US को सबसे बड़ा झटका देने की तैयारी में भारत, गणतंत्र दिवस पर EU के साथ फ्री ट्रेड डील तय! ट्रम्प टैरिफ का करारा जवाब
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट गणतंत्र दिवस के आसपास घोषित हो सकता है। EU चीफ उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया। यह समझौता 200 करोड़ लोगों का बाजार खोलेगा और ट्रम्प की टैरिफ नीति का वैश्विक जवाब बनेगा।
- 🇮🇳 भारत–EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट गणतंत्र दिवस के आसपास घोषित हो सकता है।
- 🌍 यह डील 200 करोड़ लोगों का संयुक्त बाजार बनाएगी, जो वैश्विक GDP का 25% होगा।
- 💬 EU चीफ उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “Mother of All Deals” कहा।
- ⚡ ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी के बीच यह समझौता ग्लोबल ट्रेड का नया संतुलन बनाएगा।
- 📈 भारत-EU व्यापार $137 बिलियन से दोगुना होने की उम्मीद।
India–EU Mega Trade Deal
दुनिया की आर्थिक और भू-राजनीतिक दिशा बदलने वाली एक बड़ी घोषणा जल्द ही होने जा रही है। भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित Free Trade Agreement (FTA) गणतंत्र दिवस के आसपास फाइनल हो सकता है। खुद यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “Mother of All Deals” करार दिया है। यह समझौता न केवल व्यापार की नई परिभाषा गढ़ेगा, बल्कि डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीति के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था को नया संतुलन देगा।
यह डील ऐसे समय सामने आ रही है, जब दुनिया ट्रेड वॉर, टैरिफ बैरियर और सप्लाई चेन संकट से जूझ रही है। अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीति ने यूरोप और एशिया दोनों को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत–EU साझेदारी एक वैकल्पिक आर्थिक धुरी (Alternative Economic Axis) के रूप में उभर रही है।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी के बीच भारत दौरे पर रहेंगी। इसी दौरान होने वाले India–EU Summit में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की जा सकती है। यह डील 200 करोड़ उपभोक्ताओं का साझा बाजार तैयार करेगी, जो वैश्विक GDP के लगभग 25% का प्रतिनिधित्व करेगा।
वर्तमान में भारत और EU के बीच सालाना व्यापार करीब $137 बिलियन का है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते के बाद यह आंकड़ा अगले कुछ वर्षों में दोगुना हो सकता है। इससे भारतीय MSME सेक्टर, स्टार्टअप इकोसिस्टम, आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को अभूतपूर्व गति मिलेगी।
ट्रम्प टैरिफ के बीच क्यों अहम है भारत–EU डील?
डोनाल्ड ट्रम्प की “अमेरिका फर्स्ट” नीति ने दुनिया के ट्रेड मैप को हिला दिया है। अमेरिका ने यूरोप, चीन और कई एशियाई देशों पर हाई टैरिफ लगाकर सप्लाई चेन में अनिश्चितता पैदा कर दी। इस माहौल में भारत–EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों पक्षों के लिए एक स्ट्रैटेजिक शील्ड बन सकता है। यह समझौता अमेरिका पर निर्भरता कम करेगा और एक नया, स्थिर ट्रेड ब्लॉक तैयार करेगा।
EU के लिए भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है, जबकि भारत के लिए यूरोप हाई-वैल्यू टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा स्रोत है। यह डील दोनों को टैरिफ वॉर से बाहर निकालकर साझेदारी के नए युग में ले जाएगी।
भारत को क्या-क्या मिलेगा इस मेगा डील से?
इस समझौते से भारत के टेक्सटाइल, आईटी सर्विसेज, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स और स्टार्टअप सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा। यूरोपीय बाजार में भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ घटेंगे या खत्म होंगे, जिससे भारतीय कंपनियां कम लागत में अपने प्रोडक्ट बेच सकेंगी।
इसके साथ ही यूरोप से ग्रीन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल सिस्टम, हाइड्रोजन एनर्जी और हेल्थकेयर इनोवेशन भारत में तेजी से आएंगे। इससे न सिर्फ निवेश बढ़ेगा, बल्कि लाखों नए रोजगार भी पैदा होंगे।
EU के लिए भारत क्यों बन रहा है सबसे बड़ा दांव?
यूरोप को चीन पर अपनी निर्भरता कम करनी है। कोविड और ट्रेड वॉर के बाद EU अब चीन+1 रणनीति पर काम कर रहा है। इस रणनीति में भारत सबसे मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। भारत की युवा आबादी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टेबल डेमोक्रेसी यूरोप को दीर्घकालिक भरोसा देती है।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन का “First-Mover Advantage” वाला बयान यही दर्शाता है कि EU भारत के साथ सबसे पहले गहरा आर्थिक रिश्ता बनाकर ग्लोबल रेस में आगे निकलना चाहता है।
19 साल की बातचीत, अब जाकर मिलेगा अंजाम
भारत–EU FTA की शुरुआत 2007 में हुई थी। लेकिन नियमों, डेटा प्रोटेक्शन, कृषि बाजार और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर मतभेद के कारण 2013 में बातचीत रुक गई। 2022 में फिर से वार्ता शुरू हुई और अब करीब 19 साल बाद यह समझौता अपने अंतिम पड़ाव पर है।
यह केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय है, जिसमें डिफेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंडो-पैसिफिक स्थिरता जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे।
FAQ – भारत–EU ट्रेड डील
भारत–EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कब लागू होगा?
इसकी औपचारिक घोषणा 27 जनवरी के आसपास हो सकती है। इसके बाद दोनों पक्षों की संसदों से मंजूरी मिलने पर इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
इस डील से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
यूरोप से आने वाले कई प्रोडक्ट सस्ते होंगे और भारतीय कंपनियों को नया बाजार मिलेगा। इससे रोजगार बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
क्या यह समझौता ट्रम्प की टैरिफ नीति को कमजोर करेगा?
हाँ, यह डील अमेरिका-केंद्रित ट्रेड सिस्टम से बाहर निकलकर भारत और EU को स्वतंत्र आर्थिक ताकत के रूप में स्थापित करेगी।