सत्य निकेतन हादसे के बाद बनी उच्चाधिकार प्राप्त समिति
गौरतलब है कि पिछले महीने सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के ढह जाने से सात लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस दर्दनाक हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने पीजी और हॉस्टलों के संचालन के लिए एक सुदृढ़ और व्यापक नियामक ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था।
8 अक्टूबर को आयोजित समिति की दूसरी बैठक में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली पुलिस और विश्वविद्यालयों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य फोकस पीजी में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को मजबूत करना और नियमों के कानूनी अनुपालन को पारदर्शी बनाना था।
कैसा होगा नया ऑनलाइन पोर्टल?
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने जानकारी दी कि सरकार ऐसे पोर्टल के विकास पर तेजी से आगे बढ़ रही है जो छात्रों और उनके आवासों से जुड़ी तमाम जानकारियों को एक मंच पर लाएगा। इस पोर्टल की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार होंगी:
- कमरों और सुविधाओं का विवरण: पोर्टल पर पीजी में उपलब्ध कमरों की कुल संख्या, बुनियादी नागरिक सुविधाएं और सुरक्षा इंतजाम दर्ज किए जाएंगे।
- सरल पंजीकरण प्रक्रिया: व्यवस्था को सरल रखा जाएगा ताकि ऑपरेटरों के मन में कोई अनावश्यक डर या असमंजस पैदा न हो।
- ट्रायल और परीक्षण: अगले दो से चार दिनों में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और एमसीडी मिलकर पोर्टल की तकनीकी जांच और ट्रायल रन करेंगे। इसके बाद छात्र पंजीकरण के लिए आधिकारिक जागरूकता अभियान शुरू होगा।
40-45 दिनों का सीसीटीवी बैकअप और सख्त सुरक्षा मानक
बैठक में छात्र सुरक्षा के लिए कड़े नियम लागू करने पर सहमति बनी। नए दिशानिर्देशों के तहत पीजी परिसर के सभी प्रवेश और निकास द्वारों (Entry/Exit Points) तथा साझा क्षेत्रों (Common Areas) में अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे। ऑपरेटरों को इन कैमरों की रिकॉर्डिंग का 40 से 45 दिनों का बैकअप सुरक्षित रखना होगा। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ विद्यार्थियों की व्यक्तिगत निजता (प्राइवेसी) का पूरा सम्मान बना रहे।
100 चिन्हित मामलों का संयुक्त निरीक्षण
एमसीडी और डीडीए की संयुक्त टीमें अगले तीन दिनों में चिन्हित किए गए 100 पीजी और हॉस्टलों का मौके पर जाकर मुआयना करेंगी। यह टीमें संरचनात्मक मजबूती, अग्नि सुरक्षा और वैधानिक दस्तावेजों की मौके पर जांच करेंगी ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
मास्टर प्लान में रियायत के लिए सब-कमेटी गठित
पीजी संचालन में आ रही कानूनी बाधाओं और मास्टर प्लान की पाबंदियों का समाधान खोजने के लिए एक विशेष उप-समिति (सब-कमेटी) गठित की जाएगी। इस समिति में डीडीए, दिल्ली सरकार, एमसीडी और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह उप-समिति मास्टर प्लान और दिल्ली नगर निगम अधिनियम (DMC Act) के तहत संभावित रियायतों का अध्ययन करेगी, जिसमें प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों के 5-6 किलोमीटर के दायरे में, ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों और आरडब्ल्यूए क्षेत्रों में पीजी संचालन को वैध अनुमति देने की संभावनाओं पर विचार शामिल है।















