बाढ़ आने के पहले बहाव क्षेत्र चिन्हांकित करने चलेगा अभियान, रीवा में बिछिया से होगी शुरुआत : REWA NEWS

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Update: 2021-02-16 06:13 GMT

रीवा। शहरी क्षेत्र की नदियों में बढ़ते प्रदूषण के चलते इसकी रोकथाम के लिए अब बड़ी योजनाएं बनाई जा रही हैं। जिसके तहत प्रदूषित नदियों का बहाव क्षेत्र चिन्हित किया जाएगा। इसके लिए जलसंसाधन विभाग व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण के लिए अभियान चलाएगा। इस सर्वे की शुरुआत बिछिया नदी से होगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि नदी में बाढ़ के दिनों में पानी का बहाव किस स्तर पर होता है। विभाग ने इसके लिए गंगा कछार के मुख्य अभियंता के पास निर्देश भेजा है, जिसके आधार पर क्योंटी कैनाल नहर संभाग के कार्यपालन यंत्री को यह सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

शहरी क्षेत्र से निकलने वाले नालों की वजह से बिछिया नदी काफी तेज गति के साथ प्रदूषित हुई है। वर्तमान हालात ऐसे हैं कि इस नदी का पानी पीने के योग्य ही नहीं बचा है। इतना ही नहीं अब तो ऐसी स्थिति बन गई है कि नदी के पानी में नहाने से खुजली होती है और शरीर में फोड़े निकलने लगते हैं। इसके पहले कई बार नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए अभियान चलाए गए लेकिन अंजाम तक कोई भी अभियान नहीं पहुंचा। केन्द्र सरकार के निर्देश पर प्रदूषित नदियों के लिए नए सिरे से कार्य योजना बनाई जा रही है।

बिछिया नदी के किनारे पानी के बहाव की अधिकतम सीमा को चिन्हित किया जाएगा। वर्ष 2016 में 19 एवं 20 अगस्त को नदी के किनारे स्थित मोहल्लों में जलभराव हुआ था। उसी को आधार बनाकर यह सर्वे होगा, संबंधित क्षेत्रों को चिहिन्त कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी, इसके बाद वहां से तय होगा कि फ्लड जोन में बने मकानों को हटाकर ग्रीन एरिया विकसित होगा या फिर किसी अन्य तरह की योजना लागू होगी। यह सब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और शासन के स्तर पर तय होना है।

- प्रदेश की सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में बिछिया भी मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश की सबसे अधिक प्रदूषित २२ नदियों को चिन्हित किया है। जिसमें रीवा शहर की बिछिया नदी का भी नाम शामिल है। इसमें से अधिकांश नदियां शहरी क्षेत्र से गुजरने वाली ही हैं। बिछिया में शहर के पांच प्रदूषित नाले मिलते हैं, जिसकी वजह से नदी का पानी पूरी तरह से खराब हो गया है। इसके साथ ही चाकघाट में टमस नदी भी प्रदूषित है, इसमें तीन प्रमुख नालों के साथ ही कई अन्य नालियां भी मिलती हैं। इसी तरह सरकार ने चित्रकूट की मंदाकिनी नदी को भी चिन्हित किया है। इन तीनों नदियों के पानी के अधिकतम बहाव वाले क्षेत्र को चिन्हित किया जाना है। अभी रीवा शहर में बिछिया नदी से शुरुआत होने जा रही है, बाद में टमस और मंदाकिनी पर भी कार्य होगा।

- एनजीटी की निगरानी पर हो रहा काम देश भर के अलग-अलग हिस्सों की सबसे अधिक प्रदूषित नदियों के लिए कार्य योजना बनाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिशा निर्देश जारी किया है। इसके लिए बीते सप्ताह दिल्ली में देश भर की सबसे अधिक प्रदूषित चिन्हित नदियों को लेकर समीक्षा हुई है। जिसमें रीवा की बिछिया, चाकघाट की टमस और चित्रकूट की मंदाकिनी नदियों की भी रिपोर्ट पेश की गई थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर ही प्रदूषित नदियों के फ्लड प्लेन जोन नक्शे पर अंकित करने का कार्य शुरू किया गया है। नदियों का नक्शा मध्यप्रदेश शासन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से जलसंसाधन विभाग भी निर्धारित शुल्क लेकर उसके आधार पर फ्लड जोन का डिमार्केशन करेगा।

- एसटीपी के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश शहर की बिछिया और बीहर नदियों में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर कलेक्टर बसंत कुर्रे ने गत दिवस बैठक बुलाई थी। जिसमें उन्होंने नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यों में तेजी लाई जाए। इसके लिए एक अप्रेल के बाद शहर में निरीक्षण किया जाएगा और नदियों में जितने भी नाले मिलते हुए पाए जाएंगे उनमें प्रति नाला पांच लाख रुपए प्रति महीने की दर से जुर्माना भी लगाया जाएगा। अभी तक केवल १२ एमएलडी का एसटीपी झिरिया में बीहर नदी के किनारे बनाया गया है, उसमें भी सीवर लाइन का कनेक्शन नहीं हो सका है। आधे शहर की सड़कों को खोदा गया है।

- नहर का पानी छोडऩे की तैयारी जलसंसाधन विभाग के क्योंटी नहर संभाग ने भी 10.14 लाख रुपए की कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत नहर को बिछिया नदी से जोड़ा जाएगा। इसके पानी के तेज बहाव की वजह से नदी का पानी भी बहने लगेगा जिससे नदी के जमा प्रदूषित पानी को भी बहाया जा सकेगा। --

प्रदूषित नदियों का फ्लड जोन चिन्हित किया जाना है। इसके लिए प्रारंभिक रूपरेखा शासन को भेजी गई है। वहां से निर्देश आते ही इसका सर्वे शुरू कर देंगे। बिछिया नदी के शहरी क्षेत्र में ही सबसे अधिक प्रदूषण है, इसलिए यहां पर सर्वे होगा। मनोज तिवारी, कार्यपालन यंत्री क्योंटी नहर संभाग -- बिछिया नदी के प्रदूषण को लेकर एनजीटी के कई निर्देश हैं उनके अनुसार कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर की ओर से भी निर्देश मिला है कि नदी में जितने गंदे नाले मिलते हैं, उनमें तत्काल एसटीपी बनाई जाए, यदि ऐसा नहीं होता तो प्रति नाले की दर से पांच लाख रुपए हर महीने जुर्माना भी वसूला जाएगा। डॉ. आरएस परिहार, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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