रीवा में UGC के खिलाफ पैदल मार्च, 8 मार्च को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान; क्या है समता विनियम 2026?
रीवा में UGC Regulation 2026 के विरोध में छात्रों का पैदल मार्च। 8 मार्च को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान। जानें UGC Regulation 2026 क्या है और विवाद क्यों।
रीवा में UGC रेगुलेशन 2026 के खिलाफ प्रदर्शन
- यूजीसी समता विनियम 2026 के खिलाफ पैदल मार्च
- 8 मार्च को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान
- सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर लगाई रोक
- SC-ST-OBC नियमों को लेकर देशभर में बहस
रीवा शहर में बुधवार शाम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के ‘समता विनियम 2026’ के विरोध में छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने शहर की प्रमुख सड़कों पर रैली निकालते हुए “यूजीसी रोल बैक” और “शिक्षा बचाओ” के नारे लगाए। 8 मार्च को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान करते हुए राजधानी में राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन की घोषणा की गई।
रीवा में कैसा रहा प्रदर्शन?
रैली निर्धारित स्थल से शुरू होकर शिल्पी प्लाजा, सिरमौर चौराहा और कॉलेज चौराहा होते हुए आगे बढ़ी। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए छात्रों ने यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग की। कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ, हालांकि पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति नियंत्रण में रही।
यूजीसी समता विनियम 2026 क्या है?
13 जनवरी 2026 को यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘समता विनियम 2026’ अधिसूचित किया। इसका उद्देश्य धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान, दिव्यांगता आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है।
SC-ST, OBC छात्रों और अध्यापकों के लिए क्या प्रावधान हैं?
नियमों के तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय में समान अवसर केंद्र, समता समिति और ‘समता समूह’ (इक्विटी स्क्वॉड) गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। 24/7 हेल्पलाइन, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और विभागीय ‘समता दूत’ नियुक्त किए जाने का प्रावधान है। यदि कोई संस्थान पालन नहीं करता तो यूजीसी अनुदान रोक सकता है।
विरोध क्यों हो रहा है?
विरोध करने वाले संगठनों का तर्क है कि विनियम 3(सी) में भेदभाव की परिभाषा सीमित है और इससे गैर-आरक्षित वर्ग के लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि नियम का दुरुपयोग संभव है। UGC रेगुलेशन 2026 का विरोध पूरे देश में हो रहा है। वहीं आरक्षित वर्ग इसका समर्थन कर रहा है।
समर्थन में क्या तर्क?
यूजीसी का कहना है कि यह नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप है और इसका उद्देश्य समावेशन को बढ़ावा देना है। समर्थकों का मानना है कि यह नियम जातिगत भेदभाव की घटनाओं को रोकने में सहायक होगा।
सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने समता विनियम 2026 पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि भेदभाव की परिभाषा अधिक समावेशी होनी चाहिए। फिलहाल 2012 के यूजीसी नियम लागू रहेंगे।
याचिका में क्या कहा गया?
एडवोकेट विनीत जिंदल द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि विनियम 3(सी) संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) और 21 का उल्लंघन करता है। अदालत अब इस पर 19 मार्च को विस्तृत सुनवाई करेगी।
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