधिक का वोट बैंक बरकरार रखा है। बसपा के प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह 6.42 फीसदी वोट के साथ चार सीटें जीतने में सफल रही। पार्टी दर्जनों सीटों पर कांग्रेस की हार का कारण बनी थी। बसपा उम्मीदवार लगभग 69 सीटों पर 10 हजार से अधिक वोट पाने में सफल रहे थे। 17 सीटों पर बसपा ने 35 हजार से अधिक वोट पाया था।

कम से कम 25 सीटें प्रभावित करती है सपा

2003 में हुए विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 161 प्रत्याशी उतारे थे। जिनमें से 7 जीते, 7 पर दूसरे स्थान पर, जबकि 13 तीसरे स्थान पर और 146 सीटों पर जमानत जब्त हुई। वर्ष 2008 में सपा 187 में से 1 पर जीती, 1 पर दूसरे स्थान पर, जबकि 7 पर तीसरे स्थान पर रही और 183 सीटों पर जमानत जब्त हुई

इसी तरह वर्ष 2013 में 164 में से एक भी सीट नहीं जीती, 2 पर दूसरे स्थान पर, जबकि 7 पर तीसरे स्थान पर और 161 सीटों पर जमानत जब्त हुई। सपा का प्रभाव भी ग्वालियर-चंबल और उत्तरप्रदेश से लगे बुंदेलखंड-विंध्य इलाके में रहा है।

सभी वर्ग को समझाने की कोशिश कर रहे हैं

भारतीय जनता पार्टी समाज के सभी वर्गों के बीच काम करती है। हम सभी को समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि संसद और सरकार ने जो फैसले किए हैं, वह सबका साथ सबका विकास की दृष्टि से जरूरी थे। समाज की एकात्मता के नजरिए से भी यह जरूरी है। पार्टी को भरोसा है कि हमारी बात समाज के सभी वर्ग सुनेंगे, क्योंकि हमारी नीयत साफ है।

-डॉ. दीपक विजयवर्गीय, भाजपा के मुख्य प्रवक्ता

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