रीवा का गौरव बने दीपक मिश्रा: इंडियन नेवी में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बने, गांव में खुशी की लहर

रीवा जिले के सिरमौर निवासी दीपक मिश्रा का चयन इंडियन नेवी में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर हुआ है। कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। जानिए उनकी पूरी सफलता यात्रा।

Update: 2026-01-18 06:33 GMT
  • रीवा जिले के सिरमौर निवासी दीपक मिश्रा का इंडियन नेवी में चयन
  • INA में Executive Engineer पद पर मिली सफलता
  • गांव नदना में खुशी और गर्व का माहौल
  • दीपक ने सफलता का श्रेय परिवार और गुरुजनों को दिया

Rewa Success Story | छोटे गांव से देश की सेवा तक

रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र के छोटे से गांव नदना ने आज पूरे जिले को गौरव का मौका दिया है। यहां के रहने वाले दीपक मिश्रा पिता रावेन्द्र मिश्रा का चयन इंडियन नेवी में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर हुआ है। यह उपलब्धि न केवल दीपक और उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे रीवा और आसपास के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

एक सामान्य ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े दीपक ने यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी कभी भी सपनों के रास्ते की दीवार नहीं बन सकती। जरूरत होती है तो केवल मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास की। आज उनका नाम उन युवाओं में शामिल हो गया है, जो देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

INA Executive Engineer | क्या होता है यह पद?

इंडियन नेवी में Executive Engineer का पद अत्यंत जिम्मेदारी भरा होता है। इस पद पर चयनित अधिकारी को नेवी के जहाजों, बेस और तकनीकी ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इसमें आधुनिक तकनीक, इंजीनियरिंग कौशल और नेतृत्व क्षमता की जरूरत होती है।

दीपक मिश्रा का इस पद पर चयन यह दर्शाता है कि उन्होंने न केवल शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, बल्कि कठिन चयन प्रक्रिया में भी अपनी योग्यता सिद्ध की। इंडियन नेवी अकादमी (INA) तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।


रीवा का गौरव बने दीपक मिश्रा

इंडियन नेवी में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर चयन

रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र के छोटे से गांव नदना ने आज पूरे जिले को गौरव का मौका दिया है। यहां के रहने वाले दीपक मिश्रा पिता रावेन्द्र मिश्रा का चयन इंडियन नेवी में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर हुआ है। यह उपलब्धि न केवल दीपक और उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे रीवा और आसपास के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

दीपक ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिजनों और गुरुजनों को दिया है। उनका कहना है कि अगर परिवार का साथ और शिक्षकों का मार्गदर्शन न होता, तो यह मुकाम हासिल करना संभव नहीं था।

दीपक का संदेश
“अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत ईमानदार हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।”

Family Support | परिवार और गुरुजनों का योगदान

दीपक ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिजनों और गुरुजनों को दिया है। उनका कहना है कि अगर परिवार का साथ और शिक्षकों का मार्गदर्शन न होता, तो यह मुकाम हासिल करना संभव नहीं था।

पिता रावेन्द्र मिश्रा ने हमेशा बेटे को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। गांव के सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने दीपक की पढ़ाई और तैयारी में कोई कमी नहीं आने दी। यही कारण है कि आज दीपक पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं।

Village Reaction | गांव में जश्न का माहौल

जैसे ही दीपक के चयन की खबर गांव नदना और आसपास के क्षेत्रों में फैली, लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। रिश्तेदारों, मित्रों और ग्रामीणों ने दीपक के घर पहुंचकर परिवार को बधाई दी। मिठाइयां बांटी गईं और हर कोई इस सफलता को अपनी उपलब्धि मान रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि दीपक ने यह दिखा दिया कि रीवा का बेटा भी देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में स्थान बना सकता है। अब छोटे गांव के बच्चे भी बड़े सपने देखने लगे हैं।

Preparation Journey | संघर्ष, अनुशासन और निरंतर अभ्यास

दीपक मिश्रा की सफलता एक दिन में नहीं मिली। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और धैर्य छिपा है। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ देश की प्रतिष्ठित रक्षा सेवाओं में जाने का सपना बचपन से ही संजोया था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हालात को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।

दीपक ने नियमित अध्ययन, तकनीकी विषयों की गहरी समझ और शारीरिक फिटनेस पर बराबर ध्यान दिया। वे बताते हैं कि हर दिन का एक तय समय पढ़ाई के लिए और एक तय समय आत्ममूल्यांकन के लिए होता था। असफलताओं से घबराने के बजाय उन्होंने उन्हें सीखने का अवसर बनाया।

Challenges Faced | मुश्किलें आईं, लेकिन हौसला नहीं टूटा

ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने के कारण दीपक के सामने कई चुनौतियाँ थीं—संसाधनों की कमी, मार्गदर्शन का अभाव और प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव। कई बार ऐसा भी आया जब परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को और मजबूत बनाया।

उनका मानना है कि संघर्ष ही इंसान को गढ़ता है। अगर रास्ता आसान होता, तो शायद मंजिल की अहमियत भी कम होती। यही सोच उन्हें बार-बार उठ खड़ा होने की ताकत देती रही।

Message to Youth | युवाओं के लिए दीपक का संदेश

अपनी सफलता के बाद दीपक ने रीवा और आसपास के युवाओं से कहा कि वे कभी भी अपने सपनों को छोटा न समझें। उनका संदेश साफ है—“अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत ईमानदार हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।”

उन्होंने युवाओं से मोबाइल और सोशल मीडिया के अनावश्यक इस्तेमाल से दूर रहकर अपने भविष्य पर ध्यान देने की अपील की। उनका कहना है कि आज के समय में जानकारी हर जगह उपलब्ध है, बस जरूरत है सही दिशा और निरंतर अभ्यास की।

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दीपक मिश्रा का चयन किस पद पर हुआ है?

दीपक मिश्रा का चयन इंडियन नेवी में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर हुआ है।

दीपक कहां के निवासी हैं?

वे रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र के नदना गांव के निवासी हैं।

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय किसे दिया?

दीपक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिजनों और गुरुजनों को दिया है।

यह सफलता युवाओं के लिए क्या संदेश देती है?

यह साबित करती है कि छोटे गांव से आने वाला छात्र भी कड़ी मेहनत और सही दिशा में प्रयास से देश की प्रतिष्ठित सेवाओं में स्थान पा सकता है।

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