रीवा: खंदो कुंड का रहस्य! खंदो कुंड जानलेवा क्यों है? यहां तैरना यानी मौत को बुलावा देना

Rewa: रीवा के गोविंदगढ़ में एक जगह है जिसका नाम है खंदो माता मंदिर, यहां हर साल कई लोग मारे जाते हैं फिर भी लोग हैं कि मानते नहीं

Update: 2023-08-03 10:04 GMT

रीवा खंदो कुंड का रहस्य: मध्य प्रदेश के रीवा शहर से 20 किमी दूर गोविंदगढ़ नाम का कस्बा है. गोविंदगढ़ में खंदो  माता मंदिर है जो ना सिर्फ धार्मिक स्थान है बल्कि इसे टूरिस्ट स्पॉट के लिए भी जाना जाता है. खंदो में खूबसूरत लैंडस्केप्स हैं, बड़ी-बड़ी चट्टाने और प्राकृतिक पानी का स्त्रोत भी है. खंदो मंदिर के पास कई सारे छोटे-छोटे जल कुंड हैं जो दिखने में जितने खूबसूरत हैं उतने ही जानलेवा भी हैं. असल में खंदो कुंड बदनाम है, यहां तैरने वाले अचानक से गायब हो जाते हैं. कभी डूबने वालों का शव मिलता है तो कभी नहीं मिलता। हैरानी की बात तो ये है कि सब कुछ जानते हुए भी लोग इन कुंड में नहाने के लिए उतर जाते हैं और मौत को निमंत्रण देते हैं. 


खंदो कुंड में क्या है? 

खंदो कुंड के बाहर बड़ा सा चेतावनी बोर्ड लगा है. जिसमे साफ़-साफ़ लिखा है कि कुंड में ना उतरें, फिर भी कुछ लोग उसे नेचुरल स्विमिंग पूल मान कर उतर जाते हैं और उछल-कूद करते हैं. कुछ ऐसे भी शक्तिमान टाइप के लोग होते हैं जो चट्टानों में चंडकर कुंड में डाइव मारते हैं. ऐसे ही लोग डुबकी मारने के बाद वापस जिंदा नहीं निकलते। बारिश के मौसम में कुंड का पानी और उफान मारता है लेकिन यहां आने वाले दर्शनार्थियों को यह ज्यादा एक्साइटिंग और एडवेंचर्स लगने लगता है. 

खंदो कुंड में मौतें क्यों होती हैं 


यहां रहने वाले लोग बताते हैं कि खंदो कुंड में अक्सर लोगों की मौत होती रहती है. यह उतना गहरा नहीं है फिर भी बड़े-बड़े तैराक यहां डूबकर मर जाते हैं. ज्यादा से ज्यादा इन कुंडो की गहराई 4 फ़ीट से लेकर 8 फ़ीट हो सकती है. आखिर क्या वजह है कि तैराकी सीखे हुए लोग भी यहां तैर नहीं पाते? क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि खंदो कुंड में उन मरे हुए लोगों की आत्मा रहती हैं, जो जिंदा लोगों को खींच लेती हैं और तबतक ऊपर नहीं आने देती जबतक वो दम न तोड़ दे. हालांकि ऐसी तकियानूसी बातों पर कोई विश्वास नहीं करता। खंदो कुंड के जानलेवा होने का कारण इनमे रहने वाली सो काल्ड आत्माएं नहीं है. बल्कि कारण कुछ और ही है. 

खंदो कुंड खतरनाक क्यों है? 

पूरा खंदो, पहाड़ की चट्टानों से बना हुआ है. यहां जगह-जगह पानी के स्त्रोत हैं. यहां पानी जमीन के अंदर से निकलता है. बारिश के मौसम में तो पूरा खंदो पानी से लबालब हो जाता है. जाहिर सी बात है जहां-जहां प्राकृतिक जलधारा होती है वहां निरंतर पानी के बहाव से जमीन अपने आप कटने लगी है, चट्टानों में भी गड्ढे हो जाते हैं. पानी के प्रवाह से तो गुफाएं बन जाती हैं. ऐसा एक-दो साल में नहीं होता बल्कि यह लाखों-हजारों साल की प्रोसेस है. 'पानी अपना रास्ता खुद बना लेता है' फिर वो चाहे चट्टान को काटना हो या फिर धरती में बड़े-बड़े कुंड का निर्माण करना हो. 

उदाहरण के लिए फोटो 

खंदो में भी जो कुंड है वो पानी के निरंतर प्रवाह से बने हैं, ये आज के या 100-200 साल पुराने नहीं बल्कि लाखों वर्ष पहले से होंगे। इन कुंडों के अंदर भी पानी के बहाव से कटी हुई दरारे हैं. कहीं-कहीं तो ऐसे छेद हैं जो बहुत गहरे हैं. ऊपर से भले ही यह नेचुरल स्विमिंग पूल नज़र आते हैं मगर इनके अंदर कई दरारे, संध और बड़े-बड़े छेद होते हैं. जो कोई कुंड में ज्यादा उछल-कूद मचाता है, ऊंची जगह से कुंड में छलांग लगता है उसका पैर इन्ही दरारों में फंस जाता है और वो खुद को बाहर नहीं निकाल पाता। कई लोग कुंड के अंदर बड़े गड्ढों में समा जाते हैं और पानी के साथ बहते हुए जमीन के अंदर चले जाते हैं. ऐसे लोगों का शव भी नहीं मिलता। 

तो क्या करें? 

प्रशासन ने तो हिदायत दी है कि खंदो कुंड में ना जाएं, तो क्यों कुछ समय की मस्ती के लिए अपनी जान जोखिम में डालें? आपको यहां कई लोग नहाते हुए दिखाई देंगे, अपना भी मन मचलेगा लेकिन रिस्क काहे लेना है? कुंड में घुसने के चक्कर में जमीन के अंदर घुस जाओगे, लाश भी नहीं मिलेगी! 


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