अध्यात्म

Chankya Niti In Hindi : इन लोगों के सामने कभी नहीं बयां करना चाहिए अपनी मन की पीड़ा, हमेशा रहे सतर्क

Aaryan Dwivedi
25 Feb 2021 2:42 PM GMT
Chankya Niti In Hindi : इन लोगों के सामने कभी नहीं बयां करना चाहिए अपनी मन की पीड़ा, हमेशा रहे सतर्क
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Chankya Niti In Hindi : आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में जीवन को सफल बनाने के लिए हर चीजों को विस्तार से बताया हैं। ऐसे ही आचार्य ने इन लोगों पर कभी भरोसा न करने की बात भी कही हैं। आचार्य कहते है कि इन लोगों पर भूलवश भी कभी भरोसा नहीं करना चाहिए

Chankya Niti In Hindi : आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में जीवन को सफल बनाने के लिए हर चीजों को विस्तार से बताया हैं। ऐसे ही आचार्य ने इन लोगों पर कभी भरोसा न करने की बात भी कही हैं। आचार्य कहते है कि इन लोगों पर भूलवश भी कभी भरोसा नहीं करना चाहिए और न ही कभी अपने दुख-दर्द इनसे शेयर करना चाहिए। तो चलिए जानते हैं किन लोगों से सचेत रहने की बात आचार्य ने अपने नीति शास्त्र में बताई है।

धरती में भांति-भांति प्रकार के लोग वास करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि मनुष्य उस इंसान का साथ करें जो सज्जन हो, परोपकारी हो। जो जरूरत पड़ने पर उसके साथ खड़ा हो। न की ऐसे व्यक्ति का जो हर पल दुख देता हो। जीवन के सफर में मनुष्य का कई बार ऐसे लोगों से मुलाकात हो जाती है जो बेहद ही चालक किस्म के लोग होते हैं। जो मतलबी होते हैं। ऐसे इंसान चाणक्य के अनुसार दुख देने वाले होते हैं। लिहाजा इन्हें कभी अपना मित्र नहीं बनाना चाहिए। इनसे हमेशा सतर्क रहना चाहिए। इन पर भूलवश भी भरोसा नहीं करना चाहिए और न ही कभी इनसे अपना दुख-दर्द शेयर करना चाहिए। क्योंकि ऐसे इंसान मौका मिलते ही नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। तो चलिए जानते चाणक्य ने किन लोगों से दुख व्यक्त न करने की बात कही है।

आचार्य चाणक्य अपने इस श्लोक के माध्यम से बताते है कि इन प्रकार के लोगों के सामने अपना दुख कभी नहीं व्यक्त करना चाहिए। क्योंकि यह कभी किसी की पीड़ा नहीं समझते है। चाणक्य की माने तो राजा, चोर, वैश्या, यमराज, बालक एवं याचक पर किसी के दुख का कोई असर नहीं होता है। साथ ही आचार्य कहते है कि ग्रामीण लोगों को परेशान करने वाला व्यक्ति भी कभी किसी के दुख को नहीं समझता है। इनका सामना होने पर इंसान को समझदारी से काम लेना चाहिए। ये लोग कभी दूसरे को दुख को समझते हैं।

आचार्य कहते है कि जिस तरह से सांप का विष उसके दांत में होता है, बिच्छु का विष उसके पूंछ में होता है। उसी तरह दुर्जन मनुष्य के अंग-अंग में विष भरा होता है। विषैले जीव पर जब प्राण का संकट मंडराता है तभी वह वाॅर करता है। लेकिन दुर्जन यानी कि दुष्ट व्यक्ति हमेशा डंक मारता रहता हैं। इसलिए जितना जल्दी हो सके ऐसे व्यक्ति से दूरी बनाने में ही भलाई है।

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