रीवा : कार्रवाई से कतरा रहा जिला प्रशासन, जांच के लिए शासन से मांगे थे तीन माह, कलेक्टर ने फिर मांगा समय
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जिले में भू-माफिया के खिलाफ अभियान की रीवा में हवा निकल गई। भले ही प्रदेश भर में इस अभियान के तहत बड़ी कार्यवाहियां की गई हों, लेकिन रीवा में प्रशासन ऐसा कोई कदम नहीं उठा सका। शायद यही वजह है कि 300 करोड़ का घोटाला सामने आने के बाद भी आज तक शासकीय जमीन पर अतिक्रमण कर आशियाना तानने वालों की एक ईंट तक प्रशासन नहीं हिला सका। हद तो यह है कि एक विभाग के कार्यवाही के बाद दूसरे विभाग ने ही कार्यवाही पर विराम लगा रखा है। शासन से मांगे गए तीन माह समाप्त हो जाने के बाद अब एक बार फिर से कलेटर वसंत कुर्रे ने पत्राचार कर जांच पूरी करने के लिए और समय मांगा है। इतना ही नहीं भेजे गए पत्र में बताया भी है कि तीन माह में जांच पूरी नहीं हो सकी है इसलिए और समय की अवश्यकता है। बता दे कि योजना 6 में 300 करोड़ के घोटाले पर जब निगमायुक्त सभाजीत यादव ने पर्दा उठाया तो राजधानी तक हड़कंप मचा रहा। इसके बाद अफसर ही घोटालेबाजो को बचाने में जुट गए। इसी बीच तत्कालीन कलेटर ओपी श्रीवास्तव द्वारा भेजे गए जबाव पर जब निगमायुक्त ने पलटवार किया तो शासन ने एक बार फिर रिपोर्ट कलेटर से मांगी थी तो उन्होंने तीन महीने का समय मांगा और कहा कि तब तक विस्तार से जांच कराई जाएगी। इसके बाद कलेटर ने हुजूर एसडीएम की अध्यक्षता में 15 अटूबर 2019 को एक कमेटी गठित की, जिसमें तहसीलदार हुजूर के साथ ही नगर निगम के अधिकारियों को भी शामिल किया।
इस टीम को निर्देश दिए गए थे कि भूमि अधिग्रहण से लेकर अब तक की स्थितियों की जानकारी एकत्र कर विस्तार से रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसके लिए दो महीने का समय दिया गया था। दो महीने के बजाय अब शासन से मांगे गए तीन माह पूरे हा चुके है लेकिन कलेटर की बनाई गई टीम एक कदम तक रखने योजना की जमीन पर नहीं पहुंची। शासकीय भूमि में तने हैं आशियाने नगर सुधार न्यास बोर्ड द्वारा 1992 में आवासीय एवं व्यवसायिक क्षेत्र विकसित करने के लिए बरा एवं समान में 91.375 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इसमें 28.80 एकड़ रकबा सरकारी भूमि का था। इसमें कुछ हिस्सा नगर निगम ने आवंटित किया है लेकिन सरकारी भूमि वाले हिस्से के साथ ही अन्य पूरे हिस्से में मकान बन गए हैं।
भू-माफियाओं ने दस रुपए के स्टांप पर भूमियों का सौदा कई लोगो से किया। एक जमीन को कई बार बेचा गया। देखते ही देखते अवैध रूप से पूरी कालोनी तैयार कर दी गई। भाजपा शासन काल में तो जांच दबी रही लेकिन कांग्रेस सरकार आते ही इसका खुलासा होने के बाद भी अब कार्यवाही नहीं हो रही है।
इनको मिली थी जांच की जिमेदारी
कलेटर ने स्कीम नंबर छह की जांच के लिए जिन नौ सदस्यों का जांच दल गठित किया था। उसमें एसडीएम हुजूर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में नगर निगम के कार्यपालन यंत्री राजेश सिंह, हुजूर तहसीलदार रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी, नगर निगम के सहायक संपाि अधिकारी अशोक सिंह, निगम के सहायक ग्रेड दो वीरेन्द्र सिंह, हुजूर तहसील के राजस्व निरीक्षक नारायण सिंह, समान हल्का पटवारी गोपाल मिश्रा, सांव हल्का पटवारी जवाहर शुला एवं भटलो के पटवारी वीरेन्द्रधर द्विवेदी आदि को जांच के लिए आदेशित किया गया था।