इजराइल-ईरान जंग का असर: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे, सोना 1.90 लाख तक?

इजराइल-ईरान युद्ध लंबा चला और होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो कच्चा तेल 120 डॉलर तक जा सकता है। भारत में पेट्रोल, सोना और शेयर बाजार पर बड़ा असर संभव।

Update: 2026-03-01 12:35 GMT
  • जंग लंबी चली तो कच्चा तेल 100–120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है
  • दिल्ली में पेट्रोल ₹105 और डीजल ₹96 तक पहुंचने की आशंका
  • सोना 1.90 लाख और चांदी 3.50 लाख तक जाने का अनुमान
  • सेंसेक्स-निफ्टी में 1–1.5% गिरावट संभव

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है और दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल, शेयर बाजार और सोना-चांदी की कीमतों पर दिख सकता है।

क्यों अहम है यह संकट?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। यदि सप्लाई चेन बाधित होती है तो घरेलू ईंधन कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

पेट्रोल-डीजल पर संभावित असर

विशेषज्ञों के अनुसार यदि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली सप्लाई प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। ऐसे परिदृश्य में दिल्ली में पेट्रोल ₹95 से बढ़कर ₹105 और डीजल ₹88 से ₹96 प्रति लीटर तक जा सकता है।

 

भारत करीब 50% क्रूड ऑयल इसी समुद्री मार्ग से आयात करता है। इसलिए किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर देश के ऊर्जा बिल पर पड़ेगा।

कीमतें कौन तय करता है?

देश में पेट्रोल और डीजल की बेस कीमतें सरकारी तेल कंपनियां तय करती हैं, जो पिछले 15 दिनों की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत और डॉलर-रुपया विनिमय दर पर निर्भर करती हैं। हालांकि अंतिम रिटेल कीमत में केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स का बड़ा हिस्सा शामिल होता है।

ऐसे हालात में सरकार कीमतें स्थिर रखने के लिए एक्साइज ड्यूटी घटा सकती है या कंपनियों को कीमतें न बढ़ाने का संकेत दे सकती है।

सोना-चांदी में उछाल क्यों?

कमोडिटी बाजार के जानकारों का मानना है कि युद्ध जैसे तनावपूर्ण माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प तलाशते हैं। इसी वजह से सोना और चांदी की मांग बढ़ती है। अनुमान है कि सोना 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1.90 लाख तक और चांदी 2.67 लाख रुपए किलो से 3.50 लाख तक जा सकती है।

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तनाव बढ़ने की स्थिति में सेंसेक्स में 1300 अंकों और निफ्टी में करीब 300 अंकों की गिरावट संभव है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम?

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला करीब 167 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। प्रतिदिन करीब 1.78 से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन यहां से ट्रांजिट होता है।

भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10% से अधिक हिस्सा भी इसी मार्ग से सप्लाई होता है, जिसमें बासमती चावल, चाय, मसाले और इंजीनियरिंग उत्पाद शामिल हैं।

ईरान के लिए भी जोखिम

यदि यह मार्ग बंद होता है तो ईरान खुद भी अपने तेल निर्यात से वंचित हो जाएगा। चीन, जो ईरान का बड़ा खरीदार है, सप्लाई बाधित होने पर वैकल्पिक स्रोत तलाश सकता है।

वैकल्पिक रास्ते और भारत की तैयारी

सऊदी अरब के पास ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का विकल्प मौजूद है, जिसके जरिए प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल तेल रेड सी तक भेजा जा सकता है। भारत सरकार भी खाड़ी के बाहर के देशों से आयात बढ़ाने और अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व का उपयोग करने की तैयारी में है।

Join WhatsApp Channel Follow on Google News

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने पर भारत पर क्या असर पड़ेगा?

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर दबाव बढ़ेगा।

क्या सरकार कीमतों को नियंत्रित कर सकती है?

सरकार टैक्स घटाकर या कंपनियों को निर्देश देकर राहत देने की कोशिश कर सकती है।

सोने की कीमत क्यों बढ़ती है?

अनिश्चितता के समय निवेशक सुरक्षित एसेट्स में निवेश करते हैं, जिससे मांग बढ़ती है।

क्या शेयर बाजार में बड़ी गिरावट होगी?

शॉर्ट टर्म में गिरावट संभव है, लेकिन दीर्घकालिक प्रभाव हालात पर निर्भर करेगा।

भारत के पास क्या विकल्प हैं?

वैकल्पिक सप्लायर और स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व के जरिए सप्लाई सुनिश्चित की जा सकती है।

Tags:    

Similar News