पुरानी यादों का कारवां: 28 साल बाद जब फिर सजे बचपन के यार, एफएमएस रीवा के 'पुनर्मिलन 2.0' में भावुक हुए पूर्व छात्र

28 साल बाद FMS रीवा 1998 बैच का भव्य Reunion — खजुराहो में फिर जगा बचपन का साथ, दोस्ती, यादें और भावनाएं। Photos, Highlights और Latest Update पढ़ें।

Update: 2026-01-02 12:55 GMT

रीवा: समय का पहिया कितनी भी तेजी से घूमे, लेकिन बचपन की दोस्ती और स्कूल की गलियारों की यादें कभी धुंधली नहीं होतीं। इसका जीवंत उदाहरण देखने को मिला जब फ्रोमेंस मेमोरियल स्कूल (FMS), रीवा के 1998 बैच के छात्र-छात्राओं ने 28 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक-दूसरे का हाथ थामा। अवसर था 'पुनर्मिलन 2.0' का, जिसका आयोजन विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो में बेहद भव्यता के साथ किया गया।

देश-विदेश से खिंचे चले आए पुराने दोस्त

कहते हैं कि जड़ें कितनी भी दूर फैल जाएं, वे अपनी मिट्टी को नहीं भूलतीं। एफएमएस 98 बैच के पूर्व छात्र आज देश के विभिन्न कोनों और विदेशों में प्रतिष्ठित पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन जैसे ही 'पुनर्मिलन 2.0' का बिगुल बजा, सभी अपनी व्यस्त दिनचर्या छोड़कर खजुराहो पहुँच गए। 28 साल बाद जब दोस्तों ने एक-दूसरे को देखा, तो कोई गले लगकर रो पड़ा, तो कोई ठहाके मारकर पुरानी शरारतों को याद करने लगा। आँखों में चमक और चेहरों पर वही बचपन वाली मुस्कान लिए यह मिलन वाकई किसी उत्सव से कम नहीं था।




राष्ट्रगान से हुई गौरवमयी शुरुआत

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ राष्ट्रगान के साथ किया गया। स्कूल के अनुशासन और संस्कारों को याद करते हुए जब सभी पूर्व छात्रों ने एक साथ 'जन गण मन' गाया, तो पूरा परिसर देशभक्ति और गौरव की भावना से भर उठा। इसके बाद मंच पर शुरू हुआ यादों का वह सिलसिला, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

पुनर्मिलन के इस मंच पर उम्र का फासला जैसे मिट ही गया था। 40 की दहलीज पार कर चुके पूर्व छात्र फिर से वही किशोर बन गए थे। कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने चार चाँद लगा दिए। विशेष रूप से पूर्व छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए गए भंगड़ा ने सबका मन मोह लिया। ढोल की थाप पर थिरकते कदम और खिलखिलाते चेहरे देख ऐसा लग रहा था मानो वक्त ठहर गया हो। इसके अलावा छात्रों ने पुराने गीतों और डांस परफॉर्मेंस के जरिए अपनी कला का प्रदर्शन किया और विभिन्न मनोरंजक इवेंट्स में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।




भावुक कर देने वाले अनुभव साझा किए

जब 'अनुभव साझाकरण' (Experience Sharing) सत्र शुरू हुआ, तो माहौल काफी भावुक हो गया। मंच पर खड़े होकर जब पूर्व छात्रों ने 1998 के उस दौर की बातें कीं—जब मोबाइल फोन नहीं थे, जब स्कूल की कैंटीन ही सबसे बड़ा अड्डा हुआ करती थी और जब शिक्षकों की डांट में भी प्यार छिपा होता था—तो कई लोगों की आँखें नम हो गईं। किसी ने अपनी पहली सफलता का श्रेय स्कूल को दिया, तो किसी ने उन मुश्किल वक्तों को याद किया जब दोस्तों ने ही सहारा दिया था।

इन दिग्गजों की रही मौजूदगी

इस ऐतिहासिक रियूनियन मीट को सफल बनाने में निम्नलिखित पूर्व छात्रों की प्रमुख उपस्थिति रही: गौरव तिवारी, अमरजीत सिंह, मयंक गोयल, कपीश पाण्डेय, सतीश सिंह, प्रोमिल चन्द्र मित्रा, सचिन डुडानी, डॉली सिंह, रेनू अग्रवाल, खुशबू मेहता, कुलजीत कौर, प्रियंका सिंह, मृणाल निगम, आरती पाण्डेय, शिप्रा अग्रवाल, पूजा मिश्रा, अपूर्व त्रिपाठी, राहुल खण्डेलवाल, जीतिन पाण्डेय, सुनील आहुजा, प्रवाल बक्सी, अंकूर श्रीवास्तव, रविन्द्रनाथ शुक्ला, अभिजित शुक्ला, अमित गुप्ता, धीरेन्द्र गुप्ता, मितेश खरे, बलवीर सिंह और समीर खान।

मैत्री की नई शपथ के साथ विदाई

कार्यक्रम के समापन पर सभी ने एक-दूसरे को स्मृति चिह्न भेंट किए और यह संकल्प लिया कि भले ही भौतिक दूरियां कितनी भी हों, लेकिन मन की डोर हमेशा जुड़ी रहेगी। सोशल मीडिया के इस दौर में अब ये दोस्त 'पुनर्मिलन 3.0' की योजना बनाने में जुट गए हैं।

यह आयोजन केवल एक पार्टी नहीं थी, बल्कि यह उन रिश्तों का सम्मान था जो वक्त की मार और दूरियों के बावजूद आज भी जीवंत हैं। खजुराहो की वादियों ने इस दोस्ती के पुनर्जन्म का गवाह बनकर इसे और भी खास बना दिया।

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