पुणे: महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर पुणे के एसएम जोशी पुल पर पिछले 10 दिनों से चल रहा अभ्यर्थियों का बड़ा आंदोलन रविवार देर रात समाप्त हो गया। राज्य सरकार द्वारा छात्रों की प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने और आयोग के पुनर्गठन के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति के गठन की घोषणा के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन वापस लेने का फैसला किया।
उच्च स्तरीय समिति का गठन: तुकाराम मुंढे बने सचिव
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक मजबूत जांच दल गठित किया है:
- अध्यक्ष: पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले को समिति की कमान सौंपी गई है।
- सचिव: कड़क छवि वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे को सचिव बनाया गया है।
- अन्य सदस्य: समिति में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक को शामिल किया गया है।
चेयरमैन विवेक भीमनवार गए लंबी छुट्टी पर
आंदोलनकारी छात्रों की सबसे अहम शर्त एमपीएससी के चेयरमैन विवेक भीमनवार को पद से हटाने की थी। औपचारिक इस्तीफे की जटिल कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए बीच का रास्ता निकाला गया। चेयरमैन विवेक भीमनवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर जानकारी दी कि जांच चलने तक वे अपने पद से अलग रहते हुए अवकाश (Leave) पर जा रहे हैं, ताकि निष्पक्ष जांच में कोई बाधा न आए।
वार्ता और सरकार के बड़े आश्वासन
छात्रों के साथ धरने में शामिल एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार और राज्य सरकार के मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले के बीच लंबी बातचीत हुई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से विचार-विमर्श के बाद सरकार ने छात्रों को निम्नलिखित अहम बिंदुओं पर आश्वस्त किया:
- 70,000 पदों पर भर्ती: आगामी तीन वर्षों के भीतर राज्य में 70,000 रिक्त पदों पर चरणबद्ध भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
- ग्रुप-सी पद बढ़ोतरी: जनवरी में प्रस्तावित 'ग्रुप सी' परीक्षा के लिए रिक्त पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
- केस वापस होंगे: यातायात बाधित करने और बिना अनुमति प्रदर्शन के आरोप में छात्र प्रतिनिधियों व अन्य पर दर्ज पुलिस एफआईआर को सरकार वापस लेगी।
- कड़ा बैकग्राउंड वेरिफिकेशन: भविष्य में एमपीएससी के अध्यक्ष और सचिव पद की नियुक्ति से पहले विस्तृत बैकग्राउंड जांच अनिवार्य की जाएगी।
छात्र प्रतिनिधि विवेकानंद पाटिल ने घोषणा की कि सरकार द्वारा जांच समिति और चेयरमैन के हटने का फैसला आधिकारिक होने के बाद आंदोलन को स्थगित कर दिया गया है। करीब 25 लाख अभ्यर्थियों के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार द्वारा दिए गए लिखित आश्वासनों की निगरानी छात्र संगठन जारी रखेंगे।















