दो दशक से ज्यादा समय तक एकता बनाए रखने के बाद विंध्य में सामने आने लगी भाजपा की गुटबाजी

कांग्रेस (Congress) की जिस गुटबाजी का फायदा उठाकर भाजपा (BJP) ने जिस तरह से पूरे विंध्य में अपनी पैठ जमाई थी अब खिसकने के आसार दिखाई देने लगे हैं.

Update: 2021-11-25 12:55 GMT

Rewa News in Hindi: रीवा। कांग्रेस (Congress) की जिस गुटबाजी का फायदा उठाकर भाजपा (BJP) ने जिस तरह से पूरे विंध्य में अपनी पैठ जमाई थी अब खिसकने के आसार दिखाई देने लगे हैं। लगभग दो दशक से भारतीय जनता पार्टी जनता के दिलो दिमाग में अपनी जगह बना रखी है लेकिन कुछ समय से पार्टी के अंदर ही अंदर गुटबाजी की खिचड़ी उबल रही है। जिसका एक उदाहरण अभी हाल में हुए रैगांव उपचुनाव से आप ले सकते हैं।

आपको बता दें कि प्रदेश में तीन विधानसभा उपचुनाव (MP By Election 2021) एवं एक लोकसभा का उपचुनाव हुआ जिसमें भाजपा ने लोकसभा सहित दो विधानसभा सीटों में जोरदार प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस से सीट छीन ली लेकिन रैगांव की अपनी ही सीट गवां दी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विंध्य में अब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

रैगांव से उदाहरण ले लीजिए

आप यह जान लीजिए कि रैगांव सिर्फ उदाहरण मात्र है। यही हाल पूरे विंध्य क्षेत्र का है। भाजपा की गुटबाजी अभी खुलकर बाहर तो नहीं दिख रही लेकिन अंदर ही अंदर उबाल है। गुटबाजी पर नजर दौड़ाएं तो सतना और रीवा का हाल लगभग एक ही जैसा है। सिर्फ अंतर इतना है कि रीवा की आठों विधानसभा सीटें भाजपा के कब्जे में है और सतना में 4-3 के बीच लड़ाई चल रही है।

गुटबाजी ने ही कांग्रेस को शून्य कर दिया

यदि सबक लेना चाहें तो ले सकते हैं। आपके सामने है। रीवा में गुटबाजी ने ही कांग्रेस को शून्य कर दिया है। जो बोलने के काबिल भी नहीं बची है। जिसका फायदा भाजपा का होशियार और चौकन्ना संगठन उठाता रहा और परिणाम हुआ कि भाजपा शिखर पर पहुंच गई। लेकिन अब ऐसा महसूस हो रहा है अब पार्टी के कर्ता-धर्ताओं को शिखर तक पहुंचने के बाद अकुलाहट होने लगी है और गुटबाजी के बीज उगना शुरू हो गए हैं। समय रहते यदि वरिष्ठ जनों का ध्यान नहीं गया तो फिर पछताना ही होगा।

कमजोर होती संगठन की पकड़

कुछ समय से ऐसा महसूस हो रहा है कि प्रदेश भाजपा संगठन की पकड़ कमजोर होती जा रही है। यही कारण है कि गुटबाजी पनप रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में ही विंध्य में भाजपा की हालत अच्छी नहीं कही जा रही थी लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लगातार कड़ी मेहनत करते हुए संभाल लिया गया और परिणाम अच्छे आये थे। अब एक बार फिर पार्टी के अंदर हालात बिगड़ रहे हैं जिसे समय रहते कंट्रोल करना उचित होगा।

कांग्रेस हो चुकी बे-दम

कांग्रेस की गुटबाजी चरम तक पहुंची और उसका पूरा-पूरा फायदा भाजपा ने उठाया था। जिस कारण वह सत्ता हथियाने तक सीमित नहीं रही बल्कि कांग्रेस का सफाया करने में भी कामयाब हो गई। लेकिन कांग्रेस में इतना भी दम नहीं है कि वह भाजपा की गुटबाजी का फायदा उठा सके। ऐसा लगता है कि कांग्रेस का दम निकल चुका है और वह बे-दम हो चुकी है। यही वजह है कि कांग्रेस अपने दम पर तो नहीं जीत सकती। उसके जीत का सिर्फ एक ही रास्ता है कि कहीं गुटबाजी अथवा कइयों की लड़ाई में मौके का फायदा मिल जाय और वह जीत का स्वाद चख ले, बाकी जीतने का दम नहीं रहा। इन बातों का कुछ न कुछ माजरा जिला पंचायत, जनपद पंचायत के चुनाव से सामने आ सकता है। लेकिन चुनाव होने का इंतजार करना होगा।

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