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हमने मरीजों को Coronil नहीं, Immunity Booster के रूप में अश्वगंधा, गिलोय और तुलसी दिया था, रामदेव जानें! कैसे बनाई दवा - NIMS डायरेक्टर

Aaryan Dwivedi
16 Feb 2021 6:24 AM GMT
हमने मरीजों को Coronil नहीं, Immunity Booster के रूप में अश्वगंधा, गिलोय और तुलसी दिया था, रामदेव जानें! कैसे बनाई दवा - NIMS डायरेक्टर
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Immunity Booster के रूप में अश्वगंधा, गिलोय और तुलसी दिया गया था. मैं नहीं जानता कि बाबा रामदेव ने इस Coronil नामक दवा को कोरोना

नई दिल्ली। मंगलवार को योग गुरु बाबा रामदेव ने जोर शोर से कोरोना की दवा Coronil लांच किया था. इस दौरान बाबा ने इस दवा के माध्यम से कोरोना का शत प्रतिशत इलाज का दावा भी किया। परन्तु अब बाबा अपने ही दावे में फंसते जा रहें हैं. NIMS University के Director का कहना है कि हमने अस्पतालों में किसी Coronil दवा का इस्तेमाल नहीं किया. बल्कि Immunity Booster के रूप में अश्वगंधा, गिलोय और तुलसी दिया गया था. मैं नहीं जानता कि बाबा रामदेव ने इस Coronil नामक दवा को कोरोना का शत प्रतिशत इलाज करने वाला कैसे बता दिया.

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पतंजलि के साथ कोरोना की दवा का क्लीनिकल ट्रायल करने वाले निम्स विश्वविद्यालय के मालिक और चेयरमैन बीएस तोमर पलट गए हैं. उन्होंने कहा है कि हमने अपने अस्पतालों में कोरोना की दवा का कोई भी क्लीनिकल ट्रायल नहीं किया है. बीएस तोमर ने कहा कि हमने Immunity Booster के रूप में अश्वगंधा, गिलोय और तुलसी दिया था. मैं नहीं जानता कि योग गुरु रामदेव ने इसे कोरोना का शत प्रतिशत इलाज करने वाला कैसे बता दिया.

इस पूरे मामले में हैरत की बात यह है कि 20 मई को निम्स विश्वविद्यालय ने सीटीआरआई से औषधियों के इम्यूनिटी टेस्टिंग के लिए इजाजत ली थी. 23 मई को ही ट्रायल शुरू किया गया और 23 जून को योग गुरु रामदेव के साथ मिलकर एक महीने के अंदर ही लोगों के सामने दवा पेश कर दी गई. निम्स के चेयरमैन का कहना है कि हमारी फाइंडिंग अभी 2 दिन पहले ही आई थी. मगर योग गुरु रामदेव ने दवा कैसे बनाई है वह वही बता सकते हैं, मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता हूं.

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कोरोना वायरस जैसी महामारी को मात देने वाली वैक्सीन बनाने का दावा करने के बाद आयुष मंत्रालय ने पतंजलि की दवाई कोरोनिल पर रोक लगा दी है और टेस्ट सैंपल, लाइसेंस आदि को लेकर पूरी जानकारी मांगी थी. पतंजलि ने जवाब में बताया कि इस दवाई को कोरोना वायरस से पीड़ित किसी गंभीर मरीज पर टेस्ट नहीं किया गया है, कम लक्षण वाले मरीजों पर टेस्ट किया गया था.

आयुष मंत्रालय में पतंजलि की ओर से दाखिल रिसर्च पेपर के अनुसार कोरोनिल का क्लीनिकल टेस्ट 120 ऐसे मरीजों पर किया गया है, जिनमें कोरोना वायरस के लक्षण काफी कम थे. इन मरीजों की उम्र 15 से 80 साल के बीच थी और इसमें पुरुष तथा महिला दोनों वर्ग के लोग शामिल किए गए. ट्रायल के दौरान इन सभी को इसके बारे में बताया गया था और उनकी सहमति ली गई थी. इसके पूरे ट्रायल में 2 महीने का वक्त लगा.

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जाहिर है कोरोना का शत-प्रतिशत इलाज करने वाली दवा Coronil के दावे को लेकर पतंजलि की मुश्किलें बढ़ गई हैं. एक तरफ राजस्थान सरकार ने बाबा रामदेव पर केस दर्ज कराने की बात कही है तो वहीं उत्तराखंड सरकार ने भी पतंजलि को नोटिस भेजा है. उत्तराखंड आयुर्वेद विभाग ने नोटिस जारी करके पूछेगा कि दवा लॉन्च करने की परमिशन कहां से मिली?

उत्तराखंड आयुर्वेद विभाग के लाइसेंसिंग ऑफिसर का कहना है कि पतंजलि के अप्लीकेशन पर हमने लाइसेंस जारी किया. इस अप्लीकेशन में कहीं भी कोरोना वायरस का जिक्र नहीं था. इसमें कहा गया था कि हम इम्युनिटी बढ़ाने, कफ और बुखार की दवा बनाने का लाइसेंस ले रहे हैं. विभाग की ओर से पतंजलि को नोटिस भेजा गया है.

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