रीवा में AAP को लगा दूसरा बड़ा झटका: शेरा सिंह के बाद प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद शर्मा ने भी दिया इस्तीफा, संगठन में मची खलबली!

रीवा में आम आदमी पार्टी को दोहरा झटका! जिला अध्यक्ष शेरा सिंह के बाद प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद शर्मा ने दिया इस्तीफा। जानें क्यों संगठन में मची है भगदड़।

Update: 2026-03-28 04:50 GMT

विंध्य क्षेत्र की राजनीति में अपनी पैठ जमाने की कोशिश कर रही आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए रीवा से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। पिछले 24 घंटों के भीतर पार्टी को एक के बाद एक दो बड़े झटके लगे हैं। रीवा के कद्दावर नेताओं ने पार्टी के पदों से इस्तीफा देकर संगठन की नींव हिला दी है। जिला अध्यक्ष शेरा सिंह के इस्तीफे की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि अब प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद कुमार शर्मा ने भी अपने पद को अलविदा कह दिया है।

प्रमोद शर्मा का अचानक इस्तीफा और हलचल

रीवा के रहने वाले और पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद कुमार शर्मा को हाल ही में संगठन विस्तार के दौरान एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पार्टी के प्रदेश प्रभारी द्वारा जारी आदेश में उन्हें मध्यप्रदेश का प्रदेश प्रवक्ता नियुक्त किया गया था। लेकिन, इस जिम्मेदारी को मिलने के कुछ ही समय बाद प्रमोद शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको हैरान कर दिया।

प्रमोद शर्मा ने अपने इस्तीफे का कारण 'व्यक्तिगत' बताया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट किया कि वे पार्टी के मूल सिद्धांतों—ईमानदारी, पारदर्शिता और जनहित की राजनीति—के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहे हैं। हालांकि, निजी कारणों के चलते वे वर्तमान में इस अहम जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेज दिया है।

जिला अध्यक्ष शेरा सिंह ने पहले ही छोड़ा था साथ

इस संकट की शुरुआत शुक्रवार शाम को हुई जब आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष (शहरी) एडवोकेट राजीव सिंह परिहार, जिन्हें लोग शेरा सिंह कहते हैं, ने इस्तीफा दे दिया। शेरा सिंह ने अपना इस्तीफा मध्यप्रदेश के प्रभारी जितेंद्र सिंह तोमर को भेजा। पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर अंदरूनी नाराजगी की खबरें आ रही थीं और शेरा सिंह का पद छोड़ना उसी असंतोष का परिणाम माना जा रहा है।

पार्टी कार्यकर्ताओं में छाई मायूसी

रीवा में आम आदमी पार्टी के दो बड़े स्तंभों के अचानक गिरने से स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी मायूसी का माहौल है। पार्टी जो आने वाले समय में जिले में एक मजबूत विकल्प बनने की तैयारी कर रही थी, अब खुद को बचाने की चुनौती से जूझ रही है। लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने संगठन की कार्यप्रणाली और नेताओं के बीच आपसी सामंजस्य पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है इस सामूहिक इस्तीफे का असर?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रीवा में 'AAP' की इकाई पर इस समय भारी दबाव है। अंदरखाने चल रही गुटबाजी या रणनीति में मतभेद की चर्चाएं अब खुलकर सामने आने लगी हैं। प्रदेश प्रवक्ता और जिला अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों का खाली होना पार्टी की भविष्य की चुनावी तैयारियों को कमजोर कर सकता है। अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इन इस्तीफों को स्वीकार करता है या फिर नाराज नेताओं को मनाने की कोई कोशिश की जाएगी।

फिलहाल, रीवा और आम आदमी पार्टी की राजनीति में इन दोनों इस्तीफों ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। यह आम आदमी पार्टी के लिए एक आत्ममंथन का समय है कि आखिर क्यों उनके पुराने और विश्वसनीय चेहरे एक-एक कर साथ छोड़ रहे हैं।

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