एमपी रतलाम में गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चे व गर्भवती महिलाएं एम्स भोपाल हो सकेंगे रेफर, टीम ने किया निरीक्षण

अब रायसेन में गंभीर रूप से पीड़ित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को एम्स में उपचार के लिए रेफर किया जा सकेगा। अभी तक केवल मरीजों को हमीदिया अस्पताल रेफर किया जाता था।

Update: 2023-01-19 09:59 GMT

मातृ-शिशु मृत्यु दर रोकने कवायद प्रारंभ कर दी गई है। अब रायसेन में गंभीर रूप से पीड़ित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को एम्स में उपचार के लिए रेफर किया जा सकेगा। अभी तक केवल मरीजों को हमीदिया अस्पताल रेफर करते थे किंतु अब ऐसे मरीजों को एम्स में ही प्राथमिकता के आधार पर भर्ती किए जाने से उनको बेहतर उपचार सुविधा मुहैया हो सकेगी।

प्रसूति गृह और एसएनसीयू की देखी व्यवस्थाएं

एम्स दिल्ली के बाल एवं शिशु रोग विभाग के एचओडी एवं मप्र टास्क समिति के अध्यक्ष डाॅ. रमेश अग्रवाल द्वारा रायसेन के जिला अस्पताल के प्रसूति गृह और एसएनसीयू का अवलोकन किया गया। इस दौरान उनके द्वारा अस्पताल के चिकित्सकों और नर्सों से विस्तार से चर्चा भी की गई। चर्चा के दौरान उन्हें यह जानकारी दी गई कि जिला अस्पताल में एनेस्थेसिया के एकमात्र डाॅक्टर अनिल ओढ़ हैं। उनके अवकाश पर चले जाने और रात में उपलब्ध होने की स्थिति में सीजन करना मुश्किल हो जाता है। दिन में एनेस्थेसिया के प्राइवेट डाॅक्टर की सेवाएं लेकर जिला अस्पताल में आपरेशन किए जाते हैं। किंतु रात के वक्त हाई रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं के आने पर भोपाल रेफर करना मजबूरी हो जाता है।

जिला अस्पताल को एम्स से किया जा रहा कनेक्ट

रायसेन के जिला अस्पताल को एम्स से कनेक्ट किया जा रहा है। जिससे हाईरिस्क वाली गर्भवती महिलाओं को एम्स भेजकर उपचार कराया जा सकेगा। जिला अस्पताल में कायाकल्प टीम के आने की जानकारी प्रबंधन को पूर्व में ही मिल गई थी जिससे प्रत्येक वार्ड, ओपीडी और अन्य कक्षों की सफाई कराकर चकाचक करवा दिया गया था। राज्य स्तरीय कायाकल्प टीम में डाॅ. मिलन सोनी नर्मदापुरम और डाॅ. शालिनी अर्क शामिल थीं। जिनके द्वारा अस्पताल की सुविधाओं का मूल्यांकन किया गया। इस दौरान टीम को बताया गया कि जिला अस्पताल में महीने भर में 350 से 400 डिलीवरी होती हैं। जिनमें से 20 फीसदी महिलाएं हाईरिस्क वाली शामिल रहती हैं जिन्हें तत्काल बेहतर उपचार सुविधा की जरूरत पड़ती है। ऐसी स्थिति निर्मित होने पर उन्हें भोपाल भेजना पड़ता है।

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