हादसे में गंभीर हुई प्रयागराज की किशोरी का रीवा में इलाज, मौत के मुंह से खींच लाए जीएमएच के डॉक्टर

प्रयागराज के नारीबारी की किशोरी का थ्रेशर से हाथ कट जाने की वजह से पूरे शरीर में इन्फेक्शन फ़ैल चुका था. जीएमच रीवा के डॉक्टरों ने जान बचाई.

Update: 2022-03-12 04:45 GMT

संजय गाँधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) रीवा

Rewa News in Hindi: यूपी के प्रयागराज से गंभीर हालत में इलाज के लिए रीवा आई 14 वर्षीय किशोरी की जान बचाने में श्यामशाह मेडिकल कॉलेज (SSMC) से सम्बद्ध गांधी स्मृति चिकित्सालय (जीएमएच) के चिकित्सक सफल रहे। थ्रेसर से हाथ कट जाने पर सही इलाज न होने की वजह से इंफेक्शन पूरे शरीर में फैल गया था। यह किशोरी सात दिन तक यहां भर्ती रही। जिसे पूरी तरह स्वस्थ होने पर अब अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।

ढाई माह पूर्व हुआ था हादसा

ढाई माह पूर्व यूपी के नारीबारी में थ्रेसर से हाथ कट जाने की वजह से इस किशोरी को प्रयागराज के अस्पताल में भर्ती किया गया था। जहां प्रारंभिक इलाज कर उसे छुट्टी दे दी गई थी। घर जाने के बाद तबियत फिर बिगड़ी और अस्पताल ले जाया गया। जहां से चिकित्सकों ने हालत गंभीर देख रेफर कर दिया। किशोरी को परिजन रीवा लेकर आ गए। 14 वर्षीय किशोरी राखी जब यहां पहुंची तो उस वक्त हालत काफी नाजुक थी। बाल्य एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश बजाज के दिशा निर्देश पर GMH में भर्ती कर किशोरी का इलाज शुरू किया गया। चूंकि राखी को सांस लेने में काफी कठिनाई हो रही थी। इसलिए उसे गंभीर इकाई (Critical Unit) में रखा गया।

दिल के आसपास भी जमा हो गया था मवाद

चिकित्सकों ने जांच में पाया कि किशोरी के दिल के आस पास मवाद जमा होने के अलावा कटे हुये हाथ में इन्फेक्शन की वजह से काफी मवाद जमा हो गया है। जिसका इंफेक्शन पूरे शरीर मे फैल चुका है। राखी को हार्ट फेलियर जैसे लक्षण आने लगे थ। सारे शरीर मे सूजन आ चुकी थी। चिकित्सक उसकी जान बचाने के लिए जुट गए। राखी के दिल के आसपास की जगह से 4 दिनों में करीब 2 लीटर फ्लूइड ड्रेन किया गया। उसके कटे हुए हाथ की लगातार मवाद निकलवाकर ड्रेसिंग की जाती रही और किसी भी दवा की कमी नहीं होने दी।

हर यूनिट ने किया अपना काम

इस किशोरी को स्वस्थ करने में हर यूनिट के चिकित्सकों का अहम रोल रहा। डॉ. करण जोशी की यूनिट में डॉ. मीना पटेल, डॉ. प्रभात सिंह बघेल की निगरानी में सीनियर रेसिडेंट डॉ. शशिकांत पाटीदार, डॉ. जयेन्द्र आर्य, डॉ. कामिनी, डॉ. चिया, डॉ. अभिषेक, डॉ. भाग्यश्री ने इलाज चालू रखा । हालत स्थिर होने के बाद उसे सीनियर कंसलटेंट डॉ. दीपक द्विवेदी की यूनिट में रखा गया। जहां जूनियर रेजिडेंट डॉ. आशीष गुप्ता, डॉ. गजेंद्र धाकड़ ने इलाज को जारी रखा और वह स्वस्थ होकर घर लौटी है।

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