रीवा में EoW ने कंप्यूटर ऑपरेटर 10 हजार रिश्वत लेते पकड़ा, तहसील कार्यालय में EWS सर्टिफिकेट के बदले वसूली; गुढ़ तहसीलदार भी जांच के घेरे में
रीवा के गुढ़ तहसील कार्यालय में EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसीलदार के कंप्यूटर ऑपरेटर को EWS प्रमाण पत्र सत्यापन के बदले 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। तहसीलदार की भूमिका भी जांच के घेरे में।
- ✔ EWS प्रमाण पत्र सत्यापन के बदले ₹10,000 रिश्वत लेते कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार
- ✔ शिकायतकर्ता की बेटी का एकलव्य विद्यालय में चयन, फाइल जानबूझकर रोकी गई
- ✔ EOW रीवा की टीम ने तहसील कार्यालय में किया ट्रैप ऑपरेशन
- ✔ तहसीलदार की भूमिका भी जांच के घेरे में, विभागीय कार्रवाई संभव
रीवा EOW कार्रवाई का पूरा मामला | Rewa EOW Bribery Case Explained
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में EOW कार्रवाई ने प्रशासनिक भ्रष्टाचार की एक और परत खोल दी है। गुढ़ तहसील कार्यालय में पदस्थ तहसीलदार के कंप्यूटर ऑपरेटर भगवानदीन चौरसिया को EWS प्रमाण पत्र सत्यापन के बदले ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई 19 जनवरी की देर शाम उस समय की गई, जब आरोपी आवेदक से तय रकम लेने के लिए तहसील परिसर में पहुंचा था।
शिकायत कैसे दर्ज हुई | How the Complaint Reached EOW
इस पूरे मामले की शुरुआत ग्राम नर्रहा, तहसील गुढ़ निवासी बृजेन्द्र मणि त्रिपाठी की शिकायत से हुई। उनकी बेटी का चयन प्रतिष्ठित एकलव्य आवासीय विद्यालय में हो गया था, जहां प्रवेश के लिए EWS प्रमाण पत्र सत्यापन अनिवार्य था। अक्टूबर 2024 में आवेदन करने के बाद भी महीनों तक फाइल आगे नहीं बढ़ाई गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, तहसील कार्यालय के चक्कर काटने के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटर भगवानदीन चौरसिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना रिश्वत दिए सत्यापन नहीं होगा। पहले इशारों में और फिर सीधे ₹10,000 की मांग की गई। मजबूरी में परेशान पिता ने आखिरकार EOW रीवा से संपर्क किया।
कैसे हुआ ट्रैप ऑपरेशन | How EOW Trapped the Accused
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की टीम ने शिकायत की जांच के बाद जाल बिछाया। शिकायतकर्ता को केमिकल लगे नोट दिए गए और तय समय पर तहसील कार्यालय भेजा गया। जैसे ही आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर ने पैसे स्वीकार किए, EOW की टीम ने मौके पर दबिश देकर उसे पकड़ लिया।
जांच के दौरान आरोपी के हाथों पर केमिकल रिएक्शन भी पाया गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई। इसके तुरंत बाद आरोपी को हिरासत में लेकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
तहसील कार्यालय में महीनों से रुकी फाइल | File Held for Months
जांच में सामने आया कि आवेदक की फाइल को जानबूझकर दबाकर रखा गया था। अक्टूबर 2024 से लेकर जनवरी 2026 तक EWS सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। तहसील और जिला स्तर के अधिकारियों को मौखिक और लिखित शिकायतें देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
यही कारण था कि परेशान होकर शिकायतकर्ता को अंततः EOW कार्यालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
तहसीलदार की भूमिका पर सवाल | Tehsildar Under Scanner
इस पूरे मामले में गुढ़ के प्रभारी तहसीलदार अरुण यादव की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसने ऑपरेटर द्वारा रिश्वत मांगे जाने की जानकारी सीधे तहसीलदार को दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इतना ही नहीं, आरोपी ऑपरेटर कथित तौर पर कई बार “साहब के आदेश” का हवाला देकर काम रोकने की बात करता था। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं यह भ्रष्टाचार अकेले ऑपरेटर का था या इसके पीछे पूरी तहसील प्रणाली में फैला कोई नेटवर्क काम कर रहा था।
EOW एसपी का बयान | Official Statement
EOW रीवा के पुलिस अधीक्षक अरविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि कार्यालय परिसर में रिश्वत लेते हुए आरोपी को पकड़ा गया है। प्रारंभिक जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है। अब यह भी जांच की जा रही है कि इसमें अन्य अधिकारी या कर्मचारी कितने शामिल थे।
कानूनी कार्रवाई और धाराएं | Legal Action & Sections
EOW ने आरोपी भगवानदीन चौरसिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इसमें मुख्य रूप से धारा 7 (लोक सेवक द्वारा रिश्वत मांगना/लेना) और धारा 13 (पद का दुरुपयोग कर अवैध लाभ लेना) लागू की गई हैं। इन धाराओं में दोष सिद्ध होने पर आरोपी को 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि क्या यह केवल एक कर्मचारी की हरकत थी या फिर तहसील स्तर पर संगठित भ्रष्टाचार का हिस्सा है। यदि तहसीलदार या अन्य अधिकारी इसमें शामिल पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी समान कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन में हड़कंप | Panic in Administration
EOW की इस कार्रवाई के बाद पूरे तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि अब पुराने मामलों की भी जांच हो सकती है। कई आवेदकों ने भी सामने आकर कहना शुरू किया है कि उनसे पहले भी फाइल आगे बढ़ाने के बदले पैसे मांगे गए थे।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, जिला स्तर से तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली की आंतरिक ऑडिट जांच कराने की तैयारी की जा रही है। विशेष रूप से जाति, आय और EWS प्रमाण पत्रों से जुड़े मामलों की फाइलें खंगाली जाएंगी।
EWS प्रमाण पत्र क्या होता है?
मध्य प्रदेश में EWS प्रमाण पत्र के लिए पात्रता, कैसे अप्लाई करें
FAQ: पाठकों के सवाल
EWS प्रमाण पत्र क्या होता है?
EWS यानी Economically Weaker Section प्रमाण पत्र उन परिवारों को मिलता है, जिनकी वार्षिक आय सरकार द्वारा तय सीमा से कम होती है। इसके जरिए शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण और सुविधाएं मिलती हैं।
EOW क्या है?
EOW (Economic Offences Wing) राज्य की विशेष जांच एजेंसी होती है, जो भ्रष्टाचार, घूसखोरी और आर्थिक अपराधों की जांच करती है।
क्या तहसीलदार पर भी कार्रवाई हो सकती है?
यदि जांच में यह साबित होता है कि तहसीलदार को रिश्वत की जानकारी थी या वह इसमें शामिल थे, तो उनके खिलाफ भी आपराधिक केस और विभागीय कार्रवाई हो सकती है।
आम नागरिक क्या करें यदि रिश्वत मांगी जाए?
ऐसी स्थिति में नागरिक EOW या लोकायुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत कर सकते हैं। गोपनीयता रखी जाती है और ट्रैप ऑपरेशन के जरिए आरोपी को पकड़ा जाता है।