मऊगंज: जर्जर स्कूल भवन में 'मौत' के साये में भविष्य, बमुरिया में मासूमों की जान जोखिम में
मऊगंज के बमुरिया स्कूल में जर्जर भवन और मिड-डे मील घोटाले से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा। प्रशासन की अनदेखी कहीं मासूमों पर भारी न पड़ जाए। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।
मऊगंज/देवतालाब: मध्य प्रदेश के नवनिर्मित जिले मऊगंज से शिक्षा व्यवस्था की एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। जिले के देवतालाब क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बमुरिया में स्थित शासकीय स्कूल का भवन भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनदेखी की जीवंत मिसाल बन चुका है। यहाँ स्कूल की इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि किसी भी वक्त कोई बड़ा हादसा मासूम बच्चों की जान ले सकता है।
दीवारों में दरारें और उखड़ता प्लास्टर
बमुरिया ग्राम के इस शासकीय स्कूल की हालत देखकर रूह कांप जाती है। स्कूल भवन की दीवारों में पैर पसार चुकी बड़ी-बड़ी दरारें साफ गवाही दे रही हैं कि इमारत की नींव हिल चुकी है। कई जगहों से प्लास्टर पूरी तरह उखड़ चुका है और ईंटें बाहर झांक रही हैं। आलम यह है कि स्कूल के कमरों की छतों पर झाड़-झंखाड़ और घास-फूस उग आई है, जो भवन की उम्र और उसकी बदहाली को बयां करने के लिए काफी है। खिड़कियां टूटी हुई हैं और बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है।
हादसे को न्योता देता 'शिक्षा का मंदिर'
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। अभिभावकों का कहना है कि वे हर रोज अपने बच्चों को डर के साये में स्कूल भेजते हैं। ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में कहा, "प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। जर्जर भवन में बच्चों को बिठाना किसी सुसाइड नोट पर हस्ताक्षर करने जैसा है।" लंबे समय से मरम्मत की मांग करने के बावजूद शिक्षा विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर मुड़कर देखना भी मुनासिब नहीं समझा।
मिड-डे मील में बड़ा घोटाला: हक की लड़ाई
स्कूल की बदहाली के साथ-साथ एक और गंभीर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। शिकायत मिली है कि पिछले लगभग एक साल से मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) बनाने वाली रसोइया को उसकी मेहनत का पारिश्रमिक यानी सैलरी नहीं मिली है। चौंकाने वाली बात यह है कि रिकॉर्ड में रसोइया की जगह किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर सैलरी का भुगतान किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और गरीब के हक पर डाका डालने का मामला प्रतीत होता है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
बमुरिया के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि जल्द से जल्द स्कूल के नए भवन का निर्माण कराया जाए या इसकी व्यापक मरम्मत कराई जाए। साथ ही, मिड-डे मील के वेतन में हो रही हेराफेरी की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। फिलहाल, मऊगंज के इस क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल है। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी नींद से नहीं जागे, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।