जम्मू में सेना का वाहन 400 फीट गहरी खाई में गिरा: 10 जवान शहीद, 11 एयरलिफ्ट; डोडा में दिल दहला देने वाला हादसा

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सेना की गाड़ी 400 फीट गहरी खाई में गिर गई। हादसे में 10 जवानों की मौत हो गई, 11 घायल सैनिकों को एयरलिफ्ट किया गया। जानिए पूरी घटना, कारण, रेस्क्यू ऑपरेशन और नेताओं की प्रतिक्रियाएं।

Update: 2026-01-22 13:47 GMT
  • जम्मू-कश्मीर के डोडा में सेना का वाहन 400 फीट गहरी खाई में गिरा
  • हादसे में 10 जवान शहीद, 11 घायल सैनिकों को एयरलिफ्ट किया गया
  • घायलों को उधमपुर मिलिट्री हॉस्पिटल भेजा गया
  • भद्रवाह–चंबा इंटरस्टेट रोड पर खन्नी टॉप के पास हुआ हादसा

Jammu Doda Army Accident – डोडा में कैसे हुआ यह भयावह हादसा?

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से गुरुवार सुबह एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। भारतीय सेना का एक वाहन, जिसमें कुल 21 जवान सवार थे, भद्रवाह–चंबा इंटरस्टेट रोड पर खन्नी टॉप के पास अचानक 400 फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस दर्दनाक दुर्घटना में 10 जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए।

सेना के अधिकारियों के अनुसार, यह वाहन डोडा से ऊपरी पोस्ट की ओर जा रहा था। पहाड़ी और संकरी सड़क पर अचानक चालक का नियंत्रण वाहन से हट गया और गाड़ी सीधे गहरी खाई में समा गई। हादसे की जानकारी मिलते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

Rescue Operation – कैसे चला बचाव अभियान?

भारतीय सेना, स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत बल ने तुरंत संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। दुर्गम पहाड़ी इलाके और गहरी खाई के कारण राहत कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। कई जवानों को रस्सियों और स्ट्रेचर की मदद से बाहर निकाला गया।

गंभीर रूप से घायल 11 सैनिकों को हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर उधमपुर मिलिट्री हॉस्पिटल पहुंचाया गया। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अभियान की निगरानी की और घायलों को हरसंभव चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

Possible Causes – हादसे की संभावित वजहें क्या रहीं?

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस भद्रवाह–चंबा रोड पर यह हादसा हुआ, वह इलाका अत्यंत संकरी, घुमावदार और खड़ी ढलानों से भरा है। खन्नी टॉप के पास सड़क पर सुरक्षा रेलिंग बेहद सीमित है। ऐसे इलाकों में थोड़ी सी चूक भी घातक दुर्घटना में बदल जाती है।

सेना के सूत्रों के मुताबिक, हादसे के वक्त सड़क पर फिसलन भी थी। पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलना आम बात है। हल्की नमी, धूल या कंकड़ भी भारी वाहन के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। माना जा रहा है कि ड्राइवर का संतुलन बिगड़ते ही वाहन सीधे खाई में चला गया

Martyrdom – शहीद हुए जवानों को देश की श्रद्धांजलि

इस हादसे में शहीद हुए 10 जवान देश की सीमाओं की सुरक्षा में डटे हुए थे। सेना ने फिलहाल उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि परिजनों को तत्काल सूचित किया जा रहा है और पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।

देशभर में इस खबर के बाद शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर लोग शहीद जवानों को सलाम कर रहे हैं और उनके परिवारों के प्रति संवेदना जता रहे हैं।

श्रद्धांजलि समाचार अपडेट

"डोडा में एक दुखद सड़क हादसे में हमारे 10 बहादुर भारतीय सेना के जवानों की जान जाने से बहुत दुख हुआ। हम अपने बहादुर सैनिकों की बेहतरीन सेवा और सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखेंगे।"

— मनोज सिन्हा

उपराज्यपाल, जम्मू-कश्मीर

शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा, “डोडा में हुए इस दर्दनाक हादसे से मैं अत्यंत दुखी हूं। देश शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ा है। घायलों को सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।”

Leaders React – हादसे पर नेताओं की प्रतिक्रियाएं

बड़ी खबर नई दिल्ली

"यह हादसा अत्यंत पीड़ादायक है। मेरी संवेदनाएं शहीद जवानों के परिजनों के साथ हैं।"

अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री, भारत

घायलों के शीघ्र स्वस्थ होनेकी कामना की।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह हादसा अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने शहीद जवानों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

बड़ा बयान रक्षा मंत्रालय | भारत सरकार
"

देश ने अपने बहादुर सपूत खोए हैं। घायलों को हरसंभव चिकित्सा सुविधा दी जा रही है।

"

राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री, भारत सरकार

सेना पूरी संवेदनशीलता के साथ परिवारों के संपर्क में है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश ने अपने बहादुर सपूत खोए हैं। घायलों को हरसंभव चिकित्सा सुविधा दी जा रही है और सेना पूरी संवेदनशीलता के साथ परिवारों के संपर्क में है।

Why This Matters – पहाड़ी इलाकों में सेना की चुनौतीपूर्ण ड्यूटी

डोडा, किश्तवाड़ और भद्रवाह जैसे क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। यहां तैनात जवानों को न केवल आतंकवाद से जूझना पड़ता है, बल्कि भौगोलिक परिस्थितियां भी लगातार खतरा बनी रहती हैं। संकरी सड़कें, गहरी खाइयां और बदलता मौसम हर सफर को जोखिम भरा बना देता है।

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