रीवा: इलाज के नाम पर 5 लाख की ठगी और लापरवाही, कोर्ट ने वरदान हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर केस दर्ज करने का दिया आदेश

Vardan Hospital Rewa News 2026: रीवा में इलाज के नाम पर 5 लाख की ठगी! कोर्ट ने डॉ. मुकेश और वंदना यादव पर केस दर्ज करने का दिया सख्त आदेश। क्या है पूरी खबर? यहाँ पढ़ें।

Update: 2026-01-21 14:48 GMT

रीवा, मध्य प्रदेश रीवा जिले से चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ के पीटीएस रोड स्थित वरदान हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही और धोखाधड़ी के आरोप में न्यायालय ने आपराधिक मामला दर्ज करने का कड़ा आदेश दिया है। यह मामला डॉक्टरों द्वारा बिना अनुभव के एक मरीज के दांतों का गलत ऑपरेशन करने और उससे लाखों रुपये वसूलने से जुड़ा है।

मुख्य बिंदु:

  1. आरोपी: डॉ. मुकेश यादव, डॉ. वंदना यादव और वरदान अस्पताल प्रबंधन।
  2. पीड़ित: वीरेंद्र त्रिपाठी (निवासी: शहडोल)।
  3. कोर्ट का आदेश: विभिन्न आपराधिक धाराओं (BNS) के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित वीरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि उनके दांतों में समस्या होने के कारण वे इलाज के लिए रीवा के वरदान हॉस्पिटल पहुंचे थे। वहां कार्यरत डॉ. मुकेश यादव और डॉ. वंदना यादव ने उन्हें 'फुल माउथ इंप्लांट' कराने की सलाह दी। इस इलाज के बदले अस्पताल ने पीड़ित से 5 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि वसूली, जिसकी बकायदा रसीद भी दी गई।

आरोप है कि ऑपरेशन के बाद से ही पीड़ित के दांतों में असहनीय दर्द शुरू हो गया। जब स्थिति नहीं सुधरी, तो डॉक्टर उन्हें स्वयं भोपाल के एक बड़े विशेषज्ञ के पास ले गए। वहां जांच में पता चला कि जो इंप्लांट लगाए गए थे, वे गलत तरीके से फिट किए गए थे (Out of Cortex)।

पहला केस था, इसलिए बिगड़ गया

पीड़ित ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि डॉक्टर मुकेश यादव ने बाद में यह स्वीकार किया कि यह उनके करियर का 'फुल माउथ इंप्लांट' का पहला केस था। यानी बिना किसी पूर्व अनुभव के, केवल आर्थिक लाभ के लिए डॉक्टर ने मरीज की जान और सेहत के साथ खिलवाड़ किया।

पुलिस ने नहीं सुनी, तो जाना पड़ा कोर्ट

पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने कोतवाली थाना और पुलिस अधीक्षक (SP) से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन डॉक्टरों के रसूख और प्रभाव के कारण पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा डॉक्टरों द्वारा पीड़ित को पुलिस में फंसाने और अपनी राजनीतिक पहुंच (CM और अन्य मंत्रियों से संबंध) का हवाला देकर धमकाया गया। हार मानकर पीड़ित ने अधिवक्ता अनूप प्रताप सिंह के माध्यम से न्यायालय में परिवाद दायर किया।

न्यायालय का सख्त रुख और धाराएं

न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों को देखने के बाद इसे प्रथम दृष्टया दोषी माना। कोर्ट ने वरदान अस्पताल के डॉक्टरों और प्रबंधन के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं के तहत संज्ञान लिया है:

  1. धारा 125, 125A, 125B: लापरवाही से जीवन को खतरे में डालना।
  2. धारा 318 (2): धोखाधड़ी (जो पूर्व में आईपीसी की धारा 420 थी)।
  3. अन्य धाराएं: 296, 351 (2), 271 आदि।
Tags:    

Similar News