पहुंच वाले ठग का भण्डाफोड, अब अजय सिंह राहुल के साथ फोटो वॉयरल, गृहमंत्री से लेकर रीवा कलेक्टर सबसे पहुंच रखता है रीवा का ये ठग, बढ़ रही दिनभर दिन प्रताड़ित लोगो की संख्या

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Update: 2021-02-16 06:11 GMT

गृहमंत्री से लेकर कलेक्टर , जिला पंचायत अध्यक्ष सहित आधा सैकड़ा अधिकारी और नेताओं के साथ अपने गहरे संबंध दर्शाकर ठगी करने वाले युवक के खिलाफ आधा दर्जन पीडि़तों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। पीडि़तों द्वारा बताया गया कि खबर को पढ़कर जानकारी हुई तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई और भागते हुए वह एसपी कार्यालय पहुंचे। पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे विश्वनाथ नामदेव पिता गोविंद नामदेव निवासी बैकुंठपुर ने अपने शिकायती पत्र में लिखा है कि कमल सिंह पिता नारायण सिंह निवासी ग्राम कोटरा कला थाना त्योंथर जिला रीवा अपने आपको यूनियन बैंक का कर्मचारी बताकर शासन की योजनाओं का लाभ दिलाए जाने का झांसा देकर ठगी की है। उसने बैंक से लोन दिलाने और सब्सिडी के नाम पर ठगी की है।

पीडि़त को उद्योग विभाग से रेडीमेड दुकान स्थापित किए जाने व शासकीय योजनाओं के तहत छूट दिलाए जाने का आश्वासन दिया गया था। 28 फरवरी 2019 को पचास हजार नकद और एक बार और तीन हजार रुपये अपने बैंक खाता 087601 70821 पंजाब नेशनल बैंक में और दूसरी बार 7000 रुपये खाते में ट्रांसफर के माध्यम से लिया था। कमल सिंह द्वारा नीरज कुमार नामदेव पिता विश्वनाथ नामदेव एवं राजकुमारी नामदेव पति धर्मेंद्र कुमार नामदेव के नाम से लोन प्रदान करने के लिए रकम ली गई थी। कमल सिंह ने उद्योग विभाग से केस स्वीकृत कराकर सिसडी दिलाने 35 से 40 प्रतिशत छूट दिलाने का आश्वासन दिया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि दिवाकर पिता मोतीलाल तिवारी निवासी महत एवं रामाधार शर्मा निवासी जामू की मौजूदगी में नक दी दी थी। पीडि़त ने बताया कि आरोपी अपने मोबाइल नंबर 9340215757 से लगातार बात करता था। लेकिन लगभग 3 माह से कमल सिंह अपना मोबाइल नहीं उठा रहा था और व्हाट्सएप के माध्यम से आश्वासन दे रहा था। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने दैनिक समाचार पत्र में छपी खबर देखा तो कमल की हकीकत पता चला। सरपंच का पुत्र बताकर कर रहा था ठगी : शिकायतकर्ताओं ने बताया कि ठग कमल सिंह अपने पिता का नाम नरेंद्र सिंह ग्राम पंचायत का सरपंच बताता था और उसके द्वारा कहा जाता था कि मेरे पिताजी एक से बढ़कर एक लग्जरी गाडिय़ों में चढ़ते हैं और ऐशोआराम की जिंदगी जी रहे हैं। जब आरोपी द्वारा मोबाइल बंद कर दिया गया और पीडि़त उसके गृहग्राम कोटरा कला पहुंचे तो घर में खेती बाड़ी का काम कर रहे कमल के पिता नारायण सिंह से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया कि सरपंच मैं नहीं, बल्कि मेरे गांव के नरेंद्र सिंह हैं और कमल मेरा बेटा है। जिसके बाद पीडि़तों की शंका यकीन में बदल गई और उन्हें एहसास हुआ कि कमल बहुत बड़ा ठग है और हम उसके शिकार बन चुके हैं।

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