रीवा बना देश का टैलेंट हब: सेना प्रमुख से लेकर स्टार्स, राजनेता और पत्रकार तक, इन रत्नों से देश-विदेश में चमका विंध्य

रीवा अब केवल एक क्षेत्र नहीं, बल्कि देश का उभरता टैलेंट हब बन चुका है। यहां से सेना प्रमुख, फाइटर पायलट, क्रिकेटर, अभिनेता, गायक, उद्यमी और पत्रकार निकले हैं। जानिए उन नामों की पूरी सूची जिन्होंने विंध्य की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बदल दी।

Update: 2026-01-19 09:53 GMT

रीवा अब केवल मध्यप्रदेश का एक जिला नहीं, बल्कि देश का उभरता हुआ टैलेंट हब बन चुका है। जिस धरती को कभी केवल विंध्य की पहचान के तौर पर जाना जाता था, आज वही भूमि भारतीय सेना के प्रमुख, नौसेना प्रमुख, फाइटर पायलट, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर, बॉलीवुड अभिनेता, गायक, उद्यमी और पत्रकार देने के लिए पूरे देश में पहचानी जा रही है। छोटे कस्बों और गांवों से निकलकर इन लोगों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। यह बदलाव सिर्फ व्यक्तियों की सफलता नहीं, बल्कि विंध्य की सोच, मेहनत और आत्मविश्वास की जीत है, जिसने रीवा को प्रतिभाओं की प्रयोगशाला बना दिया है। कुछ के नाम इस लिस्ट में दिए गए हैं, इनके अलावा भी ऐसे सैकड़ों लोग हैं, जिन्होंने देश विदेश में रीवा और विंध्य को गौरवान्वित किया है। आइये देखते हैं लिस्ट... 

Army Chief from Rewa – लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी

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लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी: भारतीय सेना प्रमुख

पद (Designation) 30वें थल सेनाध्यक्ष (COAS)
पदभार ग्रहण 30 जून 2024
जन्म तिथि 1 जुलाई 1964
जन्म स्थान मुड़िला गांव, गुढ़ (रीवा), मध्य प्रदेश
शिक्षा सैनिक स्कूल रीवा, NDA, IMA

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी का जन्म रीवा जिले के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता एक माइनिंग अफसर थे और माता गृहिणी। वे तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनके बड़े भाई पीसी द्विवेदी ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

करियर और उपलब्धियां

  • 15 दिसंबर 1984: जम्मू और कश्मीर राइफल्स की 18वीं बटालियन में कमीशन मिला।
  • Northern Command: उन्होंने देश की सबसे संवेदनशील उत्तरी कमान के प्रमुख (GOC-in-C) के रूप में कार्य किया।
  • 46th Vice Chief: सेना प्रमुख बनने से पहले वे 19 फरवरी 2024 से 30 जून 2024 तक उप सेना प्रमुख रहे।
  • अनुभव: उन्हें कश्मीर घाटी और राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में ऑपरेशन रक्षक का नेतृत्व करने का व्यापक अनुभव है।

रीवा का गौरव

सैनिक स्कूल रीवा के छात्र रहे जनरल द्विवेदी ने अपनी मेहनत और अनुशासन से आज भारतीय सेना के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त किया है। यह विंध्य क्षेत्र और पूरे मध्य प्रदेश के लिए गौरव का क्षण है।

लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी भारतीय सेना के 30वें प्रमुख हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1964 को रीवा जिले की गुढ़ तहसील के मुड़िला गांव में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। पिता माइनिंग अफसर रहे और माता गृहिणी। तीन भाइयों में वे सबसे छोटे हैं। उनके बड़े भाई पीसी द्विवेदी मेडिकल एजुकेशन फील्ड में सेवाएं देकर सेवानिवृत्त हुए, जिनका स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान उल्लेखनीय रहा।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल रीवा से हुई—यही वह स्थान है, जहां अनुशासन और राष्ट्रसेवा का बीज उनके भीतर रोपा गया। कठिन प्रशिक्षण, निरंतर परिश्रम और नेतृत्व क्षमता के बल पर वे सेना के हर पड़ाव को पार करते हुए उस शिखर तक पहुंचे, जहां आज वे भारतीय थलसेना का नेतृत्व कर रहे हैं।

उनकी नियुक्ति केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि रीवा और पूरे विंध्य के लिए ऐतिहासिक क्षण है। यह संदेश देती है कि गांव की गलियों से निकलकर भी कोई व्यक्ति देश की सुरक्षा की कमान संभाल सकता है।

Navy Chief from Vindhya – एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी

विंध्य का शौर्य

एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी: 26वें नौसेना प्रमुख

सैनिक स्कूल रीवा के गौरवशाली छात्र

पदभार ग्रहण 30 अप्रैल 2024 (नौसेना प्रमुख)
शिक्षा सैनिक स्कूल रीवा (Sainik School Rewa)
मूल निवासी ग्राम मदुआर, सतना (विंध्य क्षेत्र)
पूर्व पद 38वें उप नौसेना प्रमुख (Vice Chief)

सैनिक स्कूल रीवा का ऐतिहासिक संयोग

विंध्य क्षेत्र के लिए यह एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण है। **एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी** और वर्तमान थल सेना प्रमुख **जनरल उपेंद्र द्विवेदी** न केवल एक ही स्कूल के छात्र रहे हैं, बल्कि वे **सैनिक स्कूल रीवा** में सहपाठी (Classmates) भी थे। भारतीय सैन्य इतिहास में यह एक दुर्लभ संयोग है कि एक ही विद्यालय के दो छात्र एक साथ सेना के शीर्ष पदों पर आसीन हैं।

करियर की प्रमुख उपलब्धियां

  • समुद्री सुरक्षा: देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा का सर्वोच्च नेतृत्व।
  • नेतृत्व: 30 अप्रैल 2024 को भारतीय नौसेना के 26वें प्रमुख (CNS) के रूप में कार्यभार संभाला।
  • विंध्य का मान: सतना-रीवा बेल्ट को रक्षा क्षेत्र के राष्ट्रीय मानचित्र पर नई ऊंचाई दी।
  • अनुभव: समुद्री युद्ध और रणनीतिक अभियानों में चार दशकों का विशिष्ट अनुभव।
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रीवा की गौरवगाथा यहीं नहीं रुकती। सतना में जन्मे एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी सैनिक स्कूल रीवा के विद्यार्थी रहे हैं। वे उपेंद्र द्विवेदी के सहपाठी थे। आज यह दुर्लभ संयोग है कि एक ही स्कूल के दो छात्र—एक सेना प्रमुख और दूसरा नौसेना प्रमुख बने।

दिनेश त्रिपाठी की यात्रा बताती है कि विंध्य क्षेत्र केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि नेतृत्व भी गढ़ता है। आज वे देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यह उपलब्धि रीवा-सतना बेल्ट को राष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान देती है।

First Woman Fighter Pilot from Rewa – स्क्वाड्रन लीडर अवनी चतुर्वेदी

भारत की पहली महिला फाइटर पायलट - रीवा का गौरव

अवनी चतुर्वेदी (Squadron Leader Avani Chaturvedi)

जन्म तिथि 27 अक्टूबर 1993
जन्म स्थान रीवा, मध्य प्रदेश
पिता का नाम दिनकर चतुर्वेदी (इंजीनियर)
शिक्षा (Education) B.Tech (बनस्थली विश्वविद्यालय)
प्रसिद्धि पहली महिला फाइटर पायलट

आसमान छूने का सफर (Early Life & Career)

अवनी चतुर्वेदी का नाम आज भारत के सैन्य इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। उनकी स्कूली शिक्षा शहडोल के देवलोंद में हुई। कॉलेज के दिनों में फ्लाइंग क्लब से जुड़ने के बाद उनके मन में आसमान फतह करने की चाह जगी। AFCAT परीक्षा पास कर वे वायुसेना में शामिल हुईं।

प्रमुख उपलब्धियां और शौक

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: जून 2016 में भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं।
  • प्रेरणा स्रोत: सेना में अधिकारी रहे उनके बड़े भाई से सैन्य सेवा की प्रेरणा मिली।
  • फाइटर जेट: मिग-21 (MiG-21 Bison) जैसे लड़ाकू विमान उड़ाकर इतिहास रचा।
  • शौक: उन्हें शतरंज (Chess), टेबल टेनिस और स्केचिंग करना बेहद पसंद है।
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अवनी चतुर्वेदी—यह नाम आज भारत की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुका है। उनका जन्म 27 अक्टूबर 1993 को हुआ। पिता दिनकर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग में सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रहे, माता गृहिणी हैं। अवनी की स्कूली शिक्षा शहडोल जिले के देवलोंद कस्बे में हुई।

उन्होंने बनस्थली विश्वविद्यालय से B.Tech किया। कॉलेज के फ्लाइंग क्लब से जुड़ने के बाद उनके भीतर आसमान छूने का सपना जगा। उन्होंने AFCAT पास किया और AFSB से चयनित होकर भारतीय वायुसेना में पहुंचीं। जून 2016 में अवनी, मोहना सिंह और भावना कंठ के साथ भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं।

उनकी उपलब्धि ने भारत को उन देशों की कतार में खड़ा कर दिया, जहां महिलाएं फाइटर जेट उड़ाती हैं। सेना में अधिकारी रहे उनके बड़े भाई से मिली प्रेरणा ने उन्हें इस राह पर आगे बढ़ाया। शतरंज, टेबल टेनिस और स्केचिंग पसंद करने वाली अवनी आज लाखों लड़कियों का रोल मॉडल हैं।

रीवा की धरती से निकलकर सेना, नौसेना और वायुसेना के शिखर तक पहुंचने वाली ये तीन कहानियां यह सिद्ध करती हैं कि संघर्ष, शिक्षा और संकल्प किसी भी सीमा को तोड़ सकते हैं। यह केवल व्यक्तियों की नहीं, बल्कि विंध्य की मिट्टी की जीत है।

रीवा केवल सैन्य नेतृत्व की भूमि नहीं है, बल्कि यह खेल प्रतिभाओं की भी नर्सरी बन चुका है। विंध्य की इसी मिट्टी से निकलकर दो ऐसे नाम सामने आए, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई—कुलदीप सेन और ईश्वर पांडे। इन दोनों की कहानियां बताती हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि संकल्प मजबूत हो, तो रास्ते खुद बनते हैं।

Fast Bowler from Rewa – कुलदीप सेन

रीवा का एक्सप्रेस स्टार

कुलदीप सेन (Kuldeep Sen): भारतीय क्रिकेटर

पूरा नाम कुलदीप रामपाल सेन
जन्म तिथि 22 अक्टूबर 1996
जन्म स्थान हरिहरपुर, रीवा (म.प्र.)
इंटरनेशनल डेब्यू दिसंबर 2022 (v/s बांग्लादेश)
गेंदबाजी गति 140+ किमी/घंटा

संघर्ष से शिखर तक का सफर

कुलदीप सेन की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। उनके पिता रामपाल सेन रीवा में नाई की दुकान चलाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद कुलदीप ने अपने सपनों को कम नहीं होने दिया। 8 साल की उम्र में शुरू हुआ क्रिकेट का सफर आज टीम इंडिया के नीले रंग की जर्सी तक पहुँच चुका है।

करियर के प्रमुख पड़ाव

  • कोच की भूमिका: कोच अरिल एंथनी ने उनकी गेंदबाजी को तराशा और तकनीक सिखाई।
  • IPL में धमाल: राजस्थान रॉयल्स (RR) की ओर से खेलते हुए अपनी रफ्तार से दुनिया को चौंकाया।
  • घरेलू क्रिकेट: मध्य प्रदेश और तमिलनाडु के लिए खेलते हुए लगातार विकेट चटकाए।
  • भारतीय टीम: बांग्लादेश दौरे पर अपना पहला वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेला।
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कुलदीप रामपाल सेन का जन्म 22 अक्टूबर 1996 को मध्यप्रदेश के रीवा जिले के हरिहरपुर गांव में हुआ। उनका परिवार बेहद साधारण था। पिता रामपाल सेन पेशे से नाई हैं। पांच भाई-बहनों में तीसरे नंबर के कुलदीप ने मात्र 8 वर्ष की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया।

गांव के मैदानों में खेलते हुए उन्होंने तेज गेंदबाजी को अपनी पहचान बनाया। आर्थिक सीमाएं थीं, साधन कम थे, लेकिन सपने बड़े थे। उनकी प्रतिभा को दिशा मिली उनके कोच अरिल एंथनी से, जिन्होंने कुलदीप को तकनीक, फिटनेस और प्रोफेशनल सोच सिखाई।

घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद कुलदीप को तमिलनाडु की टीम में खेलने का मौका मिला। उनकी गेंद की रफ्तार 140 किमी प्रति घंटा से ऊपर जाती है, जिसने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स से जुड़ने के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने लगे।

दिसंबर 2022 में बांग्लादेश दौरे पर उन्होंने भारत के लिए अपना पहला वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। यह क्षण केवल कुलदीप के जीवन का नहीं, बल्कि पूरे रीवा और विंध्य क्षेत्र के लिए गर्व का था। गांव से निकलकर देश का प्रतिनिधित्व करना—यह कहानी हजारों बच्चों को सपना देखने की हिम्मत देती है।

Ranji Trophy Hero – ईश्वर पांडे

Ranji Trophy Legend

ईश्वर पांडे (Ishwar Pandey): रीवा का रणजी हीरो

जन्म तिथि 15 अगस्त 1989
जन्म स्थान रीवा, मध्य प्रदेश
पिता का पेशा सेना (जूनियर ऑफिसर)
मुख्य टीमें MP, CSK, India A
संन्यास की तिथि 12 सितंबर 2022

रणजी ट्रॉफी में ऐतिहासिक प्रदर्शन

ईश्वर पांडे ने रणजी ट्रॉफी 2012–13 सत्र में अपनी धारदार गेंदबाजी से पूरे भारत में खलबली मचा दी थी। वह उस सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने, जिसके बाद उन्हें 'रीवा एक्सप्रेस' के रूप में पहचान मिली। उनकी लाइन-लेंथ की तुलना दिग्गज गेंदबाजों से की जाने लगी।

IPL और नेशनल टीम का सफर

  • MRF Pace Academy: चेन्नई में दिग्गज प्रशिक्षकों की देखरेख में अपनी गति और स्विंग को निखारा।
  • Team India Call: न्यूज़ीलैंड दौरे (2014) के लिए भारतीय टेस्ट और वनडे टीम में जगह बनाई।
  • CSK Star: आईपीएल में एमएस धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें ₹1.5 करोड़ में अपनी टीम का हिस्सा बनाया।
  • पुणे सुपरजायंट्स: राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स के लिए भी अपनी गेंदबाजी का जलवा बिखेरा।
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ईश्वर चंद्र पांडे का जन्म 15 अगस्त 1989 को रीवा में हुआ। उनके पिता भारतीय सेना में जूनियर ऑफिसर रह चुके हैं। अनुशासन और देशभक्ति का माहौल उनके बचपन से ही जीवन का हिस्सा रहा।

ईश्वर पांडे ने मध्यप्रदेश की ओर से खेलते हुए रणजी ट्रॉफी 2012–13 में इतिहास रच दिया। वे उस सत्र के सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उनकी सटीक लाइन-लेंथ और निरंतरता ने उन्हें घरेलू क्रिकेट का स्टार बना दिया।

उनकी प्रतिभा को निखारने में MRF Pace Academy, चेन्नई की अहम भूमिका रही। यहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाजों जैसा प्रशिक्षण मिला। इसके बाद वे India A टीम का हिस्सा बने और न्यूज़ीलैंड दौरे 2014 के लिए भारतीय टेस्ट व वनडे टीम में चुने गए।

आईपीएल में उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स ने ₹1.5 करोड़ में खरीदा। बाद में वे राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स के लिए भी खेले। आईपीएल जैसे मंच पर प्रदर्शन करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, और ईश्वर ने इसे अपने परिश्रम से हासिल किया।

12 सितंबर 2022 को ईश्वर पांडे ने अंतरराष्ट्रीय और प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। हालांकि उनका सफर मैदान पर थम गया, लेकिन रीवा के युवाओं के लिए उनकी कहानी आज भी जीवंत है—कि कैसे एक सेना परिवार का बेटा घरेलू क्रिकेट से निकलकर राष्ट्रीय टीम की दहलीज तक पहुंचा।

कुलदीप सेन और ईश्वर पांडे—ये दोनों नाम साबित करते हैं कि रीवा केवल इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य भी गढ़ रहा है। यह अंचल अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय खेल मंच का सक्रिय हिस्सा बन चुका है। गांव-कस्बों के बच्चे अब यह जानते हैं कि मेहनत उन्हें भी भारत की जर्सी पहनने तक पहुंचा सकती है।

रीवा की पहचान अब केवल प्रशासन, सेना या खेल तक सीमित नहीं रही। यह अंचल सिनेमा, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुका है। थिएटर से लेकर बॉलीवुड, छोटे पर्दे से लेकर ओटीटी और यूट्यूब तक—रीवा के कलाकारों ने यह साबित किया है कि प्रतिभा किसी महानगर की मोहताज नहीं होती।

Theatre से Bollywood तक – कुमुद मिश्रा

रीवा का चमकता सितारा

कुमुद मिश्रा: थिएटर से बॉलीवुड तक

National School of Drama (NSD) के मंझे हुए कलाकार

जन्म स्थान रीवा, मध्य प्रदेश
शिक्षा राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल (बेलगाम), NSD
प्रसिद्ध टीवी शो स्वाभिमान (Swabhimaan)
प्रमुख फिल्में एयरलिफ्ट, सुल्तान, आर्टिकल 15

अभिनय का सफर और पहचान

रीवा की मिट्टी से निकले कुमुद मिश्रा ने अभिनय की बारीकियां दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से सीखीं। उन्होंने न केवल फिल्मों में बल्कि थिएटर और टेलीविजन पर भी अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। उनकी सहजता और हर किरदार में ढल जाने की कला उन्हें आज के दौर का सबसे बेहतरीन 'कैरेक्टर एक्टर' बनाती है।

यादगार फ़िल्मी सफर (Filmography)

  • जॉली एलएलबी 2: यादगार भूमिका जिसने सबका ध्यान खींचा।
  • एम.एस. धोनी: महेंद्र सिंह धोनी के शुरुआती कोच की शानदार भूमिका।
  • आर्टिकल 15 और थप्पड़: संजीदा अभिनय के लिए आलोचकों की तारीफ पाई।
  • टाइगर जिंदा है: बड़े बजट की फिल्म में भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
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कुमुद मिश्रा का जन्म रीवा में हुआ और यहीं से उनकी कला यात्रा शुरू हुई। उन्होंने राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल, बेलगाम से पढ़ाई की और बाद में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, दिल्ली से अभिनय की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की। थिएटर की गहरी समझ ने उन्हें एक ऐसा अभिनेता बनाया, जो हर किरदार में जान डाल देता है।

टेलीविजन पर स्वाभिमान जैसे धारावाहिक से पहचान बनाने के बाद उन्होंने फिल्मों में कदम रखा। सरदारी बेगम, एयरलिफ्ट, सुल्तान, एम.एस. धोनी, जॉली एलएलबी 2, टाइगर जिंदा है, आर्टिकल 15, थप्पड़ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने आलोचकों और दर्शकों—दोनों का दिल जीता।

वे आज भी समय निकालकर अपने गृह नगर रीवा आते हैं। उनका डाउन-टू-अर्थ स्वभाव और कला के प्रति समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा है। कुमुद मिश्रा यह साबित करते हैं कि स्टारडम से बड़ा होता है—कला का सम्मान

Dentist to Bollywood Actor – अर्जुन द्विवेदी

Rewa to Bollywood

अर्जुन द्विवेदी: डेंटिस्ट से बॉलीवुड स्टार तक

गदर-2 और सिंघम अगेन फेम अभिनेता

मूल निवासी रीवा, मध्य प्रदेश
पेशेवर शिक्षा डेंटिस्ट (BDS)
फिल्मी डेब्यू बादशाहो (Baadshaho)
चर्चित रोल गदर-2, सिंघम अगेन

डॉक्टर से एक्टर बनने का सफर

रीवा के अर्जुन द्विवेदी की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। पेशे से एक डेंटिस्ट होने के बावजूद अभिनय के प्रति उनके जुनून ने उन्हें मुंबई पहुँचाया। दिलीप कुमार के प्रोडक्शन हाउस से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अर्जुन आज बॉलीवुड की सबसे बड़ी फिल्मों (ब्लॉकबस्टर मूवीज) का हिस्सा हैं। वे आज भी अपने एक्टिंग और मेडिकल प्रैक्टिस के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाए रखते हैं।

प्रमुख फ़िल्में और वेब सीरीज

  • गदर-2 (Gadar 2): सनी देओल के साथ महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आए।
  • सिंघम अगेन: अजय देवगन स्टारर इस फिल्म में अपनी पहचान छोड़ी।
  • इंडियन पुलिस फोर्स: रोहित शेट्टी की चर्चित वेब सीरीज का हिस्सा रहे।
  • वैक्सीन वॉर: विवेक अग्निहोत्री की फिल्म में संजीदा अभिनय।
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अर्जुन द्विवेदी, रीवा के निवासी, पेशे से डेंटिस्ट हैं लेकिन पहचान उन्हें मिली बॉलीवुड अभिनेता के रूप में। उन्होंने दूरदर्शन भोपाल से शुरुआत की और 2006 में मुंबई पहुंचे। दिलीप कुमार की प्रोडक्शन से बने धारावाहिक ‘स्त्री तेरी कहानी’ ने उन्हें पहला बड़ा मंच दिया।

फिल्मों में उनका डेब्यू ‘बादशाहो’ से हुआ। इसके बाद वे गदर-2, वैक्सीन वॉर, सिंघम अगेन और वेब सीरीज इंडियन पुलिस फोर्स में नजर आए। अभिनय के साथ-साथ वे आज भी अपने डेंटल क्लिनिक को समय देते हैं—यही संतुलन उन्हें अलग बनाता है।

Voice of Vindhya – प्रतिभा सिंह बघेल (Singer)

विंध्य की कोकिला

प्रतिभा सिंह बघेल: शास्त्रीय और पार्श्व गायिका

बॉलीवुड एवं ठुमरी की सुरीली आवाज

जन्म स्थान रीवा, मध्य प्रदेश
संगीत शिक्षा संगीत प्रभाकर एवं पारंगत
राष्ट्रीय मंच Sa Re Ga Ma Pa (2009)
प्रसिद्ध एल्बम Bole Naina (with Gulzar)

रीवा की मिट्टी से बॉलीवुड के सुरों तक

प्रतिभा सिंह बघेल ने अपनी शास्त्रीय गायकी और ठुमरी के प्रशिक्षण से संगीत जगत में एक अलग पहचान बनाई है। रीवा से निकलकर सारेगामापा जैसे बड़े मंच तक पहुँचना और फिर बॉलीवुड फिल्मों में अपनी आवाज देना उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है। उनकी आवाज में विंध्य की मिठास और शास्त्रीय गायन की गंभीरता का अद्भुत संगम है।

प्रमुख फ़िल्मी गाने और प्रोजेक्ट्स

  • मणिकर्णिका (Manikarnika): ऐतिहासिक फिल्म में सशक्त गायन।
  • Baazaar & Thappad: इन फिल्मों के गानों को काफी पसंद किया गया।
  • Bole Naina: गुलजार, जाकिर हुसैन और दीपक पंडित जैसे दिग्गजों के साथ विशेष सहयोग।
  • इंटरनेशनल कॉन्सर्ट: ठुमरी और गजल गायिकी के लिए विश्वभर में लाइव परफॉरमेंस।
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प्रतिभा सिंह बघेल का जन्म रीवा में हुआ। उन्होंने संगीत प्रभाकर और संगीत पारंगत जैसी उपाधियां प्राप्त कीं और ठुमरी व शास्त्रीय गायन में प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2009 में वे Sa Re Ga Ma Pa Challenge के मंच पर नजर आईं, जहां उनकी आवाज ने देश का ध्यान खींचा।

बॉलीवुड में उन्होंने Manikarnika, Humpty Sharma Ki Dulhania, Baazaar, Bollywood Diaries जैसी फिल्मों में अपनी आवाज दी। गुलजार, जाकिर हुसैन और दीपक पंडित जैसे दिग्गजों के साथ उनका एल्बम Bole Naina व्यापक रूप से सराहा गया। प्रतिभा आज विंध्य की उस मधुर आवाज का प्रतीक हैं, जिसने रीवा को संगीत के मानचित्र पर स्थापित किया।

Royal Grace on Screen – मोहना सिंह

ROYAL GRACE

मोहना कुमारी सिंह: रीवा की राजकुमारी

ताल्लुक रीवा राजपरिवार (Princess)
डेब्यू शो Dance India Dance (2012)
प्रसिद्ध भूमिका कीर्ति (ये रिश्ता क्या कहलाता है)
पति का नाम सुयेश रावत (उत्तराखंड)
यूट्यूब चैनल MOHENA VLOGS

नृत्य और अभिनय का सफर

रीवा के राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाली मोहना कुमारी सिंह ने यह साबित किया कि कड़ी मेहनत से अपनी खुद की पहचान बनाई जा सकती है। 2012 में Dance India Dance के मंच से शुरू हुआ उनका सफर स्टार प्लस के सबसे लोकप्रिय शो 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' तक पहुँचा, जहाँ उन्हें कीर्ति के रूप में अपार लोकप्रियता मिली।

व्यक्तिगत जीवन और उपलब्धियां

  • कोरियोग्राफी: वे मशहूर डायरेक्टर रेमो डिसूजा की असिस्टेंट भी रही हैं।
  • विवाह: 14 अक्टूबर 2019 को सुयेश रावत के साथ शाही अंदाज में विवाह संपन्न हुआ।
  • डिजिटल इन्फ्लुएंसर: आज वे लाखों फॉलोअर्स के साथ एक सफल व्लॉगर और डिजिटल क्रिएटर हैं।
  • प्रेरणा: उन्होंने परंपरा और आधुनिकता के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाया है।
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मोहना कुमारी सिंह रीवा के राजपरिवार से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान नृत्य और अभिनय के दम पर बनाई। वर्ष 2012 में Dance India Dance से करियर की शुरुआत कर उन्होंने देशभर का ध्यान खींचा।

स्टार प्लस के लोकप्रिय धारावाहिक ये रिश्ता क्या कहलाता है में कीर्ति गोयनका सिंघानिया की भूमिका से वे घर-घर पहचानी गईं। इसके साथ ही वे रेमो डिसूजा की असिस्टेंट कोरियोग्राफर भी रहीं और कई बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़ीं।

14 अक्टूबर 2019 को उनका विवाह उत्तराखंड के मंत्री सतपाल महाराज के पुत्र सुयेश रावत से हुआ। दो बच्चों की मां बनने के बाद भी मोहना डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं और MOHENA VLOGS के माध्यम से लाखों युवाओं से जुड़ी हुई हैं।

Television Face from Rewa – शिवम सिंह रघुवंशी

Rising TV Star

शिवम सिंह रघुवंशी: रीवा से टीवी तक

जन्म तिथि 2 मार्च 1995
जन्म स्थान रीवा, मध्य प्रदेश
पत्नी रोशनी सिंह (विवाह: 15 फरवरी 2023)
प्रसिद्धि टीवी अभिनेता (TV Actor)

करियर का सफर (Career Path)

रीवा जैसे शहर से निकलकर मायानगरी मुंबई में अपनी पहचान बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन शिवम सिंह रघुवंशी ने अपनी मेहनत और लगन से इसे सच कर दिखाया। वे छोटे शहरों के युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती।

प्रमुख टीवी धारावाहिक (TV Shows)

  • सावित्री देवी कॉलेज एंड हॉस्पिटल: इस शो से उन्हें घर-घर में पहचान मिली।
  • मुस्कान (Muskan): शिवम ने अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया।
  • जय भारती: टीवी स्क्रीन पर एक सशक्त भूमिका में नजर आए।
  • रोल मॉडल: विंध्य क्षेत्र के उभरते हुए कलाकारों के लिए एक बड़ा चेहरा।
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शिवम सिंह रघुवंशी का जन्म 2 मार्च 1995 को रीवा में हुआ। छोटे शहर से निकलकर मुंबई के टीवी इंडस्ट्री में जगह बनाना आसान नहीं होता, लेकिन शिवम ने इसे संभव कर दिखाया।

उन्होंने सावित्री देवी कॉलेज एंड हॉस्पिटल, मुस्कान और जय भारती जैसे धारावाहिकों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। 15 फरवरी 2023 को उन्होंने रोशनी सिंह से विवाह किया। शिवम आज रीवा के उन युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो छोटे शहर से निकलकर टीवी की दुनिया में पहचान बना रहे हैं।

From Rewa to Runway – निवेदिता चंदेल

रीवा से ग्लोबल रनवे तक

निवेदिता चंदेल (Nivedita Chandel): मॉडल और अभिनेत्री

जन्म स्थान रीवा (राजपूत परिवार)
शिक्षा (Education) M.Com (Masters in Commerce)
फिल्मी डेब्यू Love Ke Funday (2016)
विशेष पहचान International Fashion Icon

खेल के मैदान से रैंप तक का सफर

रीवा की निवेदिता चंदेल ने न केवल ग्लैमर की दुनिया में बल्कि खेल के मैदान में भी रीवा का मान बढ़ाया है। कॉलेज के दिनों में वॉलीबॉल, फुटबॉल और एथलेटिक्स में नेशनल लेवल की खिलाड़ी रहीं निवेदिता ने अपनी प्रतिभा के दम पर बॉलीवुड और इंटरनेशनल फैशन वर्ल्ड में कदम रखा।

प्रमुख उपलब्धियां (Key Achievements)

  • International Model: दुबई और कोलंबो फैशन वीक जैसे ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स पर रीवा का प्रतिनिधित्व।
  • अभिनय: फिल्म 'लव के फंडे' के साथ-साथ कई मशहूर म्यूजिक एल्बम और टीवी विज्ञापनों में अभिनय।
  • स्पोर्ट्स वुमन: राष्ट्रीय स्तर की एथलीट होने के कारण वे फिटनेस के प्रति युवाओं की रोल मॉडल हैं।
  • उद्यमी (Business): अभिनय और मॉडलिंग के साथ-साथ अब वे एक सफल बिजनेस वुमन के रूप में उभर रही हैं।
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निवेदिता चंदेल का जन्म रीवा के एक राजपूत परिवार में हुआ। उन्होंने कॉमर्स में मास्टर्स किया और कॉलेज के दिनों में वॉलीबॉल, फुटबॉल व एथलेटिक्स में नेशनल लेवल तक प्रदर्शन किया।

उन्होंने 2016 में फिल्म Love Ke Funday से अभिनय की शुरुआत की। इसके बाद वे कई म्यूजिक एल्बम, टीवी कमर्शियल और फैशन शोज़ का हिस्सा बनीं। Dubai Fashion Week और Colombo Fashion Week जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रैंप वॉक कर चुकी निवेदिता आज मॉडल से अभिनेत्री और बिजनेस वुमन बनने की राह पर हैं।

Rising Web Star – प्रिया मिश्रा

WEB STAR

प्रिया मिश्रा (Priya Mishra): वेब सीरीज की उभरती कलाकार

जन्म तिथि 3 मई 1992
जन्म स्थान रीवा, मध्य प्रदेश
प्रमुख प्लेटफॉर्म Alt Balaji, Sony LIV
अन्य पद फिल्म विकास समिति सदस्य

रीवा से ओटीटी के बड़े मंच तक

रीवा की प्रिया मिश्रा ने अपनी मेहनत और अभिनय क्षमता के दम पर मुंबई की ग्लैमर इंडस्ट्री में खास जगह बनाई है। उन्होंने न केवल लोकप्रिय वेब सीरीज में काम किया, बल्कि Crime Patrol जैसे हिट टीवी शो के माध्यम से भी दर्शकों के दिलों में जगह बनाई।

प्रसिद्ध कार्य (Famous Works)

  • Riti Riwaj: इस वेब सीरीज से उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़ी पहचान मिली।
  • Queen of Sajjangarh: ऐतिहासिक फंतासी ड्रामा में बेहतरीन अभिनय।
  • Rosy Ma'am: I Love You: इस फिल्म के जरिए फिल्मी पर्दे पर सशक्त मौजूदगी।
  • Ghum Hai Kisi Ke Pyaar Mein: लोकप्रिय टीवी शो का हिस्सा रहीं।
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प्रिया मिश्रा का जन्म 3 मई 1992 को रीवा में हुआ। वे वेब सीरीज Riti Riwaj, Queen of Sajjangarh और फिल्म Rosy Ma'am: I Love You से पहचानी जाती हैं।

उन्होंने Alt Balaji जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर काम किया और Crime Patrol, Ghum Hai Kisi Ke Pyaar Mein जैसे टीवी शोज़ में भी नजर आईं। अभिनय के साथ-साथ वे फिल्म प्रोडक्शन से भी जुड़ी हैं और झारखंड फिल्म विकास समिति की सदस्य हैं।

कुमुद मिश्रा की गंभीरता, मोहना सिंह की गरिमा, शिवम का संघर्ष, निवेदिता की उड़ान और प्रिया मिश्रा की डिजिटल पहचान—ये सभी मिलकर रीवा को क्रिएटिव हब के रूप में स्थापित कर रहे हैं। यह पीढ़ी बता रही है कि कला और अभिनय की दुनिया में भी रीवा किसी महानगर से कम नहीं।

रीवा केवल प्रतिभाओं की भूमि नहीं, बल्कि राजनीतिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत का भी केंद्र रहा है। इस धरती ने ऐसे नेतृत्वकर्ता दिए, जिन्होंने न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे प्रदेश और देश की दिशा तय की। आधुनिक राजनीति के शिल्पकार से लेकर लोकतंत्र के प्रतीक और राजशाही की गौरवगाथा तक—रीवा का योगदान बहुआयामी है।

Vikas Purush of Vindhya – राजेंद्र शुक्ला (Deputy CM, MP)

विकास पुरुष - विंध्य

राजेंद्र शुक्ला (Rajendra Shukla): विंध्य के विकास पुरुष

उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री, मध्यप्रदेश शासन

जन्म तिथि 3 अगस्त 1964
शिक्षा B.E. Civil (इंजीनियरिंग कॉलेज, रीवा)
विधानसभा क्षेत्र रीवा (लगातार 5वीं बार विधायक)
पिता का नाम स्व. भैयालाल शुक्ला (समाजसेवी)

राजनीतिक सफर और नेतृत्व

रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र राजनीति से उभरे राजेंद्र शुक्ला आज विंध्य के सबसे कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। 1986 में छात्र संघ अध्यक्ष बनने से लेकर मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर परिश्रम और जनसेवा की मिसाल है। उन्होंने उद्योग, जनसंपर्क और खनिज जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभालते हुए रीवा को विकास के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित किया।

रीवा का कायाकल्प और उपलब्धियां

  • इंफ्रास्ट्रक्चर: रीवा को मेट्रो-सिटी की तर्ज पर चौड़ी सड़कें और फ्लाईओवर की सौगात दी।
  • स्वास्थ्य एवं शिक्षा: सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और शिक्षा संस्थानों का जाल बिछाया।
  • औद्योगिक क्रांति: विंध्य में निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर पैदा किए।
  • सोलर पार्क: विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों में से एक 'रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर' में अहम भूमिका।
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राजेंद्र शुक्ला का जन्म 3 अगस्त 1964 को रीवा में हुआ। वे वर्तमान में मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री, स्वास्थय मंत्री हैं और रीवा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उनके पिता स्वर्गीय भैयालाल शुक्ला बघेलखंड क्षेत्र के प्रतिष्ठित ठेकेदार और समाजसेवी थे।

राजेंद्र शुक्ला ने शासकीय विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, रीवा से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक बने। छात्र जीवन से ही उनके भीतर नेतृत्व के गुण उभरने लगे थे। वर्ष 1986 में वे कॉलेज के स्टूडेंट यूनियन अध्यक्ष चुने गए।

राजनीति में उन्होंने कांग्रेस से शुरुआत की और बाद में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े। 1998 का चुनाव वे मामूली अंतर से हार गए, लेकिन 2003 में उन्होंने जीत दर्ज कर रीवा का प्रतिनिधित्व शुरू किया। इसके बाद 2008, 2013 और 2018 में भी जनता ने उन पर भरोसा जताया।

वन, खनिज, विधि, जैव-प्रौद्योगिकी, उद्योग एवं जनसम्पर्क जैसे विभागों का नेतृत्व कर चुके राजेंद्र शुक्ला को “विंध्य का विकास पुरुष” कहा जाता है। उनके कार्यकाल में रीवा ने सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और निवेश के क्षेत्र में नई उड़ान भरी। आज रीवा मध्यप्रदेश के तेजी से विकसित शहरों में गिना जाता है और मेट्रो-सिटी की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक बन चुका है।

Democracy’s Miracle – यमुना प्रसाद शास्त्री

लोकतंत्र का चमत्कार

यमुना प्रसाद शास्त्री: देश के पहले नेत्रहीन सांसद

इच्छाशक्ति और संघर्ष की मिसाल (रीवा लोकसभा क्षेत्र)

मुख्य उपलब्धि देश के प्रथम नेत्रहीन सांसद
लोकसभा निर्वाचन 1977 एवं 1989 (रीवा)
ऐतिहासिक जीत मार्तंड सिंह एवं प्रवीण कुमारी को हराया
क्षेत्र रीवा, बघेलखंड (म.प्र.)

दृष्टिहीनता पर भारी पड़ी प्रबल इच्छाशक्ति

यमुना प्रसाद शास्त्री भारतीय राजनीति के वे पुरोधा हैं जिन्होंने यह सिद्ध किया कि नेतृत्व के लिए आंखों की रोशनी नहीं, बल्कि मन की दूरदृष्टि आवश्यक है। उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी जनता की आवाज को संसद तक पहुँचाया और विंध्य के राजनैतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलकर रख दिया।

अविस्मरणीय चुनावी जीत

  • 1977 का चुनाव: रीवा के कद्दावर नेता महाराजा मार्तंड सिंह को पराजित कर राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं।
  • 1989 की जीत: एक बार फिर अपनी लोकप्रियता साबित करते हुए महारानी प्रवीण कुमारी को चुनाव में शिकस्त दी।
  • लोकतंत्र का संदेश: वे एक जीवित संदेश थे कि कोई भी शारीरिक अवरोध व्यक्ति को जनसेवा से नहीं रोक सकता।
  • छाप: उनकी सादगी और प्रखर वक्ता के रूप में उनकी पहचान आज भी रीवा की गलियों में जीवंत है।
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यमुना प्रसाद शास्त्री भारतीय लोकतंत्र के सबसे प्रेरक अध्यायों में से एक हैं। वे देश के पहले नेत्रहीन सांसद बने। दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना सामान्य व्यक्ति भी नहीं कर पाता।

वर्ष 1977 में उन्होंने रीवा लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर इतिहास रचा। उन्होंने उस समय के दिग्गज नेता महाराजा मार्तंड सिंह को पराजित किया, जो इससे पहले तीन बार सांसद रह चुके थे। इसके बाद 1989 में उन्होंने महारानी प्रवीण कुमारी को भी पराजित किया।

दुनिया को आंखों से न देख पाने वाले शास्त्री ने मन की आंखों से ऐसा भविष्य देखा, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को मजबूत किया। वे यह संदेश हैं कि अवरोध कभी पराजय नहीं होते—यदि इच्छाशक्ति प्रबल हो।

White Tiger of MP – श्रीनिवास तिवारी

विंध्य का सफेद शेर

श्रीनिवास तिवारी (Sriniwas Tiwari): म.प्र. विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष

विंध्य की राजनीति के शिखर पुरुष

जन्म एवं निधन 17 सित. 1926 – 19 जन. 2018
राजनैतिक पद विधानसभा अध्यक्ष (1993-2003)
विधायक कार्यकाल कुल 6 बार निर्वाचित
लोकप्रिय नाम व्हाइट टाइगर (White Tiger)

बघेलखंड की सशक्त आवाज

मध्यप्रदेश की राजनीति में पंडित श्रीनिवास तिवारी एक ऐसा नाम थे, जिनके बिना विंध्य का इतिहास अधूरा है। उन्होंने अपनी प्रखर कार्यशैली और निर्भीक व्यक्तित्व के कारण “व्हाइट टाइगर” की उपाधि अर्जित की। 1993 से 2003 तक विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल संसदीय गौरव का प्रतीक माना जाता है।

राजनैतिक प्रभाव और विरासत

  • विंध्य प्रदेश समर्थक: वे पृथक विंध्य प्रदेश की अस्मिता और पहचान के सबसे बड़े पैरोकार थे।
  • लोकप्रियता: गांव-देहात में प्रसिद्ध वाक्य “दादा न होय दैउ आय...” उनकी अटूट लोकप्रियता को दर्शाता है।
  • अनुभव: विंध्य प्रदेश विधानसभा से लेकर मध्यप्रदेश विधानसभा तक दशकों का राजनैतिक अनुभव।
  • युवाओं के प्रेरणा: छात्र जीवन से ही जनसेवा और क्रांति की मशाल थामने वाले नेता।
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श्रीनिवास तिवारी (17 सितंबर 1926 – 19 जनवरी 2018) मध्यप्रदेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नामों में रहे। वे छह बार विधायक बने और 1993 से 2003 तक मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर रहे। राजनीति में उन्हें “व्हाइट टाइगर” कहा जाता था।

वे विंध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य भी रह चुके थे और विंध्य की अलग पहचान के प्रबल समर्थक थे। उनके समर्थकों का प्रसिद्ध वाक्य— “दादा न होय दैउ आय, वोट न देबय तउ आय” आज भी गांव-देहात में राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा माना जाता है।

Guardian of White Tigers – महाराजा मार्तंड सिंह

Guardian of White Tigers

महाराजा मार्तंड सिंह: रीवा के अंतिम शासक

वन्यजीव संरक्षक एवं पद्म भूषण सम्मानित

जन्म स्थान गोविंदगढ़ किला, रीवा
शासन काल रीवा रियासत के अंतिम महाराजा
सफेद बाघ की खोज "मोहान" (1951)
राजनैतिक करियर 3 बार लोकसभा सांसद (रीवा)

विश्व पटल पर रीवा की पहचान

महाराजा मार्तंड सिंह जू देव केवल एक शासक नहीं, बल्कि दूरद्रष्टा थे। उन्होंने 1951 में विश्व के पहले ज्ञात सफेद बाघ "मोहान" को संरक्षण देकर रीवा को "Land of White Tigers" के रूप में वैश्विक ख्याति दिलाई। उनके प्रयासों से ही मुकुंदपुर में आज दुनिया की पहली व्हाइट टाइगर सफारी संचालित है।

प्रमुख उपलब्धियां और योगदान

  • बाँधवगढ़ नेशनल पार्क: इसकी स्थापना और संरक्षण में महाराजा की निर्णायक भूमिका रही।
  • पद्म भूषण: भारत सरकार द्वारा उनके सामाजिक और पर्यावरण योगदान हेतु सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
  • शिक्षा: डेली कॉलेज इंदौर और मेयो कॉलेज अजमेर से शिक्षा प्राप्त कर आधुनिक विचारों को अपनाया।
  • लोकप्रियता: राजशाही के बाद भी जनता के प्रति समर्पण के कारण वे तीन बार भारी मतों से सांसद चुने गए।
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महाराजा मार्तंड सिंह (15 मार्च 1923 – 20 नवंबर 1995) रीवा रियासत के अंतिम शासक और भारत के महान वन्यजीव संरक्षणवादियों में से एक थे। उनका जन्म गोविंदगढ़ किला में हुआ। उन्होंने Daly College, इंदौर और Mayo College, अजमेर से शिक्षा प्राप्त की।

वे सफेद बाघ के संरक्षण के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हुए। वर्ष 1951 में उन्होंने “मोहान” नामक सफेद बाघ को संरक्षित किया। आज दुनिया में मौजूद सभी व्हाइट बंगाल टाइगर उसी वंश से जुड़े हैं। उनकी पहल पर ही बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान अस्तित्व में आया।

राजशाही समाप्त होने के बाद भी उन्होंने जनसेवा नहीं छोड़ी और तीन बार लोकसभा सांसद बने। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। आज मुकुंदपुर में स्थित Maharaja Martand Singh White Tiger Safari उनके नाम को अमर बनाता है।

राजेंद्र शुक्ला का आधुनिक विकास, यमुना प्रसाद शास्त्री का लोकतांत्रिक चमत्कार, श्रीनिवास तिवारी की राजनीतिक धार और महाराजा मार्तंड सिंह की ऐतिहासिक विरासत—ये सभी मिलकर रीवा को नेतृत्व, संघर्ष और संरक्षण की भूमि बनाते हैं।

रीवा की पहचान अब केवल इतिहास और राजनीति तक सीमित नहीं रही। यह अंचल आज संगीत, उद्यमिता, डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। यहां से निकले नाम यह साबित करते हैं कि छोटे शहरों से भी बड़े सपने उड़ान भर सकते हैं।

From 3 Lakhs to 100 Crores – अनुभव दुबे (Entrepreneur)

STARTUP ICON

अनुभव दुबे (Anubhav Dubey): चाय सुट्टा बार के फाउंडर

रीवा की गलियों से 100 करोड़ के साम्राज्य तक

जन्म वर्ष 1996 (रीवा, म.प्र.)
शुरुआती निवेश मात्र 3 लाख रुपये
नेटवर्थ / टर्नओवर 100+ करोड़ रुपये
कुल आउटलेट्स 400+ (भारत एवं विदेश)

एक कुल्हड़ चाय और ग्लोबल ब्रांड का सपना

रीवा के एक साधारण परिवार में जन्मे अनुभव दुबे ने यह साबित कर दिया कि बिजनेस के लिए करोड़ों की नहीं, बल्कि एक बड़े विजन की जरूरत होती है। मात्र 3 लाख रुपये से शुरू हुआ "Chai Sutta Bar" आज न केवल भारत बल्कि दुबई और लंदन जैसे शहरों में भी अपनी खुशबू बिखेर रहा है। अनुभव आज देश के करोड़ों युवाओं के लिए 'यूथ आइकन' बन चुके हैं।

बिजनेस की बड़ी उपलब्धियां

  • 3 लाख कुल्हड़: हर दिन इनके आउटलेट्स पर इतनी चाय की बिक्री होती है।
  • रोजगार: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3000 से अधिक लोगों को रोजगार दिया।
  • कुम्हारों को सहारा: कुल्हड़ के उपयोग से हजारों कुम्हार परिवारों की आजीविका को नई दिशा दी।
  • ग्लोबल विजन: रीवा जैसे छोटे शहर से निकलकर एक ग्लोबल ब्रांड खड़ा किया।
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अनुभव दुबे का जन्म 1996 में रीवा में हुआ। उन्होंने मात्र 3 लाख रुपये से Chai Sutta Bar की शुरुआत की और इसे 100 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर वाले ब्रांड में बदल दिया।

आज चाय सुट्टा बार की 400+ फ्रेंचाइजी भारत और विदेशों में संचालित हैं। हर दिन 3 लाख कुल्हड़ चाय बिकती है और 3000 से अधिक लोग इससे जुड़े हैं। अनुभव दुबे की कहानी बताती है कि छोटे शहर भी ग्लोबल ब्रांड गढ़ सकते हैं।

Journalism Pride – राजेंद्र सिंह गहरवार

Journalism Pride

राजेंद्र सिंह गहरवार: पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर

वर्तमान पद रेजिडेंट एडिटर (Resident Editor)
संस्थान राजस्थान पत्रिका
अनुभव 3 दशक से अधिक (90 के दशक से सक्रिय)
मूल स्थान रीवा, मध्य प्रदेश

स्थानीय अनुभव से राष्ट्रीय विमर्श तक

90 के दशक में रीवा के स्थानीय समाचार पत्रों से अपनी लेखनी की शुरुआत करने वाले राजेंद्र सिंह गहरवार आज भारतीय पत्रकारिता का एक प्रतिष्ठित नाम हैं। अपनी निष्पक्ष रिपोर्टिंग और संपादन कौशल के दम पर उन्होंने देश के प्रमुख समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि प्रतिभा और ईमानदारी हो तो छोटे शहर से निकलकर भी राष्ट्रीय विमर्श को दिशा दी जा सकती है।

योगदान एवं पहचान

  • संपादकीय नेतृत्व: राजधानी में रेजिडेंट एडिटर के रूप में खबरों को नई धार दी।
  • रीवा का गौरव: विंध्य क्षेत्र के युवाओं के लिए मुख्यधारा की पत्रकारिता में रोल मॉडल।
  • सटीक विश्लेषण: राजनैतिक और सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ और विश्लेषण सराहनीय है।
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राजेंद्र सिंह गहरवार ने स्थानीय अखबार से शुरुआत कर देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका तक का सफर तय किया। आज वे राजधानी में रेजिडेंट एडिटर की भूमिका निभा रहे हैं।

उनकी लेखनी ने यह साबित किया कि छोटे शहर से निकला पत्रकार भी राष्ट्रीय विमर्श को दिशा दे सकता है। वे रीवा के युवाओं के लिए पत्रकारिता में मानक बन चुके हैं।

Ground Reporter with Impact – ज्ञानेंद्र तिवारी

जमीनी रिपोर्टिंग का चेहरा

ज्ञानेंद्र तिवारी: पत्रकारिता की बुलंद आवाज

सीनियर जर्नलिस्ट एवं ग्राउंड रिपोर्टर

मूल निवासी मऊगंज (रीवा), मध्य प्रदेश
शिक्षा पत्रकारिता स्नातक (भोपाल)
पूर्व संस्थान ABP News (Senior Correspondent)
वर्तमान संस्थान विस्तार न्यूज़ (Vistara News)

विंध्य से राष्ट्रीय फलक तक का सफर

मऊगंज की मिट्टी में पले-बढ़े ज्ञानेंद्र तिवारी ने अपनी धारदार रिपोर्टिंग से यह साबित किया है कि अगर आपके शब्दों में सच्चाई हो, तो छोटे कस्बों से निकली आवाज भी दिल्ली के गलियारों में गूँजती है। ABP News जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक सेवा देने के बाद, वे आज भी 'जमीनी सच्चाई' दिखाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी रिपोर्टिंग केवल खबर नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं का जीवंत दस्तावेज होती है।

रिपोर्टिंग की मुख्य विशेषताएं

  • ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग: एयर-कंडीशंड स्टूडियो के बजाय जनता के बीच रहकर खबरें खोजना।
  • आम आदमी की आवाज: सामाजिक सरोकार और ग्रामीण विकास की खबरों को प्राथमिकता।
  • निडर पत्रकारिता: कठिन परिस्थितियों और आपदाओं के बीच से भी सटीक खबरें पहुँचाना।
  • सोशल मीडिया इम्पैक्ट: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी विंध्य के युवाओं के लिए एक बड़े रोल मॉडल।
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ज्ञानेंद्र तिवारी, मूल रूप से मऊगंज, रीवा के निवासी हैं। उन्होंने भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई की और ABP News में Senior Correspondent रहे। वर्तमान में वे विस्तार न्यूज़ से जुड़े हैं।

उनकी रिपोर्टिंग की पहचान है—जमीनी सच्चाई। वे दिखाते हैं कि पत्रकारिता केवल स्क्रीन नहीं, बल्कि समाज की आवाज बनना है।

संगीत से लेकर स्टार्टअप, सिनेमा से लेकर यूट्यूब और न्यूज़रूम तक—रीवा की यह पीढ़ी बता रही है कि यह अंचल केवल इतिहास का पन्ना नहीं, बल्कि भविष्य का केंद्र भी है।

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रीवा को “टैलेंट हब” क्यों कहा जाने लगा है?

रीवा से सेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख, फाइटर पायलट, क्रिकेटर, अभिनेता, गायक, उद्यमी और पत्रकार निकलना यह सिद्ध करता है कि यह क्षेत्र अब टैलेंट हब बन चुका है।

रीवा के युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा कौन है?

हर क्षेत्र में अलग प्रेरणा है—सेना में उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना में अवनी चतुर्वेदी, खेल में कुलदीप सेन, बिजनेस में अनुभव दुबे और कला में कुमुद मिश्रा

क्या छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय पहचान बनाना संभव है?

रीवा के ये उदाहरण बताते हैं कि संघर्ष, मेहनत और निरंतरता के साथ छोटे शहर से निकलकर भी राष्ट्रीय पहचान बनाई जा सकती है।

रीवा की यह पहचान भविष्य में क्या बदलेगी?

यह पहचान रीवा को शिक्षा, निवेश और अवसरों का केंद्र बनाएगी। आने वाले वर्षों में रीवा नेतृत्व और नवाचार का प्रतीक बनेगा।

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