रीवा: सरकार बदलते ही नगर निगम का एक और घोटाला आया सामने, मचा हड़कंप...
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नगरीय प्रशासन विभाग का पत्र नगर निगम आयुक्त के पास आया, मांगी गई रिपोर्ट 9.91 करोड़ के प्रोजेक्ट में 21 करोड़ का किया अनुबंध
रीवा। शहर में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था निजी हाथों को सौंपने पर नगर निगम प्रशासन सवालों के घेरे में है। कांग्रेस के पार्षदों की ओर से इस पर सवाल उठाए गए तो नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव ने जानकारी तलब कर ली। विभाग का पत्र नगर निगम पहुंचते ही हड़कंप मच गया है। जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, वे अब निगम से स्थानांतरित हो चुके हैं। पूरे मामले में मेयर इन काउंसिल के निर्णय को भी सवालों में घेरा गया है। शिकायत में कई आरोप हैं, सबमें अलग-अलग स्पष्टीकरण मांगा गया है।
इसके पहले भी नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष अजय मिश्रा बाबा ने नगरीय प्रशासन मंत्री को पत्र लिखा था, जिस पर उन्होंने प्रमुख सचिव को जांच के लिए कहा था। बताया गया है कि एनर्जी सेविंग मॉडल के नए प्रारूप को नगर निगम ने स्वीकृत करते हुए शहर में लागू किया है। इसके तहत एलइडी स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट भारत सरकार के उपक्रम एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (इइएसएल) के माध्यम से इसे लागू किया है। दावा है कि स्ट्रीट लाइट के इस प्रोजेक्ट के तहत कम ऊर्जा खपत वाली एलइडी लगाई जाएगी। पूर्व से शहर की प्रमुख सड़कों और वार्डों में लगी एलइडी और मर्करी लाइट को बदला जा रहा है।
निगम द्वारा कहा जा रहा है कि शत प्रतिशत पूर्व की लाइट बदलने का काम अंतिम स्तर पर है। जिस दौरान निगम ने प्रोजेक्ट को इइएसएल कंपनी को हैंडओवर किया था उस दौरान शहर में 15 हजार 765 खंभों में स्ट्रीट लाइट लगाई गई थी, जिसमें करीब आठ हजार एलइडी थी और अन्य पुराने मॉडल की मर्करी थी।
सतना सहित 30 निकायों को क्लस्टर में करना था शामिल नगरीय प्रशासन विभाग ने जिन आरोपों पर जवाब मांगा है उसमें प्रमुख रूप से नगर निगम सतना सहित ३० निकायों का क्लस्टर प्रोजेक्ट तैयार करना था। इसकी अनुमानित लागत २२ करोड़ रुपए मानी गई थी। इसमें रीवा शहर में प्रोजेक्ट पर खर्च पांच करोड़ रुपए अनुमानित था। आरोप है कि पांच करोड़ वाले इसी प्रोजेक्ट को नगर निगम ने 21.15 करोड़ रुपए बढ़ा दिया। निगम से जवाब मांगा गया है कि क्लस्टर प्रोजेक्ट को निगम ने अकेले किस वजह से तैयार किया और लागत बढ़ाने के पीछे कौन सी वजह रही है।
परिषद को भी किया गुमराह एलइडी स्ट्रीट लाइट के इस प्रोजेक्ट को पास कराने के लिए निगम परिषद को भी गुमराह कराने का आरोप पत्र में है। जिसमें कहा गया है कि परिषद में 9.91 करोड़ रुपए की लागत का प्रोजेक्ट प्रारंभ करने का प्रस्ताव लाया गया था। जिसमें दावा था कि सात वर्षों तक इइएसएल कंपनी नि:शुल्क मेंटेनेंस भी करेगी, जिससे निगम को 6.7 करोड़ रुपए की बचत होगी। इसके बाद अनुबंध जो किया गया वह 21.15 करोड़ रुपए का हुआ है। इतना ही नहीं बिना अनुबंध के ही इइएसएल कंपनी को प्रोजेक्ट का कार्य सौंप दिया गया।
निगम के कर्मचारियों की सेवा कंपनी लेती रही पूर्व में रहे अधिकारियों ने शहर की स्ट्रीट लाइटें निकालने और नई लगाने में मदद के लिए ठेका कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कार्य किया है। इस पर बीते महीने ही निगम आयुक्त ने कंपनी को एक नोटिस जारी किया था कि निगम के कर्मचारियों से कार्य लिया गया है, उन्हें अब तक २९ लाख रुपए से अधिक का भुगतान किया गया है। यह राशि निगम के खाते में जमा करने के लिए कहा गया था लेकिन अब तक कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है। निगम प्रशासन अब इस तैयारी में है कि जब कंपनी को राशि का भुगतान किया जाएगा तो उक्त राशि की कटौती कर ली जाएगी। शर्तों के अनुसार निगम को हर साल दो करोड़ रुपए का भुगतान करना है।