महाकाल लोक में शिवराज से ज्यादा महाराज को तवज्जो: सिंधिया को अपने साथ दिल्ली ले गए पीएम मोदी, क्या यह एमपी के सीएम पद में बदलाव की आहट तो नहीं?

एमपी में एक बार फिर सीएम की कुर्सी पर चेहरे के बदलाव के चर्चे तेज हो गए हैं. उज्जैन के महाकाल लोक में पीएम मोदी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच नजदीकियों की वजह से अब सियासी पटल पर सीएम के बदलाव की बातें होने लगी हैं.

Update: 2022-10-15 07:38 GMT

एमपी में एक बार फिर सीएम की कुर्सी पर चेहरे के बदलाव के चर्चे तेज हो गए हैं. उज्जैन के महाकाल लोक में पीएम मोदी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच नजदीकियों की वजह से अब सियासी पटल पर सीएम के बदलाव की बातें होने लगी हैं. दरअसल, 11 अक्टूबर को पीएम मोदी ने महाकाल लोक प्रोजेक्ट का लोकार्पण किया था. इस दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी वहीं मौजूद थें, वे और पीएम मोदी एक साथ दिल्ली के लिए रवाना हुए. 

यह कोई पहली बार नहीं है जब मध्यप्रदेश में राज्य का मुखिया बदलने की चर्चाएं चली हों. इसके पहले भी कई बार सीएम के चेहरे में बदलाव की चर्चाएं जोरो तक चली हैं. लेकिन एक बार फिर सीएम पद में चेहरे के बदलाव की चर्चाएं तेज है. इसकी वजह है पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की नजदीकियां. ये नजदीकियां उज्जैन में महाकाल लोक के लोकार्पण के वक़्त ज्यादा दिखीं जिसकी वजह से सियासी गलियारे में सीएम के चेहरे में बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई है.

महाराज और पीएम की नजदीकियों से बीजेपी नेताओं की नींद उड़ी 

उज्जैन में महाकाल लोक के लोकार्पण के दौरान 'महाराज' को जो तवज्जो मिली है, उसने बीजेपी नेताओं की नींद उड़ा दी. पीएम मोदी जब महाकाल मंदिर में पूजा करने गए, तो मुख्यमंत्री और राज्यपाल के अलावा 'महाराज' यानी सिंधिया भी उनके साथ गए. जबकि मोदी कैबिनेट में शामिल एमपी के नेता सभास्थल पर पहुंचे. इसके बाद सिंधिया पीएम मोदी के साथ ही दिल्ली रवाना हो गए, जबकि उनका दिल्ली जाने का कार्यक्रम रात 10 बजे इंडिगो फ्लाइट से तय था. अब महाराज और पीएम मोदी का एकसाथ जाना तो एमपी के बीजेपी नेताओं की नींद उड़ाने के लिए काफी है. बात सिर्फ मोदी के साथ जाने की ही होती तो भी ठीक था, लेकिन यह इसलिए भी क्योंकि महाराज इंदौर पहुंचने के बाद संघ कार्यालय भी गए थे.

हांलाकि ये सिर्फ देखने का नजरिया है. कुछ लोग ज्योतिरादित्य और मोदी की नजदीकियों को आम नजरिए से देखते हैं तो महाराज समर्थक इसे राज्य के भविष्य की तरह देखते हैं और बाकी नेताओं की धड़कनें तेज होना भी लाजमी है, क्योंकि कौन सा ऐसा नेता नहीं है जो पीएम का ख़ास बनना चाहता हो, वैसे भी एमपी का सीएम बनने का सपना तो हर नेता का है. लेकिन शिवराज बनना भी इतना आसान नहीं है.

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