रीवा में साइबर गैंग का भंडाफोड़: शिल्पी उपवन से 13 आरोपी गिरफ्तार, APK लिंक से ठगी
रीवा के शिल्पी उपवन क्षेत्र से 13 साइबर ठग गिरफ्तार। फर्जी लिंक और APK फाइल भेजकर ऑनलाइन ठगी करते थे, सूरत की 7 लाख की ठगी से जुड़े तार।
- रीवा के शिल्पी उपवन क्षेत्र से 13 साइबर आरोपी गिरफ्तार
- फर्जी लिंक और APK फाइल भेजकर करते थे ऑनलाइन ठगी
- गुजरात के सूरत में 7 लाख की ठगी से जुड़े तार
- मोबाइल, लैपटॉप, सिम कार्ड और बैंक दस्तावेज जब्त
रीवा में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी और संगठित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने शिल्पी उपवन क्षेत्र से 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी लिंक और APK फाइल भेजकर लोगों के बैंक खातों से रकम निकालने का काम करता था। मामले की कड़ियां गुजरात के सूरत में दर्ज सात लाख रुपए की ठगी से भी जुड़ती दिख रही हैं।
साइबर अलर्ट
अनजान लिंक या APK फाइल पर क्लिक करते ही आपके मोबाइल की निजी जानकारी हैक हो सकती है। पुलिस ने लोगों से डिजिटल सतर्कता बरतने की अपील की है।
सूरत की ठगी से जुड़ी जांच में मिला सुराग
थाना प्रभारी हितेंद्र नाथ शर्मा के अनुसार, गुजरात के सूरत में वर्ष 2025 में एक मामला दर्ज हुआ था, जिसमें APK फाइल के जरिए सात लाख रुपए की ठगी की गई थी। सूरत क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच कर रही थी। तकनीकी विश्लेषण में आरोपियों की लोकेशन रीवा मिली, जिसके आधार पर स्थानीय पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
कैसे काम करता था गिरोह
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से फर्जी लिंक भेजते थे। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल हो जाता था या यूजर से ओटीपी और बैंकिंग डिटेल हासिल कर ली जाती थी। इसके बाद खातों से रकम ट्रांसफर कर ली जाती थी। कई मामलों में पीड़ितों को देर से पता चलता था कि उनके खाते से पैसे निकल चुके हैं।
रीवा में भी कई लोग बने शिकार
प्रारंभिक पूछताछ में यह संकेत मिले हैं कि गिरोह केवल बाहरी राज्यों को नहीं बल्कि रीवा के लोगों को भी निशाना बना रहा था। साइबर सेल को पिछले कुछ महीनों में APK फाइल के जरिए ठगी की कई शिकायतें मिली थीं। पुलिस को उम्मीद है कि इन गिरफ्तारियों से पुराने मामलों का भी खुलासा हो सकता है।
शहर के शिल्पी उपवन से आरोपियों को गिरफ्तार करती समान थाना पुलिस
छापे में बरामद हुआ डिजिटल सामान
शिल्पी उपवन में की गई कार्रवाई के दौरान कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड और संदिग्ध बैंक दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जब्त उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। साइबर विशेषज्ञ डेटा रिकवरी और ट्रांजेक्शन ट्रेल की जांच कर रहे हैं ताकि नेटवर्क की पूरी संरचना सामने आ सके।
रीवा साइबर एक्शन अपडेट
- 13 आरोपी हिरासत में, पूछताछ जारी
- सूरत की 7 लाख की ठगी से जुड़े इनपुट
- कई डिजिटल डिवाइस और सिम कार्ड जब्त
- आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
सभी आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार अन्य राज्यों या अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े हैं। बैंक खातों की जानकारी, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स का विश्लेषण जारी है।
डिजिटल सुरक्षा पर पुलिस की अपील
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, मोबाइल में अज्ञात स्रोत से APK फाइल इंस्टॉल न करें और बैंकिंग ओटीपी या निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। साइबर अपराध की शिकायत तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज कराएं।
Join WhatsApp Channel Follow on Google Newsअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
APK फाइल से ठगी कैसे होती है?
फर्जी APK फाइल इंस्टॉल करने पर मोबाइल में मालवेयर आ सकता है, जिससे निजी जानकारी और बैंकिंग डिटेल हैक हो जाती है।
क्या इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से जुड़े हैं?
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि नेटवर्क अंतरराज्यीय हो सकता है। पुलिस गहराई से जांच कर रही है।
कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
शिल्पी उपवन क्षेत्र से 13 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
लोग खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी साझा न करें और केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें।
क्या पुराने मामलों का खुलासा हो सकता है?
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के बाद कई लंबित मामलों का खुलासा संभव है।