Mulayam Singh Yadav Story: मुलायम सिंह यादव की कारसेवकों पर गोली चलवाने की कहानी

Story of Mulayam Singh Yadav firing on Kar Sevaks: मुलायम सिंह हिन्दुओं के लिए कठोर हो गए थे.

Update: 2022-10-10 09:33 GMT

Story of Mulayam Singh Yadav firing on Kar Sevaks: 10 अक्टूबर 2022 के दिन समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की मौत हो गई. वह असल जिंदगी और राजनीति के पहलवान माने जाते थे. लेकिन अपने बेतुके बयान और कठोरता के लिए आज भी देश का एक तबका उनसे नफरत करता है. मुलायम सिंह यादव ने यूपी में बढ़ती रेप की घटनाओं को लेकर घटिया बयान दिया था. उन्होंने कहा था ''बच्चे हैं गलती हो जाती है'' खैर इस बयान से बहुत बखेड़ा खड़ा हुआ था लेकिन मुलायम सिंह ने मुख्य मंत्री रहते ऐसा पाप किया था जो हिन्दू कभी नहीं भूले और ना भूलेंगे। 

मुलायम सिंह की कारसेवकों पर गोली चलवाने की कहानी 


बात है 90 के दशक की, बाबरी मस्जिद विवाद चरम पर था. विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकता अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि के ऊपर बने विवादित बाबरी ढांचे को गिराने के लिए कारसेवा शुरू की थी. इसी बीच उत्तर प्रदेश का मुख्य मंत्री रहते मुलायम सिंह यादव ने कहा था ''बाबरी मस्जिद पर कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता'' यह बात उन्होंने बाबरी विध्वंस के दो साल पहले कही थी. 

कारसेवकों पर गोली चलाने की कहानी 


Story of firing on kar sevaks: श्री राम जी जी जन्मभूमि में मस्जिद को हिन्दू पिछले 500 साल से देखकर अंदर ही अंदर जल रहे थे. मुग़ल आक्रांता बाबर ने भगवान का मंदिर तोड़ जो मस्जिद बनाई थी उसे किसी तरह जमींदोज कर वो हासिल करना ही लक्ष्य था जो असल में हिन्दुओं का था. 

30 अक्टूबर 1990 की बात है. कारसेवकों और साधू-संतों की भीड़ हनुमानगढ़ी की तरफ बढ़ रही थी. मुख्य मंत्री यादव ने कर्फ्यू लगा दिया था बावजूद इसके अयोध्या में कारसेवकों की इतनी भीड़ हो गई कि पुलिस कुछ  कर नहीं पा रही थी. 

बाबरी को बचाने के लिए डेढ़ किलोमीटर पहले से फेंसिंग लग गई थीं. पुलिस कारसेवकों को पीछे हटाने के लिए लाठी भांज रही थी. लेकिन भीड़ रुकने वाली नहीं थी. बेरिकेटिंग तोड़कर कारसेवक बाबरी को तोड़ने के लिए आगे बढ़ चुके थे. 

मुलायम सिंह ने कहा गोली मार दो 

कारसेवकों को सिर्फ बाबरी दिखाई दे रही थी और इधर मुलायम सिंह को अपना मुस्लिम वोट बैंक। उन्होंने पुलिस को कारसेवकों पर गोलियां चलाने का आदेश जारी कर दिया। पुलिस ने मुख्य मंत्री का आर्डर मना और अंधाधुन्द फायरिंग शुरू हो गई. गोली लगने से कई कारसेवक मारे गए, भगदड़ मची तो उसमे भी कई लोग मौत के घाट उतर गए. मुलायम सिंह ने कितने कारसेवकों को मरवा डाला इसका सही आंकड़ा कभी पता ही नहीं चला 



दोबारा फिर गोलियां चलाई 

30 अक्टूबर को हुई फायरिंग सिर्फ इस हत्याकांड का पहला चैप्टर था. कारसेवकों पर हुई गोलीबारी के प्रतिशोध में 1 अक्टूबर को सभी का अंतिम संस्कार हुआ और अगले दिन 2 अक्टूबर को फिर से प्रतिरोध मोर्चा खोल दिया गया. उमा भारती, अशोक सिंघल जैसे नेता इस भीड़ की अगुवाई में थे. जैसे ही कारसेवकों की भीड़ हनुमान गढ़ी के पास लाल कोठी तक दाखिल हुई और मुलायम सिंह ने फिर से गोलियां चलाने का आदेश जारी किया। इस गोलीबारी में कई लोग मारे गए. इसी दौरान कोठारी बंधुओं की मौत हुई थी. और कारसेवा रद्द हो गई. 

मुलायम सिंह यह सब सत्ता में बने रहने के लिए कर रहे थे. बाबरी गिरती तो मुस्लिम नाराज होते और उन्हें वोट नहीं देते। लेकिन कांग्रेस ने इस नरसंहार के बाद अपना समर्थन वापस ले लिया और मुलायम सिंह की सरकार गिर गई. 


इस घटना के दो साल बाद 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी गिरा दी गई. अपने मुख्य मंत्री रहते मुलायम सिंह ने बाबरी को बचा लिया मगर अपनी छवि एंटी हिन्दू और मुस्लिमपरस्त बना ली. 


मुलायम सिंह यादव को कभी कारसेवकों पर गोली चलवाने का पछतावा नहीं हुआ. 2016 में उन्होंने अपने एक भाषण में कहा था. ''अगर मस्जिद गिरा दी जाती तो देश का मुसलमान सोचता कि हमारे धार्मिक स्थल नहीं रहेंगे तो इस देश की एकता के लिए वो खतरा होता। 16 जानें तो कम थीं 30 जानें जाती तो भी देश की एकता के लिए मैं अपना फैसला नहीं बदलता। 




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