देश में केवल एमपी में हैं 101 साल पुराने त्रिलोका बेर के पेड़, इसकी खासियत व किन बीमारियों में है फायदेमंद जान लें

एमपी में 101 साल पुराने त्रिलोका बेर के पेड़ आज भी मौजूद हैं। इसके एक पेड़ में ढाई क्विंटल तक फल लगते हैं। देश में इसके केवल 5 पेड़ हैं जो एमपी में हैं।

Update: 2023-02-01 10:24 GMT

एमपी में 101 साल पुराने त्रिलोका बेर के पेड़ आज भी मौजूद हैं। इसके एक पेड़ में ढाई क्विंटल तक फल लगते हैं। देश में इसके केवल 5 पेड़ हैं जो एमपी में हैं। एक बेर का वजन 40 से 50 ग्राम तक वजनी होता है। बताया गया है कि इस बेर के पल्प चिपचिपा नहीं होता। इसको सेव की तरह काटा भी जा सकता है। जिसकी डिमांड भी देश के कई शहरों में है। जानकारों की मानें तो देश में 125 वेरायटी के बेर होते हैं किन्तु उसमें त्रिलोका बेर का नाम नहीं है।

ईटखेड़ी में आज भी सुरक्षित हैं पेड़

भोपाल की ईटखेड़ी स्थित फल अनुसंधान केन्द्र में त्रिलोका वेरायटी की बेर के पेड़ आज भी सुरक्षित और संरक्षित हैं। केन्द्र के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डाॅ. आरके जायवाल के मुताबिक इस बेर को सेव की तरह काटा जा सकता है। यह चिपचिपा नहीं होता। इस वेरायटी के बेर की डिमांड लखनऊ, दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, हैदराबाद से लेकर कोलकाता सहित देश के कई शहरों में है। उनका कहना है कि देश में 125 वेरायटी के बेर पाए जाते हैं जिसमें त्रिलोका बेर का नाम नहीं है। उत्तरप्रदेश में बेर की एक त्रिलोचन वेरायटी जरूरी मिलती है।

कैसे नाम पड़ा त्रिलोका

फल अनुसंधान केन्द्र के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डाॅ. आरके जायवाल ने बताया कि त्रिलोका बेर के पौधे प्राकृतिक रूप से नवाबी दौर में इस्लामनगर के मंदिर में पनपे थे। यह पौधे जब बड़े हो गए इस पर रिसर्च के बाद इसकी बड अनुसंधान केन्द्र में लाई गई। यह पेड़ मंदिर में लगे थे जिसके कारण लोगों ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश त्रिदेव का प्रसाद मानकर इसका नाम त्रिलोका रख दिया।

इन बीमारियों में है फायदेमंद

बताया गया है कि त्रिलोका बेर कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी से जुड़ी बीमारियों के लिए बहुत ही फायदेमंद है। सौ ग्राम बेर में विटामिन ए 11, 12 आईयू, विटामिन सी 19.3 मिलीग्राम, पोटेशियम 30 से 70 मिलीग्राम, फास्फोरस 6 मिलीग्राम, मैग्निशियम 3 से 5 मिलीग्राम, कैलोरी 22 और नेचुरल शुगर 8 से 25 मिलीग्राम तक पाई जाती है। इस बेर में फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण डाइजेशन में भी अत्यधिक फायदेमंद है।

त्रिलोका बेर की खासियत

त्रिलोका बेर का पल्प चिपचिपा नहीं होता जिसको सेव फल की तरह काटा जा सकता है। 40 से 50 ग्राम तक एक बेर का वजन रहता है। अन्य बेरों की किस्मों के मुकाबले ये देरी से पकता है। इसके पकने के समय दूर तक बहुत अच्छी खुशबू जाती है। पके हुए बेर को खाने में यह बहुत ही मीठा रहता है। मार्च महीने के अंत तक त्रिलोका के पेड़ पर फल आते हैं। गुठली छोटी होने के साथ ही पल्प ज्यादा मात्रा में मौजूद रहता है।

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