ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग तीसरा दिन: कुवैत में अमेरिकी फाइटर जेट क्रैश, दुबई में धमाके, हिजबुल्लाह की एंट्री
ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग के तीसरे दिन कुवैत में अमेरिकी फाइटर जेट क्रैश, दुबई में धमाके और हिजबुल्लाह की एंट्री से तनाव बढ़ा।
इंटरनेशनल न्यूज डेस्क. मिडिल ईस्ट एक बार फिर बहु-फ्रंट जंग की आग में झुलस रहा है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुआ सीधा सैन्य टकराव तीसरे दिन और अधिक जटिल, व्यापक और खतरनाक रूप ले चुका है। मिसाइलों, ड्रोन हमलों, एयरस्ट्राइक और जवाबी कार्रवाई ने इस संघर्ष को सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहने दिया—अब इसमें लेबनान, खाड़ी देश और क्षेत्रीय सैन्य ठिकाने भी शामिल हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों और संबंधित सरकारों की आधिकारिक ब्रीफिंग के आधार पर सामने आई सूचनाएं बताती हैं कि यह टकराव तेजी से एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
जंग की शुरुआत और शुरुआती 72 घंटे
28 फरवरी को शुरू हुई सैन्य कार्रवाई ने पहले 30 घंटों में ही अभूतपूर्व तीव्रता दिखा दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, संयुक्त ऑपरेशनों के तहत ईरान के विभिन्न सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर सैकड़ों हमले किए गए। शुरुआती चरण में हवाई बमबारी, लंबी दूरी की मिसाइलें और ड्रोन स्ट्राइक प्रमुख हथियार रहे। ईरान ने भी देर नहीं की और जवाबी कार्रवाई के तौर पर इजराइल के भीतर कई सैन्य व रणनीतिक स्थानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। संघर्ष के पहले दिन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई की मौत हो गई।
तीसरे दिन तक आते-आते यह साफ हो गया कि संघर्ष सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हाई अलर्ट पर रखा गया। नागरिक उड्डयन मार्गों में बदलाव किए गए और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की।
कुवैत में अमेरिकी फाइटर जेट क्रैश: हादसा या ऑपरेशन का हिस्सा?
तीसरे दिन की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक कुवैत में अमेरिकी फाइटर जेट का क्रैश होना रहा। कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास ने मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की थी। इसी दौरान एक अमेरिकी सैन्य विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि हुई।
अभी तक आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि दुर्घटना तकनीकी खराबी का परिणाम थी या किसी ऑपरेशनल मिशन के दौरान दुश्मन की कार्रवाई का। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सक्रिय युद्ध क्षेत्र के पास उड़ान संचालन के दौरान जोखिम कई गुना बढ़ जाता है—विशेषकर तब जब एयर डिफेंस सिस्टम लगातार सक्रिय हों।
दुबई में धमाके: एयर डिफेंस सिस्टम की परीक्षा
दुबई में पहले ड्रोन हमले की खबर के लगभग 16 घंटे बाद फिर धमाकों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि एयर डिफेंस सिस्टम ने संदिग्ध ड्रोन और प्रोजेक्टाइल को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया।
यद्यपि बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि खाड़ी के आर्थिक केंद्र भी अब सुरक्षित नहीं माने जा सकते।
दोहा (कतर) और मनामा (बहरीन) में भी विस्फोटों की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे की क्षमता और समन्वय की परीक्षा ले ली है।
हिजबुल्लाह की एंट्री: लेबनान मोर्चा खुला
संघर्ष में नया मोड़ तब आया जब लेबनान स्थित संगठन Hezbollah ने उत्तरी इजराइल की ओर रॉकेट दागने की पुष्टि की। इस घोषणा ने युद्ध को एक और मोर्चा दे दिया।
इजराइल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दक्षिणी लेबनान, दहियाह और राजधानी बेरूत के आसपास के क्षेत्रों में हवाई हमले किए। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में 31 लोगों की मौत और 149 के घायल होने की पुष्टि हुई है।
इजराइल का आरोप है कि हिजबुल्लाह ने 2024 के युद्धविराम समझौते के बाद भी हथियारों का पुनर्गठन जारी रखा। वहीं हिजबुल्लाह और लेबनान के कुछ राजनीतिक धड़ों का कहना है कि इजराइल ने पहले समझौते का उल्लंघन किया।
ईरान में भारी तबाही: हताहतों का बढ़ता आंकड़ा
ईरान के विभिन्न शहरों में किए गए हमलों के बाद मृतकों और घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ईरानी मीडिया एजेंसियों ने 200 से अधिक मौतों और 740 से ज्यादा घायलों की जानकारी दी है।
कुछ रिपोर्ट्स में एक स्कूल परिसर पर हमले का भी उल्लेख है, जिसमें बड़ी संख्या में छात्राओं के मारे जाने की बात कही गई। हालांकि स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल बनी हुई है क्योंकि कई इलाकों में संचार बाधित है।
सनंदज जैसे शहरों में आवासीय इमारतों के क्षतिग्रस्त होने की तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे नागरिक आबादी पर पड़ रहे प्रभाव की गंभीरता स्पष्ट होती है।
ईरान में नेतृत्व संकट: उत्तराधिकारी कौन?
संघर्ष के पहले दिन सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के मारे जाने की खबरों ने राजनीतिक परिदृश्य को और अस्थिर कर दिया। आधिकारिक पुष्टि को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट बयान नहीं आया, लेकिन ईरान के भीतर उत्तराधिकार प्रक्रिया पर चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्ट्स में उनके बेटे Mojtaba Khamenei का नाम संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने आ रहा है। ईरान की विशेषज्ञ असेंबली द्वारा पहले ही गोपनीय विचार-विमर्श किए जाने की खबरें थीं।
इजराइल की सैन्य रणनीति और घरेलू तैयारी
इजराइल ने उत्तरी सीमा के करीब 50 से अधिक गांवों को खाली कराने का आदेश दिया। यह कदम संकेत देता है कि देश लंबे संघर्ष के लिए तैयार हो रहा है। एयर डिफेंस सिस्टम—जिनमें बहु-स्तरीय सुरक्षा ढांचे शामिल हैं—लगातार सक्रिय हैं।
सरकार ने नागरिकों को शेल्टर में रहने और आपातकालीन निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है, हालांकि आवश्यक सेवाएं जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है।
खाड़ी देशों की दुविधा
कतर, बहरीन, सऊदी अरब और यूएई जैसे देश रणनीतिक रूप से संवेदनशील स्थिति में हैं। उनके यहां अमेरिकी सैन्य उपस्थिति भी है और क्षेत्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं से गुजरता है।
यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वित्तीय बाजारों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी व्यवधान की आशंका ने तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है।
वैश्विक असर: तेल, बाजार और कूटनीति
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। निवेशकों ने जोखिम प्रीमियम जोड़ना शुरू कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने संयम बरतने की अपील की है। बैक-चैनल कूटनीतिक प्रयास जारी बताए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात फिलहाल सैन्य बढ़त की ओर इशारा कर रहे हैं।
मानवीय संकट की आशंका
संघर्ष के विस्तार से शरणार्थियों की संख्या बढ़ने का खतरा है। लेबनान और ईरान के सीमावर्ती इलाकों से लोगों के पलायन की खबरें हैं। चिकित्सा सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
यदि बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहे, तो बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। मानवीय एजेंसियों ने तत्काल सहायता और सुरक्षित गलियारों की मांग की है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले 48 से 72 घंटे निर्णायक हो सकते हैं। यदि कूटनीतिक हस्तक्षेप सफल नहीं हुआ, तो संघर्ष और देशों को अपनी चपेट में ले सकता है।
हिजबुल्लाह की सक्रिय भागीदारी, खाड़ी देशों में बढ़ती सुरक्षा चेतावनियां और ईरान के नेतृत्व पर अनिश्चितता—ये सभी संकेत देते हैं कि स्थिति बेहद नाजुक है। वहीं यूएस प्रेसिडेंट ट्रम्प का कहना है उद्ध 4 से 5 हफ्ते तक चल सकता है।