विंध्य : एमपी चुनाव के लिए 1 लाख महीने की नौकरी छोड़ी

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Update: 2021-02-16 06:01 GMT

चुनावी मैदान में जो आज तक नहीं हुआ, वो अब होने जा रहा है. एक मूक-बधिर युवक मध्‍यप्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने वाला है. एक निजी कंपनी में 12 लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़कर चुनाव की तैयारियों में जुटे सॉफ्टवेयर इंजीनियर का कहना है कि वे मूक-बधिरों और गरीब जनता की आवाज बनना चाहते हैं. विधानसभा में बैठे जनप्रतिनिधि मूक हैं.

दरअसल, इंदौर में यौन शोषण का शिकार हुए बच्चों से मिलने पहुंचे सतना के 36 साल के सुदीप शुक्ला इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं और अपनी चुनावी तैयारियों के बीच वे शहर-शहर जाकर सांकेतिक भाषा के जानकारों से मिल रहे हैं. सोशल मीडिया पर अपना प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और इसके लिए उन्होने सतना में वॉलेंटियर्स की टीम भी तैयार कर ली है.

एक निजी कंपनी में 12 लाख रुपए महीने की सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर वे चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं. उनका मानना है कि वे मूक-बधिरों और गरीब जनता की आवाज बनना चाहते हैं. तुकोगंज में पुलिस सहायता केंद्र चलाने वाले सांकेतिक भाषा के जानकार ज्ञानेंद्र पुरोहित के जरिए अपनी बात साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वे सतना से विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं. दो क्षेत्रीय दलों ने उन्हें समर्थन दिया है.

सुदीप परिवार में इकलौते हैं. परिवार में पिता, मां दो बहनें हैं. दादाजी भगवान प्रसाद शुक्ला सतना में कांग्रेस नेता भी हैं. सुदीप की पत्नी दीपमाला भी मूक-बधिर हैं. सुदीप की बहन श्रद्धा ने सांकेतिक भाषा का कोर्स किया और वे सुदीप की बातों को अन्य लोगों तक पहुंचाती हैं.

सांकेतिक भाषा के जानकर ज्ञानेन्द्र पुरोहित का कहना है कि विश्व में सबसे पहले मूक बधिर सांसद 1996 में युगांडा से एलेक्स निटजी बने. इसके बाद साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, अमेरिका और नेपाल में मूक-बधिर कहीं चुनाव जीते तो कहीं नॉमिनेट हुए हैं. इसलिए सुदीप के प्रचार के लिए भी युगांडा से एलेक्स निटजी, नेपाल से मूक-बधिर सांसद राघवजी और अमेरिका से महापौर बने मूक-बधिर नील डेविड के अलावा कपिल देव और उनकी मूक-बधिर भांजी को भी चुनाव प्रचार के लिए बुलाया गया है.

सुदीप ने भोपाल के आशा निकेतन स्कूल से हायर सेकंडरी की पढ़ाई करने के बाद चेन्नई से बीकॉम और एमएससी (आईटी) की पढ़ाई की. पढ़ाई के बाद बेंगलुरू में 2006 से ही इन्‍फोसिस में जॉब शुरू किया. उस समय उनका वेतन एक लाख रुपए महीने का था. यहीं उनकी मुलाकात सॉफ्टवेयर इंजीनियर दीपमाला से हुई और बाद में दोनों ने शादी कर ली. अब सुदीप ने अच्छी खासी नौकरी छोड़कर राजनीति की राह पकड़ ली है.

सुदीप कहना है कि प्रदेश में मूक-बधिर युवक-युवतियों के साथ यौन शोषण हो रहा है. उनके खिलाफ क्राइम रेट बढ़ता जा रहा है. उन्होंने यौन शोषित बच्चों को हर दल के पास मदद के लिए पहुंचाया, लेकिन किसी ने उनका साथ नहीं दिया, वे उनकी आवाज नहीं बन पाए. ये बात उन्हें विचिलित कर गई और यहीं से उन्होंने ठान लिया कि अब वे इन असहाय लोगों की आवाज बनेंगे.

उनका कहना है, मैं बोल नहीं पाता पर चुप नहीं बैठ सकता. इसलिए विधानसभा का चुनाव लड़कर गरीबों और असहाय लोगों का सहारा बनूंगा. यही कारण है कि ऐशोआराम की नौकरी छोड़कर राजनीति की कठिन राह पर चल पड़ा हूं.'

बहरहाल सुदीप का कहना है कि यदि वे विधानसभा पहुंचे तो अपनी बात कहने के लिए सांकेतिक भाषा के जानकार को रखने की विशेष अनुमति सरकार से लेंगे, क्योंकि चुनाव लड़ने का संवैधानिक अधिकार देश के हर नागरिक को है.

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