Lumpy Skin Disease: कारगर है लंपी बीमारी में देसी उपचार, सरल तरीके से पशुपालक करें इलाज

Lumpy Skin Disease: पशु चिकित्सकों के अनुसार इस संक्रामक बीमारी (Infectious Disease) के इलाज के लिए कई आयुर्वेदिक उपाय हैं।

Update: 2022-08-10 12:50 GMT

Lumpi disease in cow treatmentराजस्थान में लम्पी नामक बीमारी (Lumpy Skin Disease) जो पशुओं के त्वचा में बहुत तेजी से संक्रमण फैलाता है। इस बीमारी की चपेट में गुजरात, राजस्थान तथा अन्य कई प्रांतों के मवेशी चपेट में हैं। रोग को नियंत्रित करने के लिए वैक्सीनेशन (Lumpy Vaccine) का सहारा लिया जा रहा है। लेकिन पशु चिकित्सकों का कहना है कि इस संक्रामक बीमारी (Infectious Disease) के इलाज के लिए कई आयुर्वेदिक उपाय हैं जिन्हें अपनाकर पशुपालक सरलता से पशुओं की देखभाल कर सकता है।

जागरूक हो पशुपालक

हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर (Himachal Pradesh Agriculture College) के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. ठाकुर का कहना है कि इस लंबी नामक बीमारी से पशुओं की रक्षा करने के लिए पशुपालकों का जागरूक होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यह एक क्रमांक रोग है इसका इलाज परंपरागत तरीके से भी किया जा सकता है।

संक्रमित पशु को खिलाने की औषधि

संक्रमित पशु को खिलाने के लिए खुराक तैयार करनी होती है। इसमें 10 पान के पत्ते, 10 काली मिर्च, 10 ग्राम नमक तथा आवश्यकतानुसार गुड़ मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। इसके बाद इस मिश्रण की थोड़ी-थोड़ी मात्रा मे हर 3 घंटे के बाद पशुओं को खिलाएं।

संक्रमित पशु के घाव में लगाने की औषधि

संक्रमित पशु के घाव में लगाने के लिए अलग से औषधि तैयार करनी होगी। जिसमें कुम्पी का पत्ता एक मुट्ठी, लहसुन की 10 कली, नीम की पत्ती एक मुट्ठी, मेहंदी की पत्ती एक मुट्ठी, नारियल और तिल का तेल 500 मिलीलीटर, हल्दी पाउडर 20 ग्राम तथा तुलसी का पत्ता एक मुट्ठी लेकर सभी सामग्रियों को कूट पीसकर पेस्ट तैयार कर लें। इसके बाद नारियल का तेल मिलाकर उबालें और ठंडा कर लें।

इस मिश्रण के ठंडा हो जाने के बाद सुरक्षित रख लें। घाव की अच्छे से सफाई करें और इन्हें धोने के बाद गांव पर लगा दें। अगर घाव में कीड़े दिखाई दे रहे हैं तो नारियल के तेल में कपूर मिलाकर लगा दे।

राजस्थान में स्थिति भयावह

लंबी बीमारी की चपेट में आने से राजस्थान के 40 से 45 हजार मवेशी काल के गाल में समा चुके हैं। वहीं लाखों मवेशी संक्रमण की चपेट में हैं। जिनका इलाज करने के लिए पशु स्वास्थ्य अमला दिन रात एक किए हुए हैं। मध्य प्रदेश का पड़ोसी राज्य होने की वजह से मध्यप्रदेश में भी इस बीमारी के फैलने की आशंका के मद्देनजर एमपी सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। वही इस बीमारी से इलाज के लिए कई घरेलू नुस्खे भी बताए गए हैं। आइए जाने कौन से हैं वह घरेलू नुस्खे जिनसे संक्रमित मवेशियों के स्वास्थ्य की देखभाल की जा सकती है।

नोट- इस समाचार में दी गई जानकारी पशुपालकों के लिए सूचना मात्र है। बताई गई देसी और घरेलू औषधि को तैयार करने और उपयोग में लेने से पहले विशेषज्ञ चिकित्सक से अवश्य सलाह ले लें। रीवा रियासत समाचार इसकी पुष्टि नहीं करता।

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