जानिए ! क्या कारण है कि आमने-सामने आए गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह और एसडीएम, एक पत्र जिसने मचा दिया बवाल : REWA NEWS
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रीवा। राजस्व विभाग न्यायालयों में मनमानी पूर्वक काम किया जा रहा है। शिकायत कुछ होती है और आर्डर सीट में कुछ और लिखा जाता है। इस तरह का मामला रायपुर अनुभाग का सामने आया है जिसमें एसडीएम ने विधायक के ही पत्र को तोड़ मरोड़ कर अपने आर्डर सीट में लेकर आदेश किया है। तदाशय का आरोप लगाते हुए पहाडिय़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता इच्छेश कुमार पांडेय ने कहा कि विधायक नागेंद्र सिंह ने एसडीएम को पत्र लिखकर बताया था कि भूमि 357 व 358 सरकारी भूमि है जबकि आराजी नंबर 356 जोकि 5 एकड़ 35 डिस. हरिवंश प्रसाद शुल के नाम दर्ज और उसमें वह 3 एकड़ महाविद्यालय को दिया है। जिसमें 20 साल से महाविद्यालय बना है। पत्र में 357 व 358 आराजी की नाप की मांग की थी। यह भी कहा था कि यह भूमि श्रमोदय विद्यालय के लिए आवंटित है। इसलिए नाप किया जाना आवश्यक है।
विधायक के पत्र पर एसडीएम ने तहसील को दिए आदेश में उपरोक्त तीनों भूमियों 356, 357 व 358 को हरिवंश प्रसाद शुल की जमीन करार देते हुए सीमांकन के आदेश दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता का आरोप है कि एसडीएम द्वारा जानबूझ कर अतिक्रमित भूमि का बचाने के लिए ऐसा किया है। बताया कि पहाडिय़ा 365 मौजा में भूमि खसरा नंबर 357 व 358 सरकारी हैं। उसके बगल में खसरा नं 366 हरिवंश शुल की निजी भूमि है। उक्त सरकारी भूमि का चार बार सीमांकन हो चुका है। सीमांकन के बाद पहाडिय़ा स्थित अरुण स्मृति कालेज का 30 वाई साढ़े 25 फीट में भवन सरकारी भूमि में है। सीमांकन में हर बार उक्त भवन सरकारी भूमि अतिक्रमित मिलता है लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी कोई कार्रवाई करने के बजाय हर पत्र में नाप जोा का आदेश देकर इतिश्री कर लेते हैं।