ट्रम्प का बड़ा ऐलान: ईरान से व्यापार किया तो 25% टैरिफ तय, भारत पर 75% टैक्स का खतरा; ईरान की करेंसी लगभग शून्य

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसमें भारत भी शामिल है। ईरान की करेंसी रियाल लगभग शून्य हो गई है, जबकि भारत पर कुल टैरिफ 75% तक पहुंच सकता है। जानिए इस फैसले का भारत, वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।

Update: 2026-01-13 07:15 GMT

📰 Top News Highlights

  • डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया।
  • इस फैसले में भारत भी शामिल है, जिससे कुल टैरिफ 75% तक पहुंच सकता है।
  • ईरान की करेंसी रियाल की वैल्यू लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है।
  • चीन, UAE और भारत ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं।

Trump Iran Tariff Announcement | ट्रम्प का ईरान पर बड़ा वार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वैश्विक व्यापार जगत को हिला देने वाला बयान देते हुए कहा है कि जो भी देश ईरान से व्यापार करेगा, उस पर अमेरिका 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा। ट्रम्प ने यह घोषणा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर की और साफ शब्दों में कहा कि यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इस ऐलान के बाद दुनिया भर के उन देशों में चिंता बढ़ गई है, जो किसी न किसी रूप में ईरान के साथ कारोबारी रिश्ते रखते हैं।

हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से अभी तक इस फैसले को लेकर कोई आधिकारिक दस्तावेज जारी नहीं किया गया है, लेकिन ट्रम्प के बयान को गंभीरता से लिया जा रहा है। अमेरिका में राष्ट्रपति का ऐसा सार्वजनिक ऐलान अक्सर नीतिगत बदलावों की दिशा तय करता है। खास बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो चुके हैं और वहां की आंतरिक स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

Iran Currency Crash | ईरान की करेंसी लगभग शून्य

ट्रम्प के बयान के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही गंभीर संकट में है। ईरानी करेंसी रियाल की वैल्यू लगभग शून्य के बराबर पहुंच चुकी है। भारतीय मुद्रा में देखें तो 1 रियाल की कीमत केवल 0.000079 रुपए रह गई है। यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान के आम नागरिकों की जिंदगी पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

महंगाई आसमान छू रही है, आयात महंगा हो चुका है और लोगों की क्रय शक्ति तेजी से घट रही है। आर्थिक दबाव ही वह चिंगारी बना, जिसने अब सरकार विरोधी आंदोलनों का रूप ले लिया है। कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और सीधे तौर पर सत्ता को चुनौती दे रहे हैं।

India in Trouble? | भारत पर बढ़ता टैरिफ दबाव

इस पूरे घटनाक्रम में भारत की स्थिति सबसे ज्यादा संवेदनशील मानी जा रही है। अमेरिका पहले ही भारत पर कुल 50% टैरिफ लगा चुका है। इसमें 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और 25% रूस से कच्चा तेल आयात करने पर लगाया गया अतिरिक्त शुल्क शामिल है। अब अगर ईरान से व्यापार को लेकर भी भारत पर 25% और टैरिफ लगाया गया, तो कुल दर 75% तक पहुंच सकती है।

इसका सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ेगा। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद पहले ही महंगे हो चुके हैं, जिससे कई सेक्टर में ऑर्डर घटने लगे हैं। टेक्सटाइल, स्टील, ऑटो पार्ट्स और केमिकल इंडस्ट्री जैसे क्षेत्रों पर इसका खास असर देखने को मिल सकता है।

ईरान के टॉप 5 ट्रेड पार्टनर

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🇮🇷 ईरान के टॉप-5 ट्रेड पार्टनर

देश कुल ट्रेड (अमेरिकी डॉलर में)
🇨🇳 चीन 45 अरब
🇦🇪 UAE (यूएई) 30 अरब
🇮🇳 भारत 14 अरब
🇹🇷 तुर्किये 10 अरब
🇮🇶 इराक 8 अरब


Global Trade Shock | वैश्विक व्यापार पर असर

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान से व्यापार करने वाले प्रमुख देशों में चीन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और भारत शामिल हैं। अमेरिका के इस फैसले से इन सभी देशों के अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टैरिफ नीति सख्ती से लागू होती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

ईरान मुख्य रूप से कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और पेट्रोकेमिकल्स का निर्यात करता है। इन उत्पादों पर निर्भर कई देश अब वैकल्पिक बाजार तलाशने को मजबूर होंगे। इससे ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

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Supreme Court & Trump Tariff Power | सुप्रीम कोर्ट बनाम ट्रम्प

ट्रम्प के टैरिफ फैसलों पर अब अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट की नजर भी टिकी हुई है। बुधवार को कोर्ट इस बात पर फैसला सुना सकती है कि राष्ट्रपति को मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने का अधिकार कितना है। खुद डोनाल्ड ट्रम्प ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि अगर कोर्ट ने उनके अधिकार सीमित कर दिए, तो अमेरिका को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि पहले वसूले गए टैरिफ लौटाने पड़े, तो यह प्रक्रिया बेहद जटिल और लंबी होगी। उन्होंने कहा कि यह तय करना मुश्किल होगा कि किसे, कब और कितना पैसा लौटाया जाए। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला केवल कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका की भविष्य की व्यापार नीति को भी दिशा देगा।

Iran Protests & Death Toll | ईरान में प्रदर्शन और मौतें

ईरान में बीते 17 दिनों से सरकार और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। शुरुआत में ये आंदोलन महंगाई और बेरोजगारी जैसे आर्थिक मुद्दों से जुड़े थे, लेकिन अब ये सीधे सत्ता के खिलाफ बदल चुके हैं। सड़कों पर उतर रहे लोग बदलाव की मांग कर रहे हैं।

इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए हुई कार्रवाई में अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। नॉर्वे स्थित गैर-सरकारी संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स के अनुसार मरने वालों में नाबालिग भी शामिल हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चिंता का विषय बन चुकी है।

Iran Trade Structure | ईरान का व्यापार ढांचा

वर्ल्ड बैंक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ईरान का कुल व्यापार करीब 140 अरब डॉलर का है। इसमें लगभग 80 अरब डॉलर का निर्यात और करीब 58 अरब डॉलर का आयात शामिल है। ईरान मुख्य रूप से कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, प्राकृतिक गैस और पेट्रोकेमिकल्स का निर्यात करता है।

इसके अलावा स्टील, तांबा, कृषि उत्पाद और खनिज भी ईरान के निर्यात का हिस्सा हैं। आयात की बात करें तो ईरान मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दवाएं और औद्योगिक कच्चा माल बाहर से मंगाता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान एशिया और खाड़ी देशों के जरिए अपना व्यापार किसी तरह जारी रखे हुए है।

India–US Trade Talks | भारत-अमेरिका ट्रेड डील

भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील बातचीत इस वक्त बेहद अहम मोड़ पर है। भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से तेल आयात पर लगाए गए अतिरिक्त 25% शुल्क को पूरी तरह हटाया जाए।

अगर ईरान से व्यापार को लेकर भी भारत पर 25% और टैरिफ लगाया गया, तो यह भारतीय उद्योग के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। निर्यात घटने से रोजगार पर असर पड़ेगा और कई सेक्टर में उत्पादन धीमा हो सकता है। जानकार मानते हैं कि आने वाले हफ्तों में भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा काफी हद तक इन फैसलों पर निर्भर करेगी।

What Lies Ahead | आगे क्या?

ट्रम्प का यह फैसला केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया को एक संदेश देता है कि अमेरिका अपनी शर्तों पर व्यापार कराना चाहता है। जिन देशों की अर्थव्यवस्था ऊर्जा आयात पर निर्भर है, उनके लिए यह एक नई चुनौती बन सकती है।

भारत जैसे देशों के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर सस्ती ऊर्जा की जरूरत और दूसरी ओर अमेरिकी बाजार तक पहुंच बनाए रखने की मजबूरी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या देश अमेरिका की शर्तों को मानते हैं या वैकल्पिक रास्ते तलाशते हैं।


FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ट्रम्प ने ईरान से व्यापार पर क्या फैसला लिया है?

डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि जो भी देश ईरान से व्यापार करेगा, उस पर अमेरिका 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा।

क्या भारत इस फैसले से प्रभावित होगा?

हां, भारत पहले ही 50% टैरिफ झेल रहा है। नया टैरिफ लगने पर कुल दर 75% तक पहुंच सकती है।

ईरान की करेंसी इतनी कमजोर क्यों हो गई?

अमेरिकी प्रतिबंध, राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है, जिससे रियाल की कीमत लगभग शून्य हो गई है।

ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार कौन हैं?

चीन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और भारत ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार माने जाते हैं।

इस फैसले का वैश्विक असर क्या होगा?

इससे वैश्विक व्यापार, ऊर्जा कीमतों और सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है। कई देशों को वैकल्पिक बाजार तलाशने पड़ सकते हैं।

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