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रीवा: दर्जन भर से अधिक समितियों में खाद नही, किसानों के ऊपर दोहरी मार

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रीवा: दर्जन भर से अधिक समितियों में खाद नही, किसानों के ऊपर दोहरी मार

रीवा (विपिन तिवारी ) । किसानों के आंदोलन बाद भी समितियों को अभी तक खाद नही मिल पाई है।जिसकी वज़ह से किसानों को प्राइबेट दुकानदारों से दुगनें भाव मे खाद खरीदना पड़ रहा है।ऐसे में जिले का किसान कालाबाजारी का शिकार हुआ है। फ़सल को बचाने के लिए किसानों को मजबूरन प्राइबेट दुकानों से खाद लेनी पड़ रही है। किसानों को खाद की किल्लत के साथ ही कालाबाजारी का सामना करना पड़ रहा है ।

करहिया मंडी समिति में 550 मैट्रिक टन खाद पहुँची औऱ एक ही दिन में खत्म हो गयी।खाद के लिए समिति पहुँचे किसानों का आक्रोश एक बार फ़िर दिखा।ज्ञात हो बीते मंगलवार खाद को लेकर करहिया मंडी में 500 से अधिक किसानों ने खाद की हो रही कालाबाजारी तथा समय पर समितियों से खाद न मिलने पर हंगामा किया था।किसानों का हंगामा देख ज़िला प्रशासन की नींद उठी। अनन फनन में जिला प्रशासन की टीम मंडी पहुँच कर किसानों का गुस्सा शांत कराया। साथ ही समितियों में खाद उपलब्ध कराने की बात कही थी। उसके बाबजूद हफ़्ते बीतने को है किसानों को समितियों से खाद नही मिल रही है।

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इनका कहना है

खेतिहर किसान शिवम द्विवेदी अमाव ने कहा कि समिति में खाद कब आई औऱ कब बितरण हुआ किसानों को इसकी भनक तक नही लगी। जिला प्रशासन को किसानों के प्रति ध्यान देना चाहिए। खाद की हो रही कालाबाजारी पर रोक लगाना चाहिए।अग़र ऐसा ही चलता रहा तो किसानों की खेत मे खड़ी फ़सल नष्ट जो जाएगी।

समिति में खाद के लिए चक्कर लगा रहे विद्या भूषण बताते हैं। खाद की बड़ी परेशानी है।मार्केट में दुगनें दाम पर खाद मिल रही है। समितियों में खाद न मिलने की वज़ह से खाद की कालाबाजारी बढ़ रही है। लेक़िन आज जब समिति खाद लेने ऐसे में किसान को दोहरी मार पड़ रही है।

सत्यदेव पांडेय बभनी गांव है इन्होंने बताया कि समिति में कभी खाद ही नही आई। समिति में खाद न होनें की वज़ह से खाद नही मिल रही है। किसानों की फ़सल बर्बाद होने की कगार पर है। मार्केट में खाद दुगनें भाव से मिल रही है। फ़सल को बर्बाद होने से बचाने के लिए बाहर से खाद लेनी पड़ रही है। खाद की कालाबाजारी की जा रही है।

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हरिहरपुर के रहने वाले हरिशंकर द्विवेदी कहते हैं समिति में खाद नही है। बाजार में खाद के दुगनें भाव है। प्राइबेट दुकानों में 500 रुपये बोरी यूरिया का दाम है। मज़बूरन तीनगुना दाम पर लेना पड़ रहा है।

प्रहलाद द्विवेदी हरिहरपुर के रहनेवाले हैं इनका कहना है। खाद की क़िल्लत है। समिति से खाद मिल नही रही इस लिए दोगुने भाव से मार्केट से खाद लेकर फसलों में छिड़काव करना पड़ रहा है। किसानों की कमर टूट गयी है।

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वर्ज़न
खाद डीएपी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।यूरिया की थोड़ा किल्लत है। यूरिया खाद की 1900 मैट्रिक टन की रैक लगी थी। जिसे समितियों में भेजवा दिया गया है। अगली रैक लगने वाली है। रैक आते ही खाद की हो रही परेशानी खत्म हो जाएगी।

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