रीवा में एंटी माफिया अभियान की आड़ में गरीबों की झोपड़ियां ढहा रहा प्रशासन, सांसद ने खोल दिया मोर्चा
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रीवा। एंटी माफिया अभियान के दौरान अफसर भू-माफियओं के नाम पर महज खानापूर्ति की कार्रवाई कर रहे हैं। अभियान के दौरान जिला मुख्याल से लेकर नगरीय क्षेत्र में गुजरने वाले हाइवे के ग्रीन बेल्ट पर झुग्गी-झोपड़ी को ढहा शासन को भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट भेज रहे हैं। शहर से लेकर नगर पंचायतों में सरकारी जमीनों पर खड़ी बड़ी-बड़ी इमारतों की ओर जिम्मेदार देखते तक नहीं हैं। प्रशासन की इस कार्यशैली से नाराज भारतीय जनता पार्टी के रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने मोर्चा खोल दिया है।
हाइवे की ग्रीन एरिया में अतिक्रमण हटाकर इतिश्री शहर के निकट इटौरा बायपास के दोनों छोर पर भू-तल परिवहन विभाग के हाइवे की खाली पड़ी भूमि पर लंबे समय से अतिक्रमण था। खाली जमीन पर दर्जनों की संख्या में पक्के मकान का निर्माण था। इसके अलावा इटौरा हाइवे के दोनों छोर पर अस्थाई रूप से सैकड़ो की संख्या में आदिवासी गरीब पॉलीथिन, टेंट कनात की झुग्गी-झोपड़ी स्थापित कर जिंदगी गुजार रहे थे। शनिवार दोपहर हुजूर तहसील प्रशासन और नगर निगम के उडऩदस्ता दल की संयुक्त कार्रवाई में हाइवे के आस-पास 1.50 एकड़ से अधिक एरिया में अतिक्रमण हटाया गया।
राजस्व-ननि संयुक्त दल ने ढहाए अतिक्रमण एसडीएम हुजूर फरहीन खान ने बताया कि आठ से अधिक पक्के मकान अतिक्रमण की कार्रवाई के दौरान ढहा दिए गए। कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणारियों ने विरोध किया। इसके बावजूद प्रशासन ने पक्के मकान को जमींदोज कर दिया। इस दौरान अस्थाई रूप से बनाए गए गरीबों की झुग्गी-झोपड़ी को भी कड़ाके की ठंड में ढहा दिया गया। स्थानीय लोगों ने कहाकि प्रशासन कड़ाके की ठंड के दौरान एंटी माफिया अभियान की कार्रवाई में माफिया के नाम पर कार्रवाई में गरीबों की झुग्गी-झोपड़ी गिरा रहा है।
भूमिहीन हूं, मेरी झोपड़ी उजाडऩे से क्या होगा शहर इटौरा बायपास की खाली जमीन पर अस्थाई रूप से रोजमर्रा का काम कर जीवन यापन करने वाले गरीब परिवारों की झुग्गी-झोपड़ी उजाड़ दी गई। इस दौरान कई गरीब महिलाएं बगैर सूचना दिए ढहाने का आरोप भी लगाए। मजदूरी करने वाली आदिवासी महिला मंजीसा आदिवासी ने कहा सूचना नहीं दिया है। इस सर्दी में बच्चों को लेकर कहां जाऊं, आदिवासी महिला ने कहा कि वह यहां पर डेढ़ साल से रह रही है। मजदूरी कर बच्चों को पातली है। पति की दिमाकी हालत ठीक नहीं है। इस दौरान झोपड़ी उजडऩे के बाद कपड़े बाहर फेंक दिया गया था। बच्चे कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहे थे। झोपड़ी ढहाए जाने के दौरान महिलाएं फफककर रो रहीं थीं। कई गरीबों ने कहा कि ठंडी तक रहने दिया जाए। ठंडी बीतने के बाद हटा लेंगे। गरीबों की एक बात नहीं सुनी गई। इस दौरान कई गरीब महिलाओं ने कहा कि शहर में सरकारी जमीन पर बड़े लोग कब्जाकरके आलीशान घर बना लिए हैं। हम गरीबों की झोपड़ी ढहाने के लिए आ गए।
भाजपा सांसद ने प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा जिले के भाजपा सांसद जनार्दन मिश्र गरीबों की झुग्गी-झोपड़ी ढहाए जाने की सूचना पर इटौरा बायपास पहुंचे। सांसद गरीबों को लेकर कलेक्टर के आवास पर पहुंच गए। सांसद ने कहा, गरीबों की झोपड़ी उजाडऩे से कुछ नहीं होगा। पहले गरीबों को घर दिलाओ, फिर आशियाना उजाड़ो। सांसद का कलेक्टर के आवास पर प्रदर्शन किया। सांसद ने अल्टीमेटम दिया है कि गरीबों के साथ अन्याय बर्दास्त नहीं करेंगे।