Blinkit ने हटाया ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा: हड़ताल और सरकार के दखल से बदला क्विक कॉमर्स मॉडल, जेप्टो, स्विगी भी टाइम लिमिट हटाएंगे

ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी ने हटाया ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा। गिग वर्कर्स की हड़ताल और सरकार के हस्तक्षेप के बाद बड़ा फैसला, बदलेगी क्विक कॉमर्स रणनीति।

Update: 2026-01-13 11:54 GMT
  • ब्लिंकिट ने हटाया ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा
  • गिग वर्कर्स की हड़ताल और सरकार के दखल के बाद फैसला
  • जेप्टो और स्विगी भी टाइम लिमिट हटाने पर सहमत
  • श्रम मंत्री की बैठक में वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता

India News – क्विक कॉमर्स की दुनिया में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। देश की प्रमुख इंस्टेंट डिलीवरी कंपनी ब्लिंकिट ने अपने प्लेटफॉर्म और विज्ञापनों से ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब गिग वर्कर्स लगातार कम कमाई और तेज डिलीवरी के दबाव को लेकर हड़ताल कर रहे थे और सरकार ने इस मॉडल पर सख्त रुख अपनाया था।

सरकार के साथ हुई अहम बैठक में सिर्फ ब्लिंकिट ही नहीं, बल्कि जेप्टो और स्विगी जैसी बड़ी कंपनियों ने भी यह भरोसा दिलाया है कि वे अब ग्राहकों से किसी तय समय सीमा का वादा करने वाले विज्ञापन नहीं करेंगी। इसका सीधा मतलब है कि अब “10 मिनट में सामान पहुंचेगा” जैसे दावे इतिहास बन जाएंगे।

Government Steps In | सरकार का हस्तक्षेप

हाल ही में केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने क्विक कॉमर्स कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में गिग वर्कर्स की सुरक्षा, काम की परिस्थितियों और बढ़ते सड़क हादसों को लेकर गंभीर चर्चा हुई।

बैठक में तीन अहम बातें साफ तौर पर रखी गईं—

  1. पहली, कंपनियों का बिजनेस मॉडल किसी भी हाल में वर्कर्स की जान जोखिम में डालकर नहीं चलना चाहिए।
  2. दूसरी, “10 मिनट” जैसी समय सीमा न केवल डिलीवरी राइडर्स के लिए खतरनाक है, बल्कि सड़क पर चलने वाले आम लोगों के लिए भी जोखिम पैदा करती है।
  3. तीसरी, सरकार अब गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कार्य स्थितियों को लेकर एक व्यापक नीति बनाने की तैयारी में है।

Marketing Strategy Will Change | बदलेगी मार्केटिंग रणनीति

अब तक “10 मिनट में डिलीवरी” इन कंपनियों का सबसे बड़ा यूएसपी था। यही वाक्य ग्राहकों को आकर्षित करता था और क्विक कॉमर्स को बाकी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से अलग बनाता था। लेकिन अब कंपनियों ने स्वीकार किया है कि वे अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटजी में बड़ा बदलाव करेंगी।

हालांकि कंपनियों का कहना है कि वे अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी यानी कार्यक्षमता कम नहीं करेंगी। वे तेजी से डिलीवरी करना जारी रखेंगी, लेकिन विज्ञापनों और ऐप इंटरफेस के जरिए ग्राहकों में ऐसी उम्मीद नहीं जगाई जाएगी, जिससे राइडर्स पर अस्वाभाविक दबाव बने।

Why 10-Minute Model Was Criticized | क्यों उठे सवाल

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर 10–15 मिनट की डिलीवरी को लेकर तीखी आलोचना हो रही थी। विशेषज्ञों का मानना था कि इतने कम समय में ऑर्डर पहुंचाने का दबाव राइडर्स को तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने, रेड लाइट जंप करने और जोखिम भरे रास्ते अपनाने के लिए मजबूर करता है।

सड़क सुरक्षा से जुड़े संगठनों ने भी सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। उनका कहना था कि एक ऐप पर चल रहा टाइमर सिर्फ ग्राहक को नहीं दिखता, बल्कि वही टाइमर राइडर की जिंदगी की घड़ी बन जाता है। हर सेकंड का दबाव उसे गलती करने पर मजबूर करता है।

Raghav Chadha Reacts | राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया

पंजाब से राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा—

“सत्यमेव जयते। साथ मिलकर, हम जीत गए। क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से ‘10-मिनट डिलीवरी’ वाली ब्रांडिंग हटाने के लिए मैं केंद्र सरकार का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। सरकार ने बिल्कुल सही समय पर एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है।”

उन्होंने आगे लिखा कि जब किसी राइडर की टी-शर्ट, जैकेट या बैग पर “10 मिनट” लिखा होता है और ग्राहक की स्क्रीन पर टाइमर चलता है, तो उस राइडर पर जबरदस्त मानसिक दबाव रहता है। यह दबाव न सिर्फ वास्तविक है, बल्कि हर पल बना रहता है और खतरनाक भी है।

राघव चड्ढा ने कहा कि इस फैसले से न केवल डिलीवरी राइडर्स, बल्कि सड़क पर चलने वाले बाकी लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने उन सभी नागरिकों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने गिग वर्कर्स के साथ खड़े होकर इस बदलाव की मांग की।

Gig Workers Strike Impact | गिग वर्कर्स की हड़ताल का असर

Gig Workers Strike India – "कम कमाई" और “10 मिनट में डिलीवरी” के दबाव से परेशान गिग वर्कर्स ने बीते महीनों में लगातार विरोध दर्ज कराया। 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन और फिर 31 दिसंबर को न्यू ईयर से ठीक पहले स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसी कंपनियों के राइडर्स ने हड़ताल की।

इन हड़तालों में गिग वर्कर्स की प्रमुख मांग थी कि 10 मिनट डिलीवरी मॉडल को खत्म किया जाए, न्यूनतम आय तय हो और सुरक्षा से जुड़े नियम लागू किए जाएं। इन आंदोलनों ने सरकार और कंपनियों दोनों को सोचने पर मजबूर किया कि कहीं यह “तेजी” इंसानी जान से महंगी तो नहीं पड़ रही।

🔍 क्या है गिग वर्क?

जब किसी ऑर्गनाइजेशन में टेम्परेरी पोजीशन्स आम हों और वह इंडिपेंडेंट या फ्रीलांस वर्कर्स को शॉर्ट टर्म के लिए काम देती हो, तो इसे गिग वर्क कहा जाता है।

📱 भारत में प्रमुख प्लेटफॉर्म्स:

• ओला
• जोमैटो
• पोर्टर
• उबर
• अर्बन कंपनी
• डंजो
• स्विगी
• ब्लिंक इट
• रैपिडो
• बिग बास्केट

What is Quick Commerce? | क्या है क्विक कॉमर्स

Quick Commerce Model को 15–30 मिनट के भीतर ग्रॉसरी और रोजमर्रा का सामान पहुंचाने वाला सिस्टम कहा जाता है। यह मॉडल छोटे-छोटे “डार्क स्टोर्स” पर आधारित होता है, जो रिहायशी इलाकों से 2–3 किलोमीटर के दायरे में होते हैं।

ग्राहक ऐप पर ऑर्डर करता है, पास के डार्क स्टोर से सामान निकलता है और राइडर उसे तुरंत लेकर निकल पड़ता है। यही तेजी इस मॉडल की ताकत भी है और अब सबसे बड़ी चुनौती भी बन चुकी है।

🔍 गिग वर्क: परिभाषा और मुख्य मांगें

गिग वर्क क्या है? जब कोई संस्था स्वतंत्र या फ्रीलांस वर्कर्स को शॉर्ट-टर्म के लिए काम देती है, तो इसे 'गिग वर्क' कहते हैं।

प्रमुख प्लेटफॉर्म्स:
🚗 ओला/उबर
🍕 जोमैटो
🛵 स्विगी
📦 पोर्टर/डंजो
🛠️ अर्बन कंपनी
⚡ ब्लिंकिट

🚩 वर्कर्स की प्रमुख मांगें:

⚖️ पार्टनर के बजाय 'वर्कर' का दर्जा, 8 घंटे काम और ओवरटाइम मिले।
💰 न्यूनतम किराया तय हो (जैसे कैब हेतु ₹20/किमी
)।
🛡️ हेल्थ/एक्सीडेंटल बीमा, पेंशन और पीरियड लीव की सुविधा।
🚫 मनमाने ढंग से ID ब्लॉक करना बंद हो और 10-मिनट डिलीवरी मॉडल पर पुनर्विचार।

Gig Workers in India | भारत में गिग वर्कर्स की स्थिति

भारत में इस समय करीब 80 लाख से ज्यादा लोग गिग इकोनॉमी से जुड़े हैं—डिलीवरी, कैब, फूड और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में। नीति आयोग के अनुमान के मुताबिक 2030 तक यह संख्या बढ़कर 2.35 करोड़ तक पहुंच सकती है।

इसी वजह से सरकार अब गिग वर्कर्स को औपचारिक श्रमिक ढांचे में लाने की तैयारी कर रही है। सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत 21 नवंबर 2025 से नियम लागू हो चुके हैं, जिनमें बीमा, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ शामिल हैं।

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Q&A | आपके सबसे बड़े सवालों के जवाब

क्या 10 मिनट का दावा हटाने से डिलीवरी का समय बढ़ेगा?

अब पाबंदी हटने से आपका सामान 5–10 मिनट ज्यादा समय में पहुंच सकता है। कंपनियां तेजी के साथ-साथ राइडर्स की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देंगी।

क्या यह फैसला सिर्फ विज्ञापन तक सीमित है?

नहीं। कंपनियों को अपने ऐप के एल्गोरिदम और वर्किंग मॉडल बदलने होंगे ताकि राइडर्स पर दबाव कम हो सके।

नियम न मानने वाली कंपनियों पर क्या कार्रवाई होगी?

नए कानून के तहत भारी जुर्माना लगेगा और नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड सख्त निगरानी रखेगा।

डिलीवरी पार्टनर्स की आय पर क्या असर पड़ेगा?

समय बढ़ने से प्रति घंटे ऑर्डर कम हो सकते हैं, जिससे दैनिक कमाई पर असर पड़ सकता है।

सरकार और कंपनियों में क्या सहमति बनी?

10 मिनट का वादा ब्रांडिंग से हटेगा और वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।

सड़क हादसों के आंकड़े क्या कहते हैं?

पुख्ता आंकड़ों के बजाय संसद में राइडर्स की “पीड़ा और बदहाली” पर चर्चा हुई है।

नई मार्केटिंग स्ट्रैटजी में क्या बदलेगा?

अब कंपनियां “फास्ट” की जगह “वैराइटी और भरोसे” पर फोकस करेंगी, जैसे 30,000+ प्रोडक्ट्स।

गिग वर्कर्स की हड़ताल का ठोस नतीजा?

सरकार का हस्तक्षेप और गिग वर्कर्स को कानूनी सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम।

क्विक कॉमर्स के भविष्य पर असर?

अब मुकाबला “सबसे तेज” का नहीं, बल्कि “सबसे भरोसेमंद” ब्रांड बनने का होगा।

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