रीवा जिला अधिवक्ता संघ चुनाव पर हाई कोर्ट की बड़ी रोक: 25 मार्च को नहीं होगी वोटिंग, जानें क्या है पूरा विवाद

​रीवा जिला अधिवक्ता संघ चुनाव पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक! महिलाओं को 30% आरक्षण न देने पर याचिका दायर। जानें क्या है सुप्रीम कोर्ट का नियम और अब कब होगी अगली सुनवाई।

Update: 2026-03-24 14:32 GMT

जबलपुर/रीवा: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए रीवा जिला अधिवक्ता संघ के आगामी चुनाव पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने यह अंतरिम आदेश जारी किया है। यह चुनाव 25 मार्च 2026 को होने वाले थे, लेकिन अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पूरी प्रक्रिया थम गई है।


विवाद की जड़: महिलाओं को नहीं मिला 30% आरक्षण

इस पूरे मामले की शुरुआत रीवा की महिला अधिवक्ता जतिंदर कौर द्वारा दायर एक याचिका से हुई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि रीवा बार एसोसिएशन के चुनाव में महिलाओं के लिए निर्धारित 30 प्रतिशत आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया है।

बता दें कि 16 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया था, जिसमें देश के सभी जिला और तहसील बार एसोसिएशन के चुनावों में महिलाओं के लिए 30 फीसदी सीटें आरक्षित करना अनिवार्य कर दिया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि 7 मार्च को जारी चुनाव अधिसूचना में इस नियम को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।

कोर्ट रूम में क्या हुआ? मुख्य चुनाव अधिकारी हुए पेश

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मामला काफी गंभीर रहा। हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रीवा बार चुनाव के मुख्य चुनाव अधिकारी सूर्यनाथ पांडे को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का आदेश दिया था।

  • दोपहर की सुनवाई: दोपहर ढाई बजे मुख्य चुनाव अधिकारी वीसी के माध्यम से कोर्ट से जुड़े।
  • हाई कोर्ट का रुख: कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद माना कि आरक्षण नियमों की अनदेखी गंभीर विषय है।
  • नोटिस जारी: अदालत ने इस मामले में रीवा के जिला सत्र न्यायाधीश और एमपी स्टेट बार काउंसिल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

चुनाव प्रक्रिया को 'अवैध' घोषित करने की मांग

याचिकाकर्ता जतिंदर कौर ने कोर्ट से मांग की है कि रीवा जिला अधिवक्ता संघ की वर्तमान चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह से निरस्त कर दिया जाए। उनका तर्क है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट के 'महिला आरक्षण' वाले आदेश को लागू नहीं किया जाता, तब तक चुनाव कराना कानून का उल्लंघन होगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को तय की गई है।

आम जनता और वकीलों पर क्या होगा असर?

बार एसोसिएशन के चुनाव रुकने से वकीलों के बीच सरगर्मी बढ़ गई है। जिला अधिवक्ता संघ वकीलों की समस्याओं और कोर्ट के कामकाज के बीच एक सेतु का काम करता है। चुनाव टलने से संघ के नए पदाधिकारियों का चयन अब लटक गया है। साथ ही, यह फैसला प्रदेश के अन्य बार एसोसिएशनों के लिए भी एक नजीर बनेगा कि उन्हें महिलाओं के आरक्षण का सख्ती से पालन करना होगा।

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