रीवा में MRP से ज्यादा दाम पर शराब बिक्री? CM हेल्पलाइन बंद, आबकारी विभाग पर मिलीभगत के आरोप

रीवा के झिरिया शराब ठेके पर MRP से अधिक वसूली की शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं। आबकारी विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल।

Update: 2026-02-20 12:45 GMT

मुख्य बिंदु

  • रीवा शहर के झिरिया शराब दुकान पर MRP से अधिक वसूली का आरोप
  • तीन स्तर की जांच के बाद भी प्रशासन ने बिक्री को “नियमानुसार” बताया
  • आबकारी विभाग और जिला प्रशासन की जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

रीवा में शराब ठेकों पर मनमानी वसूली का आरोप एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला केवल 20 रुपये अतिरिक्त लेने का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम की जवाबदेही से जुड़ा है। झिरिया मोहल्ला स्थित शराब दुकान से बीयर खरीदने वाले प्रवीण शर्मा ने आरोप लगाया है कि 11 जनवरी 2026 को उनसे बोतल पर अंकित ₹160 के बजाय ₹180 वसूले गए। शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से अब आबकारी विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है।

Explainer: मामला क्या है?

रीवा के झिरिया कंपोजिट शराब दुकान से Kingfisher बीयर खरीदते समय ₹160 अंकित कीमत के बजाय ₹180 वसूले जाने का आरोप। CM हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी तीन स्तर की जांच में “कोई गड़बड़ी नहीं” बताई गई। शिकायतकर्ता का दावा – वीडियो साक्ष्य मौजूद।

शिकायत और जांच: कागजों में सब ठीक, जमीन पर सवाल

प्रवीण शर्मा ने CM हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर जांच हुई और “टेस्ट परचेस” के आधार पर बिक्री को MRP के अनुरूप बताया गया। 31 जनवरी 2026 को शिकायत बंद कर दी गई।

लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच के दौरान न तो उनसे प्रत्यक्ष संपर्क किया गया और न ही उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो साक्ष्य का तकनीकी सत्यापन सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जांच प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई?

क्या जिले के अन्य ठेकों पर भी यही हाल?

स्थानीय नागरिकों का दावा है कि रीवा जिले के कई शराब ठेकों पर MRP से अधिक वसूली आम बात है। यह आरोप नया नहीं है। सवाल यह है कि यदि ऐसी शिकायतें बार-बार सामने आती हैं तो क्या आबकारी विभाग को इसकी जानकारी नहीं होती? या जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती?

यदि प्रशासन को जमीनी हकीकत की जानकारी है और फिर भी नियमित निरीक्षण व सख्त कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जाएगी। इससे उपभोक्ता अधिकारों का हनन और सरकारी राजस्व प्रणाली की विश्वसनीयता दोनों प्रभावित होती हैं।

जवाबदेही किसकी?

आबकारी विभाग और जिला प्रशासन का दायित्व है कि वह निर्धारित MRP/MSP पर बिक्री सुनिश्चित करे। जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि कानून का पालन हो और शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई हो। यदि किसी जांच में शिकायतकर्ता से संपर्क तक नहीं किया गया, तो प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न उठना और ठेकेदारों के साथ सांठगांठ होना स्वाभाविक है।

ऐसी स्थितियों में स्वतंत्र निरीक्षण, सीसीटीवी फुटेज की जांच और डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड का ऑडिट किया जाना चाहिए। केवल “टेस्ट परचेस” रिपोर्ट से वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती। रीवा जिले के सभी शराब ठेकों का यही हाल है।

जब नागरिक शिकायत दर्ज कराता है और उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो प्रशासनिक तंत्र पर भरोसा कमजोर होता है। यह मामला छोटे आर्थिक नुकसान से बड़ा होकर सिस्टम की विश्वसनीयता का प्रश्न बन जाता है।

रीवा शराब वसूली विवाद: स्थिति संक्षेप

  • MRP ₹160, वसूली ₹180 का आरोप
  • CM हेल्पलाइन में शिकायत, तीन स्तरीय जांच
  • वीडियो साक्ष्य की जांच पर स्पष्टता नहीं
  • आबकारी विभाग और जिला प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग

मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा है। स्थानीय स्तर पर व्यापक जांच और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

क्या अब होगी स्वतंत्र जांच?

यदि जिले में व्यापक स्तर पर MRP उल्लंघन की शिकायतें हैं, तो जिला प्रशासन को विशेष अभियान चलाकर औचक निरीक्षण करना चाहिए। डिजिटल बिलिंग, रसीद अनिवार्यता और शिकायत मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करना समय की मांग है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या MRP से अधिक शराब बेचना गैरकानूनी है?

हाँ, निर्धारित MRP/MSP से अधिक कीमत वसूलना नियमों का उल्लंघन माना जाता है और इस पर कार्रवाई हो सकती है।

रीवा में शिकायत कैसे दर्ज करें?

CM हेल्पलाइन 181 पर कॉल कर या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकती है।

यदि जांच से संतोष न हो तो क्या करें?

उच्च स्तर पर पुनर्विचार या लोक शिकायत प्राधिकरण में अपील की जा सकती है।

क्या वीडियो साक्ष्य मान्य होता है?

हाँ, यदि तकनीकी रूप से सत्यापित हो तो वीडियो साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

क्या जिला प्रशासन स्वतंत्र जांच करा सकता है?

हाँ, यदि मामला जनहित और व्यापक शिकायतों से जुड़ा हो तो विशेष जांच दल गठित किया जा सकता है।

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