कोहली-रोहित को B ग्रेड में डिमोट करने की तैयारी: BCCI बदल सकता है सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम, A+ ग्रेड हो सकता है खत्म
BCCI अपने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। बोर्ड A+ ग्रेड को खत्म कर सकता है और विराट कोहली व रोहित शर्मा को B ग्रेड में डिमोट किया जा सकता है। नया मॉडल खिलाड़ियों की तीनों फॉर्मेट में भागीदारी पर आधारित होगा।
🔥 Highlights
- BCCI सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव करने जा रहा है।
- A+ ग्रेड को खत्म करने का प्रस्ताव, सिर्फ A, B और C ग्रेड रहेंगे।
- विराट कोहली और रोहित शर्मा को B ग्रेड में भेजा जा सकता है।
- नई नीति में तीनों फॉर्मेट खेलने वालों को प्राथमिकता मिलेगी।
- फैसला अगली Apex Council Meeting में लिया जाएगा।
BCCI क्यों बदल रहा है सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम?
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अपने सालाना सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी कर रहा है। बोर्ड के भीतर यह महसूस किया जा रहा है कि मौजूदा सिस्टम खिलाड़ियों की वास्तविक भागीदारी और योगदान को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता। खासकर उन खिलाड़ियों के लिए जो केवल एक फॉर्मेट में खेल रहे हैं, जबकि कुछ खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट – टेस्ट, वनडे और टी-20 – में लगातार भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इसी सोच के तहत चयन समिति ने सुझाव दिया है कि मौजूदा चार-स्तरीय ढांचे – A+ (₹7 करोड़), A (₹5 करोड़), B (₹3 करोड़) और C (₹1 करोड़) – को बदलकर केवल तीन कैटेगरी रखी जाएं: A, B और C। इसका मतलब है कि A+ ग्रेड पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
कोहली-रोहित पर क्यों गिर सकती है गाज?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह नया मॉडल लागू होता है तो विराट कोहली और रोहित शर्मा को सीधे तौर पर असर झेलना पड़ सकता है। दोनों दिग्गज बल्लेबाज अब टेस्ट और टी-20 क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और केवल वनडे फॉर्मेट में खेल रहे हैं।
नई नीति में BCCI उन खिलाड़ियों को शीर्ष ग्रेड में रखने की योजना बना रहा है जो तीनों फॉर्मेट में नियमित रूप से भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में केवल एक फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ियों को A या B ग्रेड तक सीमित किया जा सकता है। इसी आधार पर कोहली और रोहित को B ग्रेड में शिफ्ट किए जाने की चर्चा तेज हो गई है।
पहले भी हो चुका है ऐसा – धोनी का उदाहरण
यह पहली बार नहीं होगा जब किसी महान खिलाड़ी को फॉर्मेट सीमित होने की वजह से टॉप ग्रेड से हटाया जाएगा। एमएस धोनी ने 2014 में टेस्ट क्रिकेट छोड़ दिया था। इसके बावजूद वे 2018-19 के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में A+ ग्रेड में बने रहे।
लेकिन 2019-20 साइकिल में उन्हें A ग्रेड में डाल दिया गया। अगस्त 2020 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद धोनी का नाम कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट से हटा दिया गया। बोर्ड का तर्क था कि सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का मकसद सक्रिय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना है।
नया कॉन्ट्रैक्ट मॉडल कैसा हो सकता है?
BCCI जिस नए मॉडल पर विचार कर रहा है, उसमें खिलाड़ियों को तीनों फॉर्मेट – टेस्ट, वनडे और टी-20 में भागीदारी के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी। मतलब साफ है – जो खिलाड़ी भारत के लिए हर मोर्चे पर उतर रहे हैं, उन्हें ही सबसे ऊंचे ग्रेड में रखा जाएगा।
प्रस्ताव के मुताबिक, A+ ग्रेड खत्म कर दिया जाएगा और केवल तीन श्रेणियां रहेंगी – A, B और C। संभावित ढांचा कुछ ऐसा हो सकता है:
A ग्रेड – तीनों फॉर्मेट खेलने वाले स्टार खिलाड़ी
B ग्रेड – दो फॉर्मेट या सीमित उपलब्धता वाले सीनियर खिलाड़ी
C ग्रेड – उभरते या सीमित मैच खेलने वाले खिलाड़ी
2024-25 में किस ग्रेड में थे कौन?
पिछले सत्र (2024-25) की सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट में रोहित शर्मा, विराट कोहली, रवींद्र जडेजा और जसप्रीत बुमराह को A+ ग्रेड में रखा गया था। ग्रेड A में शुभमन गिल, केएल राहुल, हार्दिक पंड्या, मोहम्मद शमी, ऋषभ पंत और मोहम्मद सिराज जैसे खिलाड़ी थे।
ग्रेड B में सूर्यकुमार यादव, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, यशस्वी जायसवाल, श्रेयस अय्यर शामिल थे, जबकि ग्रेड C में रिंकू सिंह, संजू सैमसन, अर्शदीप सिंह, तिलक वर्मा जैसे युवा खिलाड़ी रखे गए थे।
महिला क्रिकेट में पहले से लागू है यह मॉडल
दिलचस्प बात यह है कि महिला क्रिकेट में BCCI पहले से ही तीन ग्रेड – A, B और C – का सिस्टम लागू कर चुका है। ग्रेड A में हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना और दीप्ति शर्मा हैं, जिन्हें सालाना ₹50 लाख मिलते हैं।
ग्रेड B की खिलाड़ियों को ₹30 लाख और ग्रेड C को ₹10 लाख दिए जाते हैं। पुरुष क्रिकेट में भी इसी तर्ज पर एक सरल और प्रदर्शन-आधारित ढांचा बनाने की तैयारी है।
क्या यह कोहली-रोहित के करियर पर असर डालेगा?
ग्रेड बदलने का मतलब यह नहीं कि कोहली और रोहित की अहमियत कम हो जाएगी। दोनों अब भी भारत के सबसे बड़े मैच-विनर हैं। लेकिन बोर्ड यह संकेत देना चाहता है कि भविष्य में टीम की रीढ़ वही खिलाड़ी होंगे जो हर फॉर्मेट में उपलब्ध रहेंगे।
यह कदम युवा खिलाड़ियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है – अगर आपको शीर्ष ग्रेड चाहिए, तो आपको हर फॉर्मेट में खुद को साबित करना होगा।
विराट कोहली बने ‘सेंचुरी किंग’
भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार विराट कोहली ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ इंदौर में खेले गए तीसरे वनडे मुकाबले में कोहली ने अपना 7वां ODI शतक जड़ते हुए ऐसा रिकॉर्ड बना दिया, जो अब तक किसी भी बल्लेबाज के नाम नहीं था। इस पारी के साथ ही वह न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे और इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।
होलकर स्टेडियम में खेले जा रहे इस मुकाबले में कोहली ने महज 89 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। यह उनका न्यूजीलैंड के खिलाफ कई सालों बाद आया शतक था। इससे पहले उन्होंने नवंबर 2023 में वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में 117 रन बनाए थे, जहां उन्होंने सचिन तेंदुलकर का सबसे ज्यादा ODI शतकों का रिकॉर्ड भी तोड़ा था।
Record Breaker | सचिन-पोंटिंग भी पीछे
इस शतक के साथ विराट कोहली ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड रिकी पोंटिंग और वीरेंद्र सहवाग के नाम था, जिनके नाम 6-6 शतक दर्ज थे। कोहली अब इस सूची में सबसे ऊपर पहुंच चुके हैं।
सिर्फ ODI ही नहीं, बल्कि टेस्ट + ODI + T20I यानी इंटरनेशनल क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट मिलाकर भी कोहली अब न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। यह उपलब्धि उन्हें जैक्स कैलिस, जो रूट और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गजों से भी आगे खड़ा करती है।
Why This Century Matters | क्यों खास है यह शतक?
यह शतक केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि विराट कोहली की निरंतरता, फिटनेस और मानसिक मजबूती का प्रतीक है। 37 वर्ष की उम्र में भी जिस तरह से वह विश्व स्तरीय गेंदबाजों के खिलाफ रन बना रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। इंदौर की यह पारी दिखाती है कि क्यों कोहली को आधुनिक युग का सबसे बड़ा बल्लेबाज माना जाता है।
यह शतक ऐसे समय में आया, जब भारतीय पारी दबाव में थी। टॉप ऑर्डर के जल्दी आउट होने के बाद कोहली ने एक छोर संभाला और रन गति बनाए रखी। यही वजह है कि यह पारी सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि टीम के लिए भी बेहद अहम साबित हुई।
ODI Records vs New Zealand | वनडे में कीवी टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा शतक
विराट कोहली अब न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। उन्होंने इस मामले में रिकी पोंटिंग और वीरेंद्र सहवाग जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है।
International Cricket Records | तीनों फॉर्मेट मिलाकर भी नंबर-1
टेस्ट, वनडे और टी20—तीनों फॉर्मेट मिलाकर भी विराट कोहली न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। उनके नाम अब कुल 10 इंटरनेशनल शतक दर्ज हैं।
Overall ODI Dominance | वनडे क्रिकेट के बेताज बादशाह
इस शतक के साथ कोहली के नाम अब वनडे में कुल 54 शतक हो चुके हैं। वह इस सूची में पहले ही नंबर पर मौजूद हैं और लगातार अपने ही रिकॉर्ड को बेहतर बना रहे हैं।
वनडे क्रिकेट में सर्वाधिक शतक लगाने वाले बल्लेबाज (All-Time Record)
| खिलाड़ी का नाम | देश | मैच (पारी) | कुल रन | शतक (100s) |
|---|---|---|---|---|
| Virat Kohli | 🇮🇳 भारत (India) | 311* | 14,776+ | 54* |
| Sachin Tendulkar | 🇮🇳 भारत (India) | 463 | 18,426 | 49 |
| Rohit Sharma | 🇮🇳 भारत (India) | 282* | 11,577+ | 33* |
| Ricky Ponting | 🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया (AUS) | 375 | 13,704 | 30 |
| Sanath Jayasuriya | 🇱🇰 श्रीलका (SL) | 445 | 13,430 | 28 |
रिकॉर्ड्स और फैक्ट्स:
- विराट कोहली ने 18 जनवरी 2026 को इंदौर में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ अपना 54वां शतक लगाकर विश्व रिकॉर्ड को और मजबूत किया।
- टॉप 3 बल्लेबाजों में तीनों खिलाड़ी भारतीय हैं, जो वनडे क्रिकेट में भारत के दबदबे को दर्शाता है।
- (*) वर्तमान में सक्रिय (Active) खिलाड़ियों को दर्शाता है।
FAQs
क्या कोहली और रोहित को सच में डिमोट किया जाएगा?
फिलहाल यह एक प्रस्ताव है। अंतिम फैसला BCCI की अगली Apex Council Meeting में होगा। अगर नया मॉडल पास हुआ, तो डिमोशन संभव है।
A+ ग्रेड क्यों हटाया जा रहा है?
BCCI का मानना है कि चार ग्रेड का ढांचा जटिल है। वह एक सरल और प्रदर्शन-आधारित सिस्टम चाहता है, जिसमें तीनों फॉर्मेट खेलने वालों को प्राथमिकता मिले।
इससे युवा खिलाड़ियों को क्या फायदा होगा?
युवा खिलाड़ियों को यह संदेश मिलेगा कि अगर वे लगातार तीनों फॉर्मेट में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो वे जल्दी टॉप ग्रेड तक पहुंच सकते हैं।
क्या सैलरी भी बदलेगी?
संभावना है कि ग्रेड के साथ सैलरी स्ट्रक्चर में भी बदलाव किया जाए, ताकि नए मॉडल को संतुलित बनाया जा सके।