Abhay Mishra News: सेमरिया विधायक अभय मिश्रा को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, चुनाव याचिका निरस्त करने से इंकार

MP High Court ने सेमरिया विधायक अभय मिश्रा के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को निरस्त करने से मना कर दिया है। हलफनामे में जानकारी छिपाने के मामले पर अब होगा ट्रायल।

Update: 2026-03-21 15:47 GMT

जबलपुर : हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विनय सराफ की एकलपीठ ने रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए दायर की गई चुनाव याचिका को निरस्त करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि याचिका में उठाए गए मामले को ट्रायल के दौरान ही तथ्यों व साक्ष्यो पर परखा जा सकता है।

रीवा जिला की सेमरिया विधानसभा सीट पर साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के पराजित उम्मीदवार केपी त्रिपाठी ने निर्वाचित कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। कांग्रेस विधायक ने चुनाव याचिका निरस्त किए जाने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में आवेदन दायर किया था। आवेदन की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता का आरोप है कि निर्वाचित विधायक के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज है। उन्होने अपने चुनाव के हलफनामा में कोई अपराध दर्ज होने की जानकारी नहीं दी है। इस संबंध में याचिकाकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी प्रस्तुत की गई थी। अनावेदक विधायक की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया कि निर्वाचन पत्र प्रस्तुत करते हुए उनके विरुद्ध कोई अपराधिक प्रकरण लंबित नही था।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी आरोप लगाए गए हैं कि निर्वाचित विधायक ने अपने हलफनामा में आर्थिक जानकारी भी छुपाई है। उनके नाम पर एचडीएफसी बैंक में 50 लाख 87 लाख रूपये का लोन बकाया है। अनावेदक विधायक की ओर से तर्क दिया गया कि लोन मेसर्स अभय मिश्रा कान्ट्रैक्टर ने नाम पर लिया गया था। अनावदेक निर्वाचित विधायक उसके पार्टनर थे परंतु 2008 में रिटायर हो गए थे।

एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि बैंक स्टेटमेंट की कापी में अनावेदक अभय मिश्रा का नाम बॉरोअर के तौर पर दिखाया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि अनावेदक विधायक ने अपने नामिनेशन फार्म में आय का स्त्रोत पेंशन व सैलरी बताया था। उन्होने पेंशन व सैलरी प्राप्त होने वाले प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की डिटेल्स नहीं दीं है।

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि उक्त कंपनियों के डायरेक्टर पद से उन्होने इस्तीफा दे दिया है और कंपनी एक्ट के प्रोविजन के तहत मिनिस्ट्री आफ कार्पोरेट अफेयर्स को इसकी जानकारी दे दी गई थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में नामांकन पत्र के साथ दायर हलफनामा में जरूरी जानकारी छिपाने के बारे में खास बातें कही हैं।

चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो विजयी उम्मीदवार का चुनाव निरस्त किया जा सकता है। ट्रायल के दौरान साक्ष्यों व तथ्यों का परीक्षण किए बिना उसे निरस्त नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने अपने आदेष में कहा है कि उक्त चुनाव याचिका जनवरी 2024 में दायर की गई थी। अभी तक अनावेदक की तरफ से लिखित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। कोर्ट ने अनावेदक विधायक को चार सप्ताह में जवाब पेश कराने के निर्देश दिए हैं।

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