भारत-पाक तनाव के बाद पाकिस्तान के फाइटर जेट्स की डिमांड तेज़, 6 मुस्लिम देशों से डील की बात – JF-17 बना हथियार बाजार का नया चेहरा
भारत से संघर्ष के बाद पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके JF-17 फाइटर जेट्स की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ गई है। बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब सहित 6 देशों से बातचीत चल रही है। जानिए पूरी रिपोर्ट।
- भारत से संघर्ष के बाद पाकिस्तान ने JF-17 फाइटर जेट की मांग बढ़ने का दावा किया
- बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब सहित 6 देशों से बातचीत की खबर
- इंडोनेशिया लगभग 40 JF-17 खरीदने पर विचार कर रहा है
- पाकिस्तान इसे अपनी अब तक की सबसे बड़ी हथियार डीलों में बदलना चाहता है
India-Pakistan Conflict Impact | भारत-पाक संघर्ष का असर
भारत के साथ पिछले वर्ष हुए सैन्य तनाव के बाद पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके फाइटर जेट्स की अंतरराष्ट्रीय मांग अचानक तेज़ हो गई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रेडियो पाकिस्तान को दिए गए बयान में कहा कि कई देश अब पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों में रुचि दिखा रहे हैं और इसको लेकर बातचीत चल रही है। उनका कहना है कि हालिया संघर्ष ने पाकिस्तान की डिफेंस कैपेबिलिटी को दुनिया के सामने रखा है।
हालांकि प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन मॉडलों की मांग बढ़ी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह संकेत मिल रहा है कि चर्चा का केंद्र JF-17 Thunder Fighter Jet है। यह वही विमान है जिसे पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर विकसित किया है और जिसे वह अपनी वायुसेना की रीढ़ मानता है।
Global Interest in JF-17 | JF-17 में वैश्विक रुचि
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश, सूडान, लीबिया, सऊदी अरब, इराक और इंडोनेशिया जैसे देश पाकिस्तान से JF-17 फाइटर जेट खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। यह वही देश हैं जो सीमित बजट में आधुनिक एयर कॉम्बैट सिस्टम की तलाश कर रहे हैं। पाकिस्तान इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक सफलता के रूप में पेश कर रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 जनवरी को इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान वायुसेना प्रमुख जहीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात की। इस बैठक में करीब 40 JF-17 फाइटर जेट्स की संभावित खरीद पर चर्चा हुई। यह सौदा अगर होता है तो दक्षिण-पूर्व एशिया में पाकिस्तान की रक्षा उपस्थिति को नई पहचान मिल सकती है।
Bangladesh & Saudi Talks | बांग्लादेश और सऊदी अरब से बातचीत
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ‘डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुखों के बीच JF-17 फाइटर जेट को लेकर बातचीत हो चुकी है। बांग्लादेश अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है और ऐसे में पाकिस्तान का यह प्रस्ताव उसके लिए एक किफायती विकल्प बन सकता है।
वहीं सऊदी अरब के साथ भी पाकिस्तान की बातचीत सुर्खियों में है। रॉयटर्स के अनुसार, 7 जनवरी को पाकिस्तान ने सऊदी अरब को JF-17 बेचने का प्रस्ताव रखा। यह बातचीत उस 2 अरब डॉलर के ऋण से भी जुड़ी मानी जा रही है जो सऊदी अरब ने पाकिस्तान को दिया है। हालांकि, अभी तक इन सौदों को लेकर कोई आधिकारिक समझौता सार्वजनिक नहीं हुआ है।
Existing Users of JF-17 | पहले से किन देशों के पास हैं JF-17
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट बताती है कि पिछले एक दशक में कई देशों ने पाकिस्तान के JF-17 Thunder में रुचि दिखाई है। नाइजीरिया, म्यांमार और अजरबैजान पहले ही इसे अपने सैन्य बेड़े में शामिल कर चुके हैं। इन देशों के लिए यह विमान इसलिए आकर्षक रहा है क्योंकि यह अपेक्षाकृत सस्ता है और बुनियादी मल्टी-रोल कॉम्बैट क्षमताएं प्रदान करता है।
अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 में पाकिस्तान ने लीबिया के विद्रोही गुट लीबियाई नेशनल आर्मी को अरबों डॉलर के सौदे में दर्जनभर से अधिक JF-17 फाइटर जेट बेचने की बात कही थी। इसे पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी हथियार डीलों में से एक माना गया।
JF-17 Thunder की तकनीक | Technology Behind JF-17
पाकिस्तान सरकार के अनुसार, JF-17 Thunder एक 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जिसे चीन के साथ मिलकर जून 2007 में विकसित किया गया था। इसका डिज़ाइन चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (CAC) ने तैयार किया, जबकि पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) ने इसकी अंतिम असेंबली की। इस परियोजना में पाकिस्तान की भागीदारी लगभग 58% और चीन की 42% मानी जाती है।
इस फाइटर जेट की सबसे खास बात यह है कि इसका इंजन रूस में बना है। JF-17 में इस्तेमाल होने वाला Klimov RD-93 इंजन और इसके नए ब्लॉक-3 वर्जन में लगाया गया RD-93MA इंजन रूस से चीन के माध्यम से पाकिस्तान तक पहुंचता है। उस समय चीन और पाकिस्तान के पास खुद का आधुनिक इंजन उपलब्ध नहीं था, इसलिए उन्हें रूसी तकनीक पर निर्भर रहना पड़ा।
China Dependency & Supply Risk | चीन पर निर्भरता और सप्लाई रिस्क
ग्लोबल डिफेंस रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान का JF-17 फाइटर जेट पूरी तरह से चीन पर निर्भर है—चाहे वह मेंटेनेंस हो, स्पेयर पार्ट्स हों या तकनीकी सपोर्ट। इसके अलावा, रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते रूसी इंजनों की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। इससे पाकिस्तान की उत्पादन और निर्यात क्षमता पर अनिश्चितता बनी रहती है।
यह विमान स्टेल्थ फाइटर नहीं है, यानी यह दुश्मन के रडार से बच नहीं सकता। आधुनिक युद्धों में जहां रडार से बच निकलना बड़ी क्षमता मानी जाती है, वहां JF-17 की यह कमजोरी इसे संवेदनशील बनाती है।
Limitations of JF-17 | JF-17 की प्रमुख कमजोरियां
विशेषज्ञों के अनुसार, JF-17 में कई तकनीकी सीमाएं हैं। इसमें केवल एक ही RD-93 इंजन लगा है, जिससे इसका थ्रस्ट सीमित रहता है। भारी हथियार ले जाने पर इसकी गति प्रभावित होती है। यह विमान अधिकतम लगभग 3.6 टन हथियार ही ले जा सकता है, जिसका मतलब है कि ज्यादा हथियारों के साथ उड़ान भरने पर ईंधन कम रखना पड़ता है।
इसके एवियोनिक्स सिस्टम को भी आउटडेटेड माना जाता है। एवियोनिक्स वह इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम होते हैं जो विमान को उड़ाने, नेविगेशन, कम्युनिकेशन और हथियार नियंत्रण में मदद करते हैं। कमजोर एवियोनिक्स के कारण JF-17 को आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में सीमाएं झेलनी पड़ सकती हैं। इसके अलावा, इसका इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी अत्याधुनिक नहीं है, जिससे जैमिंग और खतरे की पहचान की क्षमता सीमित रहती है।
Why Demand is Rising? | फिर भी क्यों बढ़ रही है डिमांड
इन सभी कमजोरियों के बावजूद, JF-17 Thunder की मांग बढ़ने का मुख्य कारण इसकी कीमत है। यह अमेरिका के F-16, रूस के MiG-29 और भारत के तेजस की तुलना में काफी सस्ता है। विकासशील देशों के लिए यह एक ऐसा विकल्प बन जाता है, जो सीमित बजट में बुनियादी एयर डिफेंस और कॉम्बैट कैपेबिलिटी प्रदान करता है।
भारत के साथ हालिया तनाव के बाद पाकिस्तान इस विमान को अपनी “युद्ध-परखी हुई” क्षमता के प्रतीक के रूप में प्रचारित कर रहा है। यही वजह है कि कई मुस्लिम और विकासशील देशों में इसे लेकर रुचि बढ़ी है, जहां अत्याधुनिक लेकिन महंगे फाइटर जेट खरीदना संभव नहीं है।
Tejas vs JF-17 | भारत का तेजस क्यों बेहतर
भारतीय वायुसेना का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस, पाकिस्तानी JF-17 से कई मामलों में आगे माना जाता है। तेजस में आधुनिक AESA रडार, बेहतर सेंसर-फ्यूजन और डिजिटल कॉकपिट है, जिससे लक्ष्य की पहचान और हमला अधिक सटीक होता है।
तेजस का इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी अधिक उन्नत है। इसमें ऐसे मटेरियल का उपयोग किया गया है जिससे इसका वजन कम और रडार सिग्नेचर छोटा रहता है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञ तेजस को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम मानते हैं।
JF-17 kya hai aur kaun banata hai?
JF-17 पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया मल्टी-रोल फाइटर जेट है।
Pakistan JF-17 ka export kyu badh raha hai?
क्योंकि यह सस्ता है और विकासशील देशों के बजट में फिट बैठता है।
Bangladesh JF-17 kharidega?
बातचीत चल रही है, लेकिन अभी कोई आधिकारिक समझौता नहीं हुआ है।
Indonesia ne kitne JF-17 lene ki baat ki?
करीब 40 फाइटर जेट्स पर चर्चा हुई है।
Saudi Arabia JF-17 deal ka matlab kya hai?
यह पाकिस्तान के लिए आर्थिक और कूटनीतिक लाभ का सौदा हो सकता है।
JF-17 ka engine kahan banta hai?
इसका इंजन रूस में बनता है।
JF-17 stealth fighter hai?
नहीं, यह स्टेल्थ फाइटर नहीं है।
Tejas aur JF-17 me kaun behtar?
तकनीकी रूप से भारत का तेजस अधिक उन्नत माना जाता है।
JF-17 kitna sasta hai?
यह अन्य आधुनिक फाइटर जेट्स की तुलना में काफी सस्ता है।
Pakistan ke liye JF-17 kyu important hai?
यह उसकी वायुसेना की रीढ़ है और निर्यात का बड़ा साधन बन रहा है।