रीवा में 1100 किलो के कड़ाहा में बनी 5100 KG खिचड़ी, Asia Book Of World Record में दर्ज

Rewa News: शिव बारात आयोजन एवं जन कल्याण समिति द्वारा 1100 किलो के कड़ाहा में 5100 किलोग्राम खिचड़ी बनवाई गई। इस महाप्रसाद को 51 हजार श्रद्धालुओं को वितरित किया गया।

Update: 2023-02-19 11:50 GMT

महाशिवरात्रि के पावन पर्व को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में मनाया गया। इस दौरान रीवा के पचमठा आश्रम में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। शिव बारात आयोजन एवं जन कल्याण समिति द्वारा 1100 किलो के कड़ाहा में 5100 किलोग्राम खिचड़ी बनवाई गई। इस महाप्रसाद को 51 हजार श्रद्धालुओं को वितरित किया गया। खिचड़ी महाप्रसाद का कवरेज करने के लिए एशिया बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड की टीम भी पहुंची। जिसके द्वारा कड़ाहा में अब तक सबसे ज्यादा मात्रा में खिचड़ी बनाने को एशिया बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया।

51 हजार श्रद्धालुओं को बांटा महाप्रसाद

पचमठा आश्रम में महाशिवरात्रि पर विशाल भंडारा के दौरान 5100 किलोग्राम खिचड़ी का महाप्रसाद बनवाया गया। जिसको तकरीबन 51 हजार श्रद्धालुओं को वितरित किया गया। आयोजन समिति के सचिव प्रतीक मिश्रा के मुताबिक महाशिवरात्रि के अवसर पर 15वीं बार यह आयोजन किया गया। जिसमें 1100 किलो के कड़ाहा में यह खिचड़ी बनवाई गई। एशिया बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड टीम के सेक्रेटरी डाॅ. एके जैन बताया कि शिव बारात आयोजन एवं जनकल्याण समिति द्वारा 5100 किलो खिचड़ी बनाकर एशिया बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाया है। जबकि इसके पहले सबसे अधिक 3100 किलो खिचड़ी बनाने का रिकार्ड दर्ज किया गया था।

15 दिनों में तैयार हुआ था कड़ाहा

रीवा के पचमठा आश्रम में जिस कड़ाहा में खिचड़ी बनवाई गई वह कड़ाहा 15 दिन में तैयार हुआ था। जिसको उत्तरप्रदेश के कानपुर और आगरा के कारीगरों ने बनाया था। हाइड्रोलिंक मशीन से उठाकर कड़ाहा को ट्रक में लादकर रीवा लाया गया। बताया गया है कि कड़ाहे की चैड़ाई 11 फीट है जबकि इसकी ऊंचाई 5.50 फीट है। इसकी ऊंचाई ज्यादा होने के कारण इसके बगल में खड़े होकर अंदर नहीं झांका जा सकता है। कड़ाहे के लिए विशेष प्रकार की भट्ठी भी तैयार करवाई गई। कड़ाहे को जेसीबी की मदद से उतारकर भट्ठी के ऊपर रखा गया। जिसे देखने के लिए गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड की टीम रीवा पहुंची।

21 शिव भक्तों ने बनाई खिचड़ी

महाशिवरात्रि के अवसर पर 21 शिव भक्तों ने मिलकर पचमठा आश्रम में खिचड़ी तैयार की। शिव बारात आयोजन एवं जन कल्याण समिति के सचिव प्रतीक मिश्रा के मुताबक खिचड़ी ने वल्र्ड रिकार्ड बनाया है। 1100 किलो के कड़ाहे में 4000 लीटर पानी, 600 किलो चावल, 300 किलो दाल, 100 किलो देशी घी और 100 किलोग्राम हरी सब्जियां डालकर 5100 किलोग्राम खिचड़ी तैयार की गई। आयोजकों की मानें तो पांच शिव भक्तों ने हलवाई की भूमिका अदा की तो पांच ने भट्ठी की आंच को बनाए रखने में अपनी सहभागिता निभाई। इसके साथ ही पांच भक्त सूखा सामान लाए। भक्त एक-दूसरे का सहयोग करते रहे जिससे यह सफलता मिल सकी। समिति के अध्यक्ष मनीष गुप्ता के मुताबिक देश में पहली बार 1100 किलो के कड़ाहे में 5100 किलो खिचड़ी पकाई गई है। जिसके लिए एशिया बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड की टीम पचमठा आश्रम पहुंची।

गाज-बाजे के साथ निकली शिव बारात

गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान भोलेनाथ व माता पार्वती की बारात गाजे-बाजे के साथ शहर में निकाली गई। बैजू धर्मशाला से निकाली गई इस बारात ने शहर भ्रमण किया जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान कलेक्टर मनोज पुष्प, डीआईजी नवनीत भसीन, शिव बारात समिति के अध्यक्ष मनीष गुप्ता द्वारा पहले भोलेनाथ व माता पार्वती की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद बारात शहर भ्रमण के लिए रवाना हुई। पचमठा आश्रम के महंत विजय शंकर ब्रह्मचारी के अनुसार आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा भारत की चार दिशाओं में चार मठ बनाए गए थे। आदिगुरु शंकराचार्य ने रीवा से गुजरते समय बीहर नदी के किनारे पांचवें मठ की स्थापना की जो पचमठा या पंचमठ के नाम से जाना जाता है।

संतों की सिद्ध स्थली है पचमठा

अमरकंटक से प्रयागराज जाते समय संत महात्मा पचमठा आश्रम में ही पड़ाव डालते थे। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के कारण पंचमठ को संतों की सिद्ध स्थली भी कहा जाता है। विज्ञान से लेकर आयुर्वेद व मेडिकल चिकित्सक भी खिचड़ी खाने की सलाह देते हैं। रीवा के पचमठा आश्रम में महाशिवरात्रि पर खिचड़ी महाप्रसाद का आयोजन इसको राष्ट्रीय व्यंजन घोषित कराने के लिए किया गया। मंदिर के संत महात्माओं का कहना है कि खिचड़ी हर क्षेत्र का व्यंजन माना जाता है। जिसको जाति और धर्म के अनुसार अलग-अलग नामों से पहचाना जाता है। दक्षिण भारत में खिचड़ी को पोंगल नाम से जानते हैं जबकि उत्तर भारत में इसका नाम खिचड़ी ही है। स्वामी ऋषि कुमार महाराज द्वारा पंचमठ आश्रम में संस्कृत विद्यालय की स्थापना भी की गई। 1954-55 में संस्कृत विद्यालय की स्थापना के बाद से पचमठा आश्रम का महत्व और बढ़ता चला गया।



 


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