BMC Elections 2026: 30 साल बाद मुंबई में ठाकरे परिवार सत्ता से बाहर, पहली बार BJP का मेयर; BMC में बदले सत्ता के मायने
मुंबई नगर निगम चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ है। 30 साल बाद ठाकरे परिवार सत्ता से बाहर है और पहली बार BJP का मेयर बनने की राह साफ हुई है। जानिए पूरा गणित, इतिहास और मेयर की शक्तियां।
- 🗳️ BMC की 227 सीटों में BJP गठबंधन को 118 पर बढ़त
- 🏛️ पहली बार मुंबई में BJP का मेयर बनने की संभावना
- ⏳ 4 साल से खाली पड़ा था मेयर का पद
- 📉 30 साल बाद ठाकरे परिवार सत्ता से बाहर
मुंबई की सियासत में एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी BMC चुनाव के नतीजों ने 30 साल पुराने सत्ता समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। जिस मुंबई पर दशकों तक ठाकरे परिवार और शिवसेना का दबदबा रहा, वहां अब पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मेयर बनने की राह साफ होती दिख रही है। 227 सीटों वाली इस देश की सबसे अमीर नगर निकाय में BJP गठबंधन को 118 सीटों पर बढ़त मिल चुकी है। इनमें से BJP अकेले 90 सीटों पर आगे है, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) 28 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
मुंबई का बदला इतिहास | A Turning Point in Mumbai’s Political History
आजादी के बाद से लेकर अब तक मुंबई नगर निगम पर या तो कांग्रेस का कब्जा रहा या फिर शिवसेना का। 1947 से 1967 तक लगातार 20 वर्षों तक कांग्रेस के मेयर रहे। इसके बाद 1992 से 2022 तक पूरे 30 सालों तक शिवसेना का दबदबा कायम रहा। यही वह दौर था, जब ठाकरे परिवार की पकड़ मुंबई पर मजबूत होती चली गई। अब पहली बार ऐसा हुआ है, जब ठाकरे परिवार सत्ता से बाहर होता नजर आ रहा है और BJP इतिहास रचने के करीब पहुंच गई है।
BJP का 45 साल का सफर और पहली बड़ी उपलब्धि
भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 1980 में हुई थी। बीते 45 वर्षों में पार्टी ने देशभर में सत्ता के कई शिखर छुए, लेकिन मुंबई जैसे आर्थिक राजधानी शहर में अब तक मेयर पद नहीं जीत पाई थी। 1992 से 2017 तक BJP, शिवसेना की सहयोगी रही और मेयर पद शिवसेना के पास ही रहा। अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। BMC चुनाव में मिली बढ़त ने BJP को पहली बार मुंबई में अपना मेयर बनाने की स्थिति में ला खड़ा किया है। यह सिर्फ नगर निगम का चुनाव नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन बदलने वाला क्षण माना जा रहा है।
चार साल से खाली था मेयर का पद
मुंबई की आखिरी मेयर शिवसेना की किशोरी पेडनेकर थीं, जिन्होंने 22 नवंबर 2019 से 8 मार्च 2022 तक यह पद संभाला। उस समय शिवसेना में विभाजन नहीं हुआ था। मार्च 2022 के बाद से BMC में कोई निर्वाचित मेयर नहीं रहा। बीते चार सालों से नगर निगम का प्रशासन नगर आयुक्त के हाथों में है। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी में कई बड़े फैसले प्रशासनिक स्तर पर ही होते रहे। अब चुनाव के बाद फिर से लोकतांत्रिक ढांचा बहाल होने जा रहा है।
कैसे होता है मुंबई के मेयर का चुनाव?
BMC में मुंबई के अलग-अलग वार्डों से चुनकर कुल 227 पार्षद आते हैं, जिन्हें नगर सेवक या कॉरपोरेटर कहा जाता है। नगर निकाय चुनाव में जीतकर आने वाले यही पार्षद अपने बीच से मेयर का चुनाव करते हैं। जिस पार्टी या गठबंधन के पास बहुमत होता है, उसी की उम्मीदवार मेयर बनने की सबसे बड़ी दावेदार होती है। मेयर का कार्यकाल 2.5 साल का होता है, जबकि पार्षद 5 साल के लिए चुने जाते हैं। एक मेयर का कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरा मेयर चुना जाता है।
मेयर के पास कितनी शक्ति होती है?
BMC में दो सबसे बड़े पद होते हैं— मेयर और नगर आयुक्त (कमिश्नर)। मेयर नगर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, प्रस्तावों और बहसों को दिशा देते हैं और शहर का औपचारिक प्रतिनिधित्व करते हैं। वे मुंबई का चेहरा माने जाते हैं। हालांकि असली प्रशासनिक शक्ति नगर आयुक्त के पास होती है। शहर का रोजमर्रा का प्रशासन, बजट, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और कर्मचारियों का नियंत्रण आयुक्त के हाथ में रहता है। आयुक्त आम तौर पर IAS अधिकारी होते हैं।
सत्ता परिवर्तन के क्या मायने हैं?
BMC का सालाना बजट कई राज्यों से भी बड़ा होता है। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और यहां होने वाले फैसलों का असर पूरे महाराष्ट्र और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। अगर पहली बार BJP का मेयर बनता है, तो यह केवल एक राजनीतिक जीत नहीं होगी, बल्कि शहरी शासन के मॉडल में भी बदलाव का संकेत होगा। यह बदलाव आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर भी गहरा असर डाल सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मुंबई जैसे शहर में पकड़ मजबूत होना किसी भी पार्टी के लिए रणनीतिक बढ़त है।
क्या मुंबई में सच में पहली बार BJP का मेयर बनेगा?
अगर मौजूदा रुझान नतीजों में बदलते हैं और BJP गठबंधन बहुमत बनाए रखता है, तो यह इतिहास में पहली बार होगा जब मुंबई का मेयर BJP से होगा।
ठाकरे परिवार के लिए इसका क्या मतलब है?
यह ठाकरे परिवार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। 30 साल बाद मुंबई से सत्ता का खिसकना शिवसेना के आधार को कमजोर कर सकता है।
क्या इससे मुंबई की नीतियों में बदलाव आएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन से विकास प्राथमिकताओं, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और प्रशासनिक फैसलों की दिशा बदल सकती है।
मेयर का असली रोल कितना प्रभावी है?
मेयर औपचारिक रूप से शहर का प्रतिनिधित्व करते हैं और नीतिगत बहसों को दिशा देते हैं, जबकि असली प्रशासनिक शक्ति नगर आयुक्त के पास रहती है।