मऊगंज बायपास जमीन विवाद: BJP विधायक का बड़ा पलटवार, 150 लोगों पर केस दर्ज
मऊगंज बायपास भूमि विवाद फिर गर्मा गया है। भाजपा विधायक द्वारा 150 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। जानिए पूरा मामला, दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासन की कार्रवाई।
- मऊगंज बायपास भूमि विवाद में नया मोड़
- BJP विधायक ने दर्ज कराई शिकायत, 150 लोगों पर केस
- दूसरे पक्ष ने भी लगाई जमीन हड़पने की आरोपों की झड़ी
- पुलिस और प्रशासन ने शुरू की जांच, माहौल तनावपूर्ण
मध्यप्रदेश के मऊगंज बायपास इलाके में लंबे समय से चल रहा भूमि विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। जानकारी के अनुसार, हाल ही में विधायक प्रदीप पटेल धरने में बैठ गए थे, उन्हें धरना देते हुए देख हंगामे शुरू हो गए और भारी भीड़ जुटने के बाद मामला और ज्यादा गंभीर हो गया। विधायक का आरोप है की भीड़ ने विधायक के साथ धक्कामुक्की और गाली-गलौज की थी। इसी बीच BJP विधायक ने पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद करीब 150 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विवादित जमीन पर बायपास निर्माण और निजी दावे लगातार टकरा रहे हैं। इस वजह से कई दिनों से तनाव का माहौल बना हुआ है। वहीं, विधायक का आरोप है कि विरोध के नाम पर कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और प्रशासनिक कार्यवाही में बाधा डाली।
मामला कैसे बढ़ा? पूरे विवाद की पूरी कहानी
बताया जाता है कि जिस जमीन पर बायपास विकसित किया जाना है, उस पर कई लोगों ने मालिकाना हक होने का दावा किया। कुछ लोगों का कहना है कि जमीन पुराने समय से उनके परिवार के कब्जे में है, जबकि दूसरी तरफ सरकारी दस्तावेज कुछ और कहानी बताते हैं। इसी को लेकर जब पंचायत स्तर पर समाधान नहीं निकल पाया, तो विवाद सड़कों तक पहुंच गया।
सूत्रों के अनुसार, एक दिन अचानक बड़ी संख्या में लोग विवादित भूमि पर जमा हो गए। नारेबाजी हुई, बहस बढ़ी और पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। बाद में यह मामला सीधे थाने तक पहुंच गया, जहाँ से अब यह कानूनी प्रक्रिया में चला गया है।
BJP विधायक का आरोप — “कानून हाथ में लिया गया”
BJP विधायक का कहना है कि विरोध करना अलग बात है, लेकिन कुछ लोगों ने जबरन कब्जे जैसी कोशिशें कीं। उनके अनुसार, भीड़ ने प्रशासन के काम में रुकावट पैदा की और स्थिति को भड़काने की कोशिश की। इसी आधार पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद 150 लोगों पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज हो गया।
दूसरे पक्ष का आरोप — “जमीन हमारी, अन्याय हो रहा है”
दूसरी तरफ, विवादित जमीन का दावा करने वाले लोगों का कहना है कि यह उनकी पुश्तैनी भूमि है। उनका आरोप है कि दस्तावेजों को गलत तरीके से बदला गया और बायपास के नाम पर जमीन छीनी जा रही है। कई ग्रामीणों ने यहां तक कहा कि वे केवल अपना अधिकार बचाना चाहते थे।
उन्होंने प्रशासन पर भी सवाल उठाए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी बातों पर अड़े हुए हैं, और विवाद सुलझने के बजाय और ज्यादा उलझता दिख रहा है।
प्रशासन की भूमिका — जांच शुरू, कागज़ात खंगाले जा रहे
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सभी रिकॉर्ड और भूमि संबंधी दस्तावेजों की जांच हो रही है। अधिकारियों के अनुसार, किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा, और कानून व्यवस्था बनाए रखना सबसे पहली प्राथमिकता है।
फिलहाल पुलिस मामले में बयान दर्ज कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि भीड़ कैसे इकट्ठी हुई, किसने उकसाया और विवाद को भड़काने में कौन-कौन शामिल था।
आगे क्या हो सकता है?
कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में फैसला दस्तावेजों और सरकारी अभिलेखों के आधार पर ही होता है। यदि जमीन सचमुच सरकारी योजना के अंतर्गत आती है, तो मुआवजा दिया जा सकता है। लेकिन अगर दस्तावेज ग्रामीणों के हक में निकले, तो मामला बिल्कुल अलग दिशा पकड़ सकता है।